Apple Daily Closure: लोकतंत्र की हत्या क्यों माना जा रहा है इसका बंद होना

हॉन्गकॉन्ग का प्रतिष्ठित दैनिक अखबार एप्पल डेली (Appke Daily) गुरुवार को बंद हो गया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Lewis Tse Pui Lung / Shutterstock)

Apple Daily Closure: हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong) के प्रतिष्ठित दैनिक अखबार के अंतिम संस्करण की प्रति की रिकॉर्ड बिक्री के बीच कई देशों ने इसे मीडिया (Media) की आजादी के लिए दुखद कहा.

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    जब हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong) में एप्पल डेली (Apple Daily)अखबार का अंतिम संस्करण प्रकाशित हुआ तो लोग सुबह से उसे खरीदने के लिए बेताब दिखे. हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र की आवाज माना जाने वाला यह अखबार अब बंद हो गया है. एप्पल डेली के मालिक और सम्पत्ति पर चीनी कार्यवाई होने के बाद इस अखबार को बंद करने की घोषणा कर दी थी जिसके बाद गुरूवार को इसका आखिरी संस्करण निकला. दुनिया भर में इस अखबार के बंद होने पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) तक ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता के लिए दुखद दिन बताया.

    क्यों हुआ बंद
    हॉन्गकॉन्ग में काफी समय से चीन अपने नीतियां थोपने का प्रयास कर रहा है जबकि वहां के लोग अपने लोकतंत्र को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं. एक हफ्ते पहले ही अखबार के ऑफिस में छापा पड़ा था. अखबार पर आरोप था कि उसकी बहुत सी रिपोर्ट में विविदास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन किया था. पुलिस ने मुख्य संपादक और अन्य 5 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर कंपनी से संबंधित सम्पत्ति जप्त कर ली गई.

    लोकतंत्र का समर्थक
    एप्पल डेली हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र समर्थक अखबार माना जाता है. यह अखबार हॉन्गकॉन्ग और चीनी नेतृत्व का मुखर आलोचक था जिसकी वजह से चीन की के लिए परेशानी बन गया था. इस अखबार ने ना केवल चीन की नीतियों की आलोचना की थी बल्कि हॉन्गकॉन्ग में चीन के दमनकारी कार्यों को भी उजागर करने के काम किया था.

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    एप्पल डेली (Appke Daily) के दफ्तर पर एक सप्ताह पहले ही छापा पड़ा था. (तस्वीर: Yu Chun Christopher Wong / Shutterstock.)


    लोकप्रियता का आलम
    इतना ही नहीं एप्पल डेली हॉन्गकॉन्ग में बहुत लोकप्रिय अखबार था. आमतौर पर रोजाना 80 हजार प्रतियां प्रकाशित होती थी लेकिन गुरुवार को अंतिम संस्करण की घोषणा के बारे में पता लगने पर लोगों ने रात से अखबार के बाहर कतार लगानी शुरू कर दी थी जिससे वे सुबह सबसे पहले अखबार खरीद सकें और सुबह 8 ही बजे ही अखबार की 10 लाख प्रतियां बिक गईं.

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    तुरंत बंद करने का हुआ फैसला
    एप्पल डेली के प्रबंधन ने अखबार को बंद करने के फैसले पर कहा कि उनके स्टाफ के सदस्यों की सुरक्षा के मद्देनजर यह तय किया गया कि अखबार का काम तुरंत बंद दिया जाए. इसी वजह से गुरुवार का संस्करण आखिरी संस्करण बन गया. इसके साथ ही अखबार ने यह भी तय कर लिया था कि वह अखबार की लाखों प्रतियां प्रेषित करेगा.

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    हॉन्गकॉन्ग (Hong Kong) में कई बार चीन को लोकतंत्र के खिलाफ काम करने का विरोध झेलना पड़ा है. (तस्वीर: Jimmy Siu / Shutterstock)


    दुनिया भर में आलोचना
    अखबार के बंद होने की खबर आने के बाद से ही दुनिया भर में चीन और अखबार के बंद होने की आलोचना हो रही है.अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अखबार के बंद होने की घटना को मीडिया स्वतंत्रता के लिए दुखद बताया. वहीं यूके के विदेश सचिव डोमिनिक राब ने कहा कि अखबार का बंद होने हॉन्गकॉन्ग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा झटका है.

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    चीन की प्रतिक्रिया
    दरअसल एप्पल डेली भी हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र के लिए संघर्ष के प्रतीक के तौर पर देखा जाता था. वहीं चीन भी अपने कम्युनिस्टवादी नीतियों को लागू करने के भरसक प्रयास करता रहा है. एप्पल डेली भी चीन के इरादों को उजागर करने का प्रयास किया करता था जिसकी वजह से चीन उसे अपने लिए सरदर्द मानने लगा था. चीनी अधिकारियों ने अखबार पर मीडिया से कहा है कि हॉन्गकॉन्ग में मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है, लेकिन यह सबकुछ नहीं है.

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