-30 डिग्री तापमान और बर्फीले तूफान में भी सेना के हौसले बुलंद रखेगा आर्कटिक टेंट

-30 डिग्री तापमान और बर्फीले तूफान में भी सेना के हौसले बुलंद रखेगा आर्कटिक टेंट
बर्फीली ठंड से मुकाबले के लिए भारतीय सेना ने इंतजाम शुरू कर दिया है (Photo- defense.gov)

हड्डियां जमा देने वाली सर्दियों में भी भारतीय सेना इस बार लद्दाख (Indian army in Ladakh) में रहेगी. इस दौरान आर्कटिक टेंट (Arctic tent) उनके काफी आने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 4, 2020, 4:09 PM IST
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भारत और चीन के बीच लद्दाख (India-China border tension) को लेकर तनाव हाल-फिलहाल कम होता नहीं दिख रहा. इस बीच बर्फीली ठंड से मुकाबले के लिए भारतीय सेना (Indian army) ने इंतजाम शुरू कर दिया है. वो ऐसे टेंट लगा रही है, जिसके भीतर तूफानी रफ्तार वाली ठंडी हवाओं के बीच भी सैनिक सुरक्षित रह सकें. खास तरह के इन टेंट को आर्कटिक टेंट कहते हैं.

क्या हालात हैं लद्दाख में
लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी और देपसांग में चीन ने 17000 से भी ज्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं. साथ में हथियार और बख्तरबंद वाहन भी हैं. इसके जवाब में भारत ने भी सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है, जो चीन को टक्कर देने वाली है. साथ ही भारतीय सेना सर्दियों के मौसम के लिए भी इन्सुलेटेड कैंप बनाने में जुटी हुई है यानी वे जगह, जहां का तापमान नियंत्रित रह सकें. बता दें कि लद्दाख में ठंड में तापमान -30 से -40 डिग्री सेंटिग्रेट तक भी चला जाता है. ऐसे में भारी और कितनी ही लेयर वाले कपड़े क्यों न पहने जाएं, आंधी-तूफान में किसी काम के नहीं रह जाते. यही देखते हुए सेना वहां आर्कटिक टेंट लगाने जा रही है. इसकी कई खासियतें हैं लेकिन जैसा नाम से समझ आ रहा है, इसका मुख्य काम सर्दी से बचाना है.

खास तरह के इस टेंट को आर्कटिक ओवन टेंट भी कहते हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pikist)

क्या खासियत है इनकी


खास तरह के इस टेंट को आर्कटिक ओवन टेंट भी कहते हैं. साल 1987 में बर्फीले इलाकों में कैंपिंग के साथ सैनिकों के लिए तैयार किए गए इन टेंट की खासियत इसका फैब्रिक है. वेपेक्स नाम के मटेरियल बना कुछ ऐसा होता है कि टेंट से बाहर भारी बारिश के साथ बर्फबारी भी हो रही हो तो भी अंदर के तापमान को सूखा रखता है. साथ ही अंदर की नमी भी बनाए रखता है ताकि सांस लेने में कोई समस्या न हो.

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बर्फबारी में भी सुरक्षित
चूंकि इस टेंट की दीवारें नमी-रहित होती हैं, लिहाजा अगर एक टेंट में 6 फीट से लंबा व्यक्ति हो तो भी वो बिना पैर सिकोड़े एक से दूसरे कोने तक फैलकर सो सकता है. टेंट ठीक से एडजस्ट हो, इसके लिए उसके फैब्रिक के भीतर एलुमीनियम की मोटी ट्यूब होती है. इससे टेंट खुद ही खड़ा हो जाता है और भारी बर्फबारी में भी गिरता नहीं है. इसके ऊपर भी बर्फ जमा हो जाए तो ये सीधा रहता है. इसे खोलकर एक से दूसरी जगह भी ले जाना उतना ही आसान है. यानी ये सैनिकों के लिहाज से बिल्कुल सही टेंट है.

चीन से तनाव को देखते हुए भारत ने भी सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है- सांकेतिक फोटो


-30 तापमान में जब थोड़ी दूर निकलकर चलना भी आसान नहीं होता है, तब खराब मौसम के लिए आर्कटिक टेंट में स्टोरेज की भी व्यवस्था है. वहां सैनिक राशन से लेकर हथियार और अपनी जरूरत की सारी चीजें रख सकते हैं. ऐसे में अगर तूफानी मौसम हो तो किसी को एक से दूसरी जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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प्री-फैब्रिकेटेड झोपड़ियां भी आएंगी
आर्कटिक टेंट के साथ-साथ प्री-फैब्रिकेटेड झोपड़ीनुमा स्ट्रक्चर बनाए जाने की भी तैयारी है. ये prefab भी कहलाते हैं. असल में ये टेंट की तरह ही होते हैं लेकिन सारे मौसमों के लिए हैं. इन्हें असेंबल करके बनाया जाता है और इनके भीतर रहने के लिए सारे इंतजाम होते हैं. अब भी कई देशों में ऑनसाइट रहने वाले इंजीनियरों और स्टाफ के लिए प्री-फैब ही दिए जाते हैं. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब कई देशों के शहरों में भारी तबाही मच गई और इमारतें टूट गईं, तब वहां के लोगों ने इसी तकनीक के जरिए काफी दिनों तक गुजारा किया था.

सर्दियों को देखते हुए वहां एक खास तरह की डीजल भी सप्लाई की जाने वाली है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


सर्दियों के लिए खास डीजल तैयार
इन टेंटों के अलावा हमारी सेना ईंधन का भी स्टॉक करने में लगी हुई है. बता दें कि सर्दियों को देखते हुए वहां एक खास तरह की डीजल भी सप्लाई की जाने वाली है. माइनस तापमान में काम आने वाली इस डीजल को तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) लेकर आई है ताकि सर्दियों में भी जवानों का मूवमेंट आसान हो सके.

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IOCL का दावा है कि ये लद्दाख की सर्दियों में भी जमेगा नहीं. इसे विंटर डीजल कहा जा रहा है. विंटर डीजल को ऊंचे स्थानों तक सप्लाई करने के लिए सारी तैयारियां हो चुकी हैं. ये पनीपत रिफाइनरी में पंप होगा और वहां से जालंधर जाएगा. जालंधर से फ्यूल सड़क मार्ग से लेह पहुंचेगा. यहां से वो और ऊंचे स्थानों पर ले जाया जाएगा.
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