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Arun jaitley Death anniversary: वाकपटुता और आम सहमति के हुनर के कायल थे लोग

Arun jaitley Death anniversary: वाकपटुता और आम सहमति के हुनर के कायल थे लोग

अरुण जेटली (Arun Jaitley) सफल वकील होने के साथ एक सफल राजनैतिक वक्ता भी थे. (फाइल फोटो)

अरुण जेटली (Arun Jaitley) सफल वकील होने के साथ एक सफल राजनैतिक वक्ता भी थे. (फाइल फोटो)

अरुण जेटली (Arun Jaitley) का वाक कौशल ही इतना शानदार था कि संसद (Parliament) में विपक्षी (opponents) भी उनका विरोध करते समय कमजोर पड़ जाया करते थे.

    भारत (India) देश आज पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitely) की दूसरी पुण्यतिथि मना रहा है. अरुण जेटली अपने अंतिम समय में स्वास्थ्य से जूझ रहे थे जब देश राजनैतिक मंचों पर उनकी आवाज सुनने का इंतजार ही करता रह गया. भारतीय राजनीति (Indian Politics) में बहुत ही कम ओजस्वी वक्ता और प्रशासक रहे हैं और उनमें अरुण जेटली का नाम प्रमुख है. पेशे से वकील लेकिन राजनीति में हमेशा अपने तार्किक और मजबूत दलीलों से देश के लिए अपना पक्ष रखने वाले जेटली आपातकाल से ही अपने नेतृत्व कौशल के लिए पहचाने जाते रहे हैं. चाहे उनकी पार्टी सत्ता में हो या विपक्ष में वे हमेशा ही एक मजबूत आवाज के तौर पर जाने गए. यही वजह थी कि जब दो साल पहले उनका देहांत  हुआ तो उन्हें भाजपा और देश के लिए एक बड़ी क्षति माना गया.

    कई तरह से याद किए जाते हैं जेटली
    अरुण जेटली आपातकाल के छात्रनेता, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जनसंघ के सदस्य, भाजपा के युवा नेता, सफल वकील, विपक्ष में भाजपा की आवाज, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री और पहली मोदी सरकार के वित्तमंत्री के साथ एक क्रिकेट प्रशासक,  आमसहमति बनाने में निपुण नेता के तौर पर भी जाने जाते थे.

    विरोध करने वालों में सबसे पहले
    जेटली सबसे पहले आपातकाल के दौरान चर्चा में आज जो उसकी घोषणा के बाद 26 जून 1975 को सुबह-सुबह उन्होंने लोगो को जमा कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का पुतला जलाया था. वे कहते थे कि वे आपातकाल के खिलाफ ‘पहले सत्याग्रही’ थे. इस घटना के  बाद उन्होंने 19 महीनों तक जेल में रखा गया था.

    पढ़ने लिखने का जुनून
    66 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले डेलटी छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता के साथ 1970 के दशक में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के अध्यक्ष भी रहे थे. एक बेहतरीन वकील के तौर पर पहचाने जाने वाले जेटली को पढ़ने-लिखने का बहुत जुनून था. जो उन्होंने आपातकाल के दौरान की जेलयात्रा के दौरान भी कायम रखा. उन्होंने बताया था कि इसी दौरान उन्होंने संविधान सभा की पूरी बहस पढ़ डाली थी. उन्होंने यह जुनून हमेशा कायम रखा.

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    जीएसटी लागू करने में जरूरी सहमति बनाने में अरुण जेटली (Arun Jaitley) की ही मुख्य भूमिका थी. (फाइल फोटो)

    वाक कुशलता का प्रदर्शन
    पढ़ाई में गहरी रुचि ही वह खास वजह थी जिससे जेटली एक सफल वकील और वक्ता बन सके जिसकी वजह से संसंद तक में उनके विरोधी उनके तर्क के आगे फीके दिखते थे. वे उन बहुत ही कम सांसदों में शामिल थे, जिन्हें पूरा देश सुनाना पसंद करते थे. उन्होंने कई बार भाजपा के विपक्ष के नेता के रूप में अपना प्रभाव छोड़ा और मोदी सरकार के वित्त मंत्री के तौर पर भी वे एक कुशल नेता के रूप में दिखे.

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    सरकार का मजबूत पक्ष
    ये जेटली के व्यक्तित्व का ही कमाल था उन्होंने अटल सरकार के विनिवेश राज्य मंत्री के तौर पर बहुत मजबूत से अपना पक्ष देश के सामने रखा. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के द्वारा लगाए गए अप्रत्यक्ष करों को हटाने का मामला हो या फिर विवादास्पद जीएसटी कानून लागू करने का जोखिम, जेटली ने संसद हमेशा ही अपना पक्ष मजबूती से रखा.

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    मोदी सरकार की कई योजनाओं और प्रमुख सफल वित्तीय फैसलों के लिए अरुण जेटली (Arun Jaitley) को श्रेय दिया जाता है. (फाइल फोटो)

    जीएसटी में सहमति बनाने की भूमिका
    जेटली को हमेशा ही उनके मित्र बहुत अच्छा दोस्त कहते रहते थे. वे यारों केयार तो थे ही, उनका विरोधियों को अपने पक्ष में करने की क्षमता का भी कई राजनेता लोहा मानते थे. जीएसटी में केंद्र –राज्य के आपसी सहयोग के लिए बनी जीएसटी काउंसिल की सफलता को लोग जेटली की आम सहमति  बनाने की क्षमता का उदाहरण मानते हैं. जीएसटी लागू करने में जरूरी सहमति बनाने में भी जेटली की ही भूमिका को प्रमुख माना जाता है.

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    इसके अलावा नोटबंदी के फैसले को लागू करने में भी जेटली की अहम भूमिका थी. नोटबंदी का ऐलान 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.  कहा जाता है कि मोदी सरकार के इस फैसले को आरबीआई ने ऐलान के सिर्फ 4 घंटे पहले मंजूरी दी थी. लेकिन इसमें जेटली के नियोजन का बड़ा योगदान माना जाता है. जेटली ने अपने सफल वकालत के अनुभव को राजनीतिज्ञों के लिए तो किया ही, उसका लाभ उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार लाने के लिए भी किया. वहीं जनधन खाते, मुद्रा योजना आदि परियोजनाओं की सफलता में भी जेटली का अहम योगदान माना जाता है.

    Tags: Arun jaitley, India, Politics, Research

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