क्या मरने के बाद फिंगरप्रिंट बदल जाते हैं, अगर ऐसा होता है तो क्यों

मरने के तुरंत बाद शरीर का इलैक्ट्रिक चार्ज काम करना बंद कर देता है और इसका असर अंगुलियों पर भी पड़ता है.

आमतौर पर ये माना जाता है कि मरने के बाद भी हमारी अंगुलियों के निशान वैसे ही रहते हैं लेकिन ऐसा नहीं है. साइंस की रिसर्च बताती है कि निधन होते ही शरीर का इलैक्ट्रिक चार्ज खत्म हो जाता है और तब पूरी बॉडी में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं.

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    तमाम बॉलीवु़ड फिल्मों में आपने देखा होगा कि विलेन किसी को जान से मारने के बाद जायदाद और अन्य जरूराी कागजात पर उसके अंगूठे के निशान ले लेता है. लेकिन वास्तव में ये बात सच्चाई से कोसों दूर है. साइंस कहती है कि ऐसा नहीं हो सकता.

    क्या आप जानते हैं कि मरने के बाद हमारे फिंगरप्रिंट वैसे नहीं रहते जैसे पहले थे. वे बदल जाते हैं. बदलने से पहले भी आप फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि मरते ही मानव शरीर में इलेक्ट्रिकल चार्ज खत्म हो जाता है. उस इलेक्ट्रिकल चार्ज से ही शरीर का कोशिका तंत्र काम करता है.

    तो क्या मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट बदलते हैं? उनके निधन के कितने समय बाद उन प्रिंटों को पहचान के लिए उपयोग करना संभव है?

    मृत्यु से पहले आपके फिंगरप्रिंट्स जितने साफ होते हैं और उन्हें समझा जा सकता है. वैसा मृत्यु के बाद नहीं रह जाता, वो ना केवल बदल जाते हैं बल्कि काफी हद तक ब्लर और अस्पष्ट हो जाते हैं. उनका पैनापन गायब हो जाता है.


    यदि आप आपराधिक नॉवेल पड़ने या उस तरह की फिल्मों के शौक़ीन हैं तो आपकी लगेगा कि ऐसा नहीं हो सकता. राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के 14 जुलाई, 2015 संस्करण में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि प्रिंटिंग के दो सेटों के बीच समय अंतराल बढ़ने के साथ फिंगरप्रिंट पहचान कम विश्वसनीय हो जाती है.

    तब जकड़ जाती हैं अंगुलियां
    आमतौर पर मरने के बाद किसी भी व्यक्ति की अंगुलियां जकड़ जाती हैं, जिसके चलते उनका फिंगरप्रिंट लेना आसान भी नहीं रहता. विज्ञान ने इसके लिए खास उपकरण विकसित किए हैं. ऐसे में अंगुलियों को एक विशेष घुमावदार उपकरण का उपयोग करके फिंगरप्रिंट लिए जा सकते हैं.

    लेकिन बहुत बार फिंगरप्रिंट लेना लगभग नामुमकिन हो जाता है.  अगर कोई शव बहुत अधिक गल जाता है तब भी आप उनके फिंगरप्रिंट नहीं ले सकते. लेकिन ये साफ है कि मृत और जीवित व्यक्तियों के फिंगर प्रिंट में बहुत अंतर आ जाता है. इनका पता डॉक्टर, फोरेंसिक एक्सपर्ट तो लगा ही लेते हैं. प्रयोगशालाओं में भी इनका पता साफतौर पर चल जाता है.

    फोरेंसिक एक्सपर्ट तुरंत ये समझ सकता है कि ये फिंगरप्रिंट मृत व्यक्ति के हाथों के हैं या फिर जिंदा शख्स के. प्रयोगशालाओं में भी इनका साफतौर पर पता लगाया जा सकता है.


    कई बार ये फिंगरप्रिंट भी काम के होते हैं
    हालांकि ऐसा नहीं है कि मृत व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट से कुछ पता नहीं लग सकता बल्कि एक ही व्यक्ति के जिंदा रहने और मृत होने के बाद फिंगरप्रिंट में एक खास तरह की सिमैट्री तो होती ही है. कई बार मृतक की पहचान भी फिंगरप्रिंट से होती है. ऐसे में साइंस त्वचा की प्रिंट लेने के लिए सिलिकॉन पुट्टी का इस्तेमाल करती है. सिलिकॉन पुट्टी पर जो प्रिंट बनते हैं उनकी तस्वीर खींच कर उन प्रिंट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    क्या मोबाइल का फिंगरप्रिंट लॉक खोल सकते हैं
    आजकल हर मोबाइल फोन में फिंगरप्रिंट सेंसर लगा होता है. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये फिंगरप्रिंट सेंसर तब काम नहीं करता, जब मृत्यु हो जाती है.
    दरअसल, जो हम फिंगरप्रिंट सेंसर वाला स्मार्टफोन का उपयोग करते है , उसकी टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस होती है कि वो एक मरे और एक जीवित व्यक्ति के बीच के अंतर को तुरंत पकड़ लेता है. अगर आप आप किसी मृत व्यक्ति के फिंगर को उसके ही फ़ोन के सेंसर पर टच कराएंगे तो फ़ोन अनलॉक नहीं होगा.

    क्या है वजह
    इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण ये भी है कि मृत्यु के बाद जो हमारे फिंगरप्रिंट होते हैं, वो सिकुड़ने लगते हैं. इसी कारण ये फिंगरप्रिंट टेक्नोलॉजी एक मरे और एक जीवित इंसान में अंतर समझ लेती है. अक्सर फिंगरप्रिंट सेंसर मृत्यु के बाद शुरुआती कुछ मिनटों में तो काम कर सकता है लेकिन फिर काम नहीं करता. 
    Published by:Sanjay Srivastava
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