इन फैसलों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे अरुण जेटली

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Updated: August 25, 2019, 10:12 AM IST
इन फैसलों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे अरुण जेटली
वित्तमंत्री रहते हुए अरुण जेटली को उनके आर्थिक सुधार वाले फैसलों के लिए याद किया जाएगा

पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने अपने कार्यकाल में आर्थिक सुधार को लेकर जो फैसले लिए, उसे लंबे वक्त तक याद किया जाएगा. उन्होंने मोदी सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को अमलीजामा पहनाया...

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पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है. अरुण जेटली ने भारतीय राजनीति को जो दिया है, उसे लंबे वक्त तक याद रखा जाएगा. खासतौर पर वित्त मंत्री (Finance minister) के बतौर उनके योगदान को देश कभी नहीं भूल पाएगा. आइए जानते हैं देश के वित्तमंत्री रहते हुए अरुण जेटली के किन फैसलों को भुलाया नहीं जा सकता.

नब्बे के दशक में देश में आर्थिक सुधार के बड़े कदम उठाए गए. उदारीकरण के दौर में देश की अर्थव्यवस्था के दरवाजे पूरी दुनिया के लिए खोलने में मनमोहन सिंह को याद किया जाता है. लेकिन वित्तमंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने आर्थिक सुधार को लेकर जो कड़े फैसले लिए वो कम चुनौतीपूर्ण नहीं थे. इनमें सबसे बड़ा फैसला रहा जीएसटी का.

अरुण जेटली के वित्तमंत्री रहते हुए जीएसटी लागू हो पाया

भारत में जीएसटी लागू करने का श्रेय अरुण जेटली को जाता है. बरसों की अव्यवस्थित टैक्स प्रणाली को खत्म करना आसान नहीं था. व्यापारी वर्ग से लेकर राज्य सरकारें और विपक्षी दल जीएसटी को लेकर विरोध दर्ज करवा रहे थे. लेकिन वित्तमंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने उनकी सारी शंकाओं का समाधान किया. 1 जुलाई 2017 से वन नेशन वन टैक्स वाला जीएसटी सिस्टम लागू हो गया.

कई ब्यूरोक्रैट्स और राजनेता मानते हैं कि देश में जीएसटी लागू करना जेटली के बूते ही संभव हो पाया. पहले भी कई सरकारों ने इसे लागू करने कि दिशा में कदम उठाए थे लेकिन वो राज्यों की चिंताओं का निवारण नहीं कर सके. ये इतना बड़ा कदम था कि मजबूत सरकारें भी इसे लागू करने का हौसला नहीं दिखा पाईं. जेटली ने वो कर दिखाया.

arun jaitley big decisions of economic reforms as a finance minister of india
जेटली के नेतृत्व में नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े फैसले लिए गए


नोटबंदी का बड़ा फैसला जेटली बिना मुमकिन नहीं था
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इसी तरह का फैसला नोटबंदी का भी था. नोटबंदी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के सबसे बड़े फैसलों में एक था. शायद केंद्र सरकार इतना बड़ा कदम अचानक नहीं उठा पाती, अगर मोदी सरकार में अरुण जेटली जैसे वित्तमंत्री नहीं होते.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया और इसके साथ ही एक हजार और पांच सौ रुपए के पुराने नोट चलन से बाहर कर दिए गए. बताया जाता है कि मोदी सरकार के इस फैसले को आरबीआई ने ऐलान के सिर्फ 4 घंटे पहले मंजूरी दी थी. नोटबंदी को लेकर काफी गोपनियता बरती गई थी. ब्लैक मनी पर प्रहार करने के लिए ऐसा करना जरूरी था. इस पूरी योजना में अरुण जेटली का दिमाग काम कर रहा था.

जेटली ने बैंकों में सुधार के लिए उठाए कदम

अरुण जेटली देश के बेहतरीन वकील रहे. कानूनी जानकारी की वजह से ही उन्हें इस बात की गहरी समझ थी कि कानूनी तौर पर किस तरह के आर्थिक उदारवाद में समस्या नहीं होगी और इसके लिए किस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार लाने के लिए अरुण जेटली ने बड़ा कदम उठाया. उन्होंने कई छोटे बैंकों का बड़े बैंकों में विलय करवाया. इसी के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक का विलय हुआ.

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अरुण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सरकार के संकटमोचक रहे


जनधन खाते खुलवाने का श्रेय अरुण जेटली को

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक थी जनधन खाता योजना. मोदी सरकार के गठन के साथ ही सबसे पहले इसी योजना को अमलीजामा पहनाने की शुरुआत हुई. देश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में जीरो बैलेंस अकाउंट खोले गए. जिन गरीब लोगों की पहुंच अब तक बैंकों तक नहीं थी, उनके बैंक में खाते खुलने शुरू हुए.

ये बहुत बड़ा कदम था. बैंकों के लिए इतनी बड़ी संख्या में खाते खोलना आसान नहीं था. लेकिन वित्तमंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने इस कदम को पूरी तैयारी से अंजाम दिलवाया. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ये हुआ कि गरीबों को सरकारी सब्सिडी के पैसे डायरेक्ट उनके खाते में जाने लगे.

मुद्रा योजना से सबसे ज्यादा महिलाओं को फायदा

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मुद्रा योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी. इसकी कामयाबी के पीछे भी अरुण जेटली का हाथ था. 2015 में शुरू हुई इस योजना के जरिए युवा पुरुष और महिलाओं को छोटे-बड़े उद्योग लगाने के लिए आसान लोन देने की शुरुआत हुई. इस योजना का मकसद लोगों को अपना रोजगार स्थापित करने पर बल देना था. महिलाओं को इस योजना से काफी लाभ मिले. करीब 73 फीसदी लोन महिलाओं को दिए गए.

बैंकिंग घोटालों को रोकने के लिए मोदी सरकार इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) लेकर आई. इन घोटालों ने देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया था. इसमें सुधार के लिए 2016 मे इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड लागू किया गया. अरुण जेटली का इसमें अहम योगदान रहा.

केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना ने बीजेपी को फायदा दिलाया

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के नाम से बड़ी सरकारी मेडिकल पॉलिसी की शुरुआत की. जेटली ने इस योजना के जरिए देश की जनता का दिल जीत लिया. कहा जाता है कि इस योजना की वजह से लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी को फायदा मिला. इस योजना के तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपए तक का कैशलेस मेडिकल बीमा दिया जाता है.

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ऐसा करके अरुण जेटली ने एक उदाहरण पेश किया था

अपने हों या पराये, कैसे सबका प्यार-सबका साथ पाते रहे अरुण जेटली

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First published: August 25, 2019, 10:12 AM IST
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