कश्मीर में खत्म लेकिन इन 11 राज्यों को हासिल है विशेष दर्जा

अनुच्छेद 370 के अलावा संविधान में लिखित अनुच्छेद 371 ए से लेकर जे तक देश के कई राज्यों को विशेष दर्जा प्रदान करते हैं. हर राज्य के अपने हितों का ख्याल रखने के लिए संविधान के इन अनुच्छेदों के जरिए उन्हें स्पेशल पावर दी गई है.

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 4:36 PM IST
कश्मीर में खत्म लेकिन इन 11 राज्यों को हासिल है विशेष दर्जा
जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 की सुविधा खत्म की गई
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Updated: August 6, 2019, 4:36 PM IST
केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया है. जम्मू कश्मीर के विकास में तेजी लाने के लिए ये जरूरी कदम बताया जा रहा है. हालांकि जम्मू कश्मीर में इसे खत्म कर देने के बाद, अब भी ऐसे 11 राज्य हैं, जहां विशेष प्रावधान लागू हैं.

अनुच्छेद 370 के अलावा संविधान में लिखित अनुच्छेद 371 ए से लेकर जे तक देश के कई राज्यों को विशेष दर्जा प्रदान करते हैं. हर राज्य के अपने हितों का ख्याल रखने के लिए संविधान के इन अनुच्छेदों के जरिए उन्हें स्पेशल पावर दी गई है.

आर्टिकल 371 जे गोवा राज्य से संबधित है. हालांकि इससे राज्य को कोई स्पेशल स्टेट्स नहीं मिलता. उसी तरह से आर्टिकल 371 ई आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से जुड़ा है. इसमें भी कुछ स्पेशल जैसा नहीं है.

जम्मू कश्मीर से संबंधित आर्टिकल 370 (जिसे खत्म किया गया है) और बाकी राज्यों पर लागू होने वाले 371 और 371 ए से लेकर एच तक में कुछ-कुछ अंतर है. दरअसल जम्मू कश्मीर के भारत में विलय के समझौते के दौरान भारत ने जम्मू कश्मीर की आवाम को कई सारी सुविधाएं दी थी. उसी तरह से 371 और 371 ए से लेकर एच और 371 जे उन रियासती इलाकों से जुड़ा है, जिनका विलय भारत में हुआ. उन रियासतों ने अपने हितों की रक्षा के लिए उन खास प्रोविजन्स को संविधान में रखने की मांग की थी. भारत सरकार ने भी उनकी जरूरतों का ख्याल रखते हुए संविधान में इन्हें शामिल किया था.

आर्टिकल 370 और आर्टिकल 371 के संविधान में जुड़ने की एतिहासिक वजहें करीब-करीब एकजैसी हैं. आर्टिकल 370 और 371 के प्रावधान संविधान लागू होने के समय यानी 26 जनवरी 1950 से ही लागू हैं. जबकि आर्टिकल 371ए से लेकर एच और 371 जे बाद के वक्त में संविधान संशोधन के जरिए शामिल किए गए. आर्टिकल 368 संसद को ये अधिकार देता है कि जरूरत के हिसाब से वो संविधान संशोधन करे.

article 370 revoked in jammu kashmir but constitution has special provisions for 11 other states
आर्टिकल 370 को खत्म करने का विरोध करते छात्र


महाराष्ट्र और गुजरात में आर्टिकल 371
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आर्टिकल 371 महाराष्ट्र और गुजरात के राज्यपाल को कुछ विशेष जिम्मेदारी देता है. महाराष्ट्र में ये विदर्भ, मराठवाड़ा और महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों के लिए अलग-अलग डेवलपमेंट बोर्ड बनाने को लेकर है. उसी तरह से गुजरात में ये सौराष्ट्र और कच्छ में अलग डेवलपमेंट बोर्ड बनाने को लेकर. ताकि इन राज्यों के पिछड़े इलाकों को सही मायने में और हर तरीके से विकास हो.

नगालैंड को आर्टिकल 371ए के जरिए विशेष दर्जा दिया गया है. संविधान के 13वें संशोधन के जरिए 1962 में इसके प्रावधान जोड़े गए. इसे नगा समुदाय के हितों के लिए लागू किया गया है. इसके मुताबिक संसद नगाओं के धार्मिक और सामाजिक मामलों से जुड़ा कोई कानून नहीं बना सकती. इसी आर्टिकल के जरिए नगालैंड में बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर पाबंदी लगी है.

असम के आदिवासी इलाकों के संरक्षण के लिए आर्टिकल 371 बी की व्यवस्था है. संविधान के 22वें संशोधन में 1969 में इसे संविधान में शामिल किया गया है.

आर्टिकल 371 सी मणिपुर को विशेष सुविधा प्रदान करता है. इसमें यहां की विधानसभा के लिए पहाड़ी इलाकों से कुछ सदस्य चुने जाते हैं. इसके बेहतर कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्यपाल की होती है.

आर्टिकल 371 डी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को विशेष सुविधा देता है. इस आर्टिकल के जरिए राज्य के सभी इलाकों में समान रूप से रोजगार और शिक्षा के अवसर मुहैया करवाने की सुविधा प्रदान की जाती है. इस बारे में राष्ट्रपति राज्य शासन को दिशा निर्देश दे सकते हैं.

article 370 revoked in jammu kashmir but constitution has special provisions for 11 other states
जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 की तरह कई आर्टिकल बाकी राज्यों में लागू हैं


उत्तरपूर्व के राज्यों के लिए विशेष सुविधा

आर्टिकल 371 एफ ऐसी ही सुविधा सिक्किम को प्रदान करता है. सिक्किम की आदिवासी आबादी के हितों का इस अनुच्छेद के जरिए खास ख्याल रखा गया है.

मिजोरम को यही सुविधा आर्टिकल 371जी प्रदान करता है. इस अनुच्छेद के मुताबिक संसद मिजो समुदाय के धार्मिक और सामाजिक मामलों को लेकर कई कानून नहीं बना सकती. इसमें मिजो समुदाय के जमीन को सुरक्षित रखने की सुविधा भी दी गई है. कई सिविल और क्रिमिनल जस्टिस के मामले मिजो को अपने नियम कानून के हिसाब से तय होते हैं. यही आर्टिकल इन्हें ये सब अधिकार देता है.

इसी तरह से आर्टिकल 371 एच अरुणाचल प्रदेश को कुछ स्पेशल अधिकार देता है. आर्टिकल 371 जे कर्नाटक को कुछ विशेष अधिकार देता है. इन सभी अनुच्छेदों के जरिए राज्य के कुछ हितों का ख्याल रखने की कोशिश की गई है.

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First published: August 6, 2019, 4:30 PM IST
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