जानिए क्या है यूरोपीय स्पेस एजेंसी का एरियल स्पेस मिशन

यह यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) का इस तरह का पहला अभियान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: ArielTelescope)
यह यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) का इस तरह का पहला अभियान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: ArielTelescope)

यूरोपीय स्पेस एंजेंसी (ESA) ने बाह्यग्रहों (Exopalnets) के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए एसिरल स्पेस मिशन (Ariel Space Mission) पर काम करना शुरू कर दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 14, 2020, 1:08 PM IST
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नॉपृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन की खोज के लिए वैज्ञानिकों की बाह्यग्रहों (Exoplanets) पर खासी नजर रहती है. सुदूर सौरमंडल ( के ये ग्रह जीवन की अनुकूलता के उपयुक्त हो सकते हैं. इन ग्रहों की खोज करना आसान नहीं होता. अभी तक इन ग्रहों की खोज के लिए नासा के टेलीस्कोप से हुए अध्ययन ज्यादा हुए हैं. लेकिन अब यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने भी योगदान देने के लिए कदम बढ़ाया है. एजेंसी ने इन बाह्यग्रहों को खोजने के लिए एरियल स्पेस मिशन (Ariel Space Mission) पर काम करना शुरू कर दिया है.

बहुत सारे बाह्यग्रहों की पुष्टि का इंतजार
ईएसए के इस अभियान में एक एक्प्लोरर बाह्यग्रहों की उत्पत्ति, उनकी प्रकृति और उनके विकास का अध्ययन करेगा. अभी तक वैज्ञानिकों ने केवल 4000 बाह्यग्रहों के होने की पुष्टि की है जबकि हजारों ग्रह ऐसे हैं जिनके बारे में यह पुष्टि होना बाकी है कि वे बाह्यग्रह हैं या नहीं. इसके लिए विस्तृत और गहरे अवलोकन की जरूरत है. पृथ्वी के सबसे पास का बाह्यग्रह प्रोक्सिमा सेंचुरी बी ग्रह है जो हमसे केवल 4 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है. यह ग्रह अपने तारे के हैबिटेबल जोन में आता है यानि इसकी सतह पर तरल पानी के होने की संभावना है.

क्यों अहम हैं बाह्यग्रह
बाह्यग्रह की अवधारणा इस परिकल्पना पर आधारित है कि जिस तरह हमारे सौरमंडल में सूर्य से एक खास दूरी पर हमारी पृथ्वी में जीवन पनपा. ऐसे ही हालात ब्रह्माण्ड में मौजूद दूसरे सौरमंडल के ग्रहों में भी हो सकते हैं जो अपने सूर्य से ऐसी दूरी पर हैं. वहां पृथ्वी जैसी स्थितियां पनपने की अनुकूलता ज्यादा होती है. चूंकि इनका खुद का प्रकाश नहीं होता इसलिए इन्हें देखना और अवलोकित करना बहुत मुश्किल होता है.



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एरियल (Ariel)अंतरिक्ष में बाह्यग्रहों (Exoplanets) के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASAExoplanets


क्या है एरियल स्पेस मिशन
एट्मॉस्फियरिक रिमोट-सेंसिंग इंफ्रारेड एक्सोप्लेनेट लार्ज सर्वे जिसका छोटा रूप एरियल है, एक स्पेस टेलीस्कोप है जिसे साल 2029 में प्रक्षेपित करने की योजना है. एरियल चार साल तक हजारों बाह्यग्रहों का बड़े स्तर का सर्वेक्षण करेगा. ये हजारों बाह्यग्रह बड़े गैसीय ग्रहों से लेकर पथरीले ग्रह हैं. इनसे वैज्ञानिकों को न केवल हैबिटेबल ग्रहों की सूची बनाने में मदद मिलेगी,  बल्कि वे यह भी समझ सकेंगे कि ग्रहों का सिस्टम कैसे बनता और विकसित होता है.

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क्या करेगा एरियल
एरियल अपने तरह का पहला ऐसा अभियान होगा जो सैंकड़ों बाह्यग्रहों की रासायनिक और ऊष्मा संरचना को मापेगा. इसके अलावा एरियल ईएसए के कॉस्मिक विजन प्लान के अहम सवाल का जवाब देगा कि ग्रह के निर्माण और वहां जीवन के पनपने की कौन सी स्थितियां होती हैं. ईएसए के अनुसार वैसे तो बड़ी संख्या में तो बाह्यग्रह खोजे जा चुके हैं. लेकिन उनके बारे में बहुत ही कम जानकारी हासिल की जा की है.

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एरियल (Ariel) बाह्यग्रहों (Exoplanets) के अलावा ग्रहों के निर्माण प्रक्रिया को भी समझने में मददगार होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या मिलेगी जानकारी
बाह्यग्रहों के बारे में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इनका आकार, कक्षा, और अन्य प्रकृति कैसे निर्धारित होती है.इसके अध्ययन के लिए खास उन्नत किस्म के उपकरणों की जरूरत है. एरियल इस कमी को कुछ हद तक पूरा करते हुए इनके बारे में विस्तार से जानकारी मुहैया करा सकता है.

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तो कैसे होता है अवलोकन
बाह्यग्रहों का अध्ययन अप्रत्यक्ष रूप से हो पाता है. इनकी खुद कोई रोशनी नहीं होती है, जब वे पृथ्वी और उनके तारे के बीच में आते हैं तब उस तारे में दिखने वाले धब्बे से उनकी उपस्थिति का पता चलता है. उस धब्बे से तारे की चमक के फीकेपन के मात्रा से वैज्ञानिकों को इन बाह्यग्रह और उनके तारे के बारे में बहुत सी जानकारी मिलती  है. नासा के केप्लर टेलीस्कोप ने इस तरह से बहुत से बाह्यग्रह खोजे हैं.
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