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अब नकली सूरज से मिलेगी ऊर्जा, होगा असली सूरज से 13 गुना ज्यादा गर्म

News18Hindi
Updated: February 2, 2020, 12:59 PM IST
अब नकली सूरज से मिलेगी ऊर्जा, होगा असली सूरज से 13 गुना ज्यादा गर्म
सूरज पर सालों से चली आ रही ये रिसर्च हाल ही में पूरी हुई है (प्रतीकात्मक फोटो)

Made in China के ठप्पे वाला ये सूरज (Sun) इसी साल प्रयोग में लाया जा सकता है.

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  • Last Updated: February 2, 2020, 12:59 PM IST
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चीन (China) के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम सूरज (artificial sun) तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है. ये एक ऐसा परमाणु फ्यूजन (nuclear fusion) है, जो असली सूरज से 13 गुना ज्यादा ऊर्जा देगा. कई सालों से चली आ रही ये रिसर्च (research) हाल ही में पूरी हुई है. माना जा रहा है कि इसी साल यानी 2020 में चीन इस कृत्रिम सूरज का इस्तेमाल शुरू कर देगा.

Artificial sun के इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक वैज्ञानिक Duan Xuru ने एक इंटरव्यू में कहा कि 2020 के ही किसी महीने इसे अमल में लाया जा सकता है. ये खबर sciencealert में छपी है.

कृत्रिम सूरज को HL-2M नाम दिया गया है, जिसे चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (China National Nuclear Corporation) और साउथवेस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स (Southwestern Institute of Physics) के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है. बता दें कि कृत्रिम सूरज बनाने की ये कोशिश काफी सालों से चली आ रही थी, ताकि प्रतिकूल मौसम में भी सोलर एनर्जी बनाई जा सके और उसका इस्तेमाल हो सके.

ये सूरज असली सूरज से 13 गुना ज्यादा ऊर्जा देगा (प्रतीकात्मक फोटो)


इस दिशा में प्रयोग के लिए चीन के Leshan शहर में रिएक्टर तैयार किया गया और काम शुरू हुआ. आर्टिफिशियल सूरज बनाने के लिए हाइड्रोजन गैस को 5 करोड़ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर गर्म कर, उस तापमान को 102 सेकंड तक स्थिर रखा गया. असली सूरज में हीलियम और हाइड्रोजन जैसी गैसें उच्च तापमान पर क्रिया करती हैं. इस दौरान 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक ऊर्जा निकलती है. इसी उच्च ऊर्जा वाले तापमान को पैदा करने के लिए लंबा प्रयोग चला.

सूरज बनाने के दौरान इसके परमाणुओं को प्रयोगशाला में विखंडित किया गया. प्लाज्मा विकिरण से सूर्य का औसत तापमान पैदा किया गया, जिसके बाद उस तापमान से फ्यूजन यानी संलयन की प्रतिक्रिया हासिल की गई. फिर इसी आधार पर अणुओं का विखंडन हुआ, जिससे उन्होंने ज्यादा मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित की. ये प्रक्रिया लगातार और समय बढ़ा-बढ़ाकर दोहराई जाती रही. इस दौरान कई बार ऐसा भी हुआ कि न्यूक्लियर फ्यूज़न चैंबर का कोर इतने तापमान के आगे नहीं टिक पाया था.

इसे पर्यावरण के लिये सुरक्षित ग्रीन ऊर्जा में बदला जा सकेगा (प्रतीकात्मक फोटो)
काफी कोशिशों के बाद आखिरकार सफलता मिली. इस दौरान देखा गया कि नकली सूरज पर इस प्रयोग में असली सूरज से भी ज्यादा ऊर्जा पैदा की जा सकती है. ये ऊर्जा 200 मिलियन डिग्री सेल्सियस थी, यानी असल सूरज से 13 गुना ज्यादा. यह अविष्कार उस प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसके तहत न्यूक्लियर फ्यूजन से साफ-सुथरी एनर्जी प्राप्त की जा सके. माना जा रहा है कि सूरज की नकल के तरीके से मिलने जा रही ऊर्जा एनर्जी के दूसरे स्त्रोतों से कहीं अधिक सस्ती और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक है.

अगर ये प्रयोग लागू किया जा सके तो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी. ये भी माना जा रहा है कि इस सूरज में उत्पन्न की गई नाभिकीय ऊर्जा को विशेष तकनीक से पर्यावरण के लिये सुरक्षित ग्रीन ऊर्जा में बदला जा सकेगा. जिससे धरती पर ऊर्जा का बढ़ता संकट तरीकों से दूर किया जा सकेगा.

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First published: February 2, 2020, 12:59 PM IST
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