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500 रुपए का टिकट कटवाकर 5 लाख का इलाज करवाने इसलिए दिल्ली आते हैं बिहारी

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: October 1, 2019, 5:48 AM IST
500 रुपए का टिकट कटवाकर 5 लाख का इलाज करवाने इसलिए दिल्ली आते हैं बिहारी
हर दिन करीब 20 हजार लोग बिहार से दिल्ली-एनसीआर आते हैं

दिल्ली (Delhi) के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के बयान के बाद बवाल जरूर मचा है. लेकिन ये हकीकत है कि बिहार (Bihar) में स्वास्थ्य सुविधाओं (medical facility) का बुरा हाल है...

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  • Last Updated: October 1, 2019, 5:48 AM IST
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दिल्ली (Delhi) के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के बिहार (Bihar) के लोगों पर दिए एक बयान के बाद बवाल मचा है. दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं (medical facility) की तारीफ करते-करते केजरीवाल ने ऐसी बात कह दी, जो बिहार की राजनीति से जुड़े कई लोगों को नागवार गुजरी. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बिहार के लोग 500 रुपए का टिकट कटाकर दिल्ली आकर 5 लाख रुपए तक का फ्री इलाज करवा रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल रविवार को एक कार्यक्रम में दिल्ली की बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बता रहे थे. उन्होंने कहा, 'दिल्ली में बाहर से भी बहुत लोग आ रहे हैं इलाज करवाने के लिए, बिहार से एक आदमी 500 रुपए का टिकट लेता है. दिल्ली आता है और 5 लाख रुपए का ऑपरेशन फ्री में करवाता है.' अब उनके इस बयान की खूब आलोचना हो रही है.

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि अगर बिहार का व्यक्ति दिल्ली में इलाज करवा रहा है तो इससे अरविंद केजरीवाल का कलेजा क्यों फट रहा है? जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि बिहार और यूपी वालों की वजह से ही अरविंद केजरीवाल जीते हैं. उन्हें बाल ठाकरे की तरह नहीं बोलना चाहिए.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे ने भी दिया था इस तरह का बयान

कुछ साल पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे ने भी ऐसा ही बयान दिया था. अक्टूबर 2017 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा था कि बिहार के लोग छोटी-मोटी बीमारी का भी इलाज कराने दिल्ली के एम्स में पहुंच जाते हैं. इस वजह से एम्स में हर वक्त मरीजों का अंबार लगा रहता है.

उस वक्त अश्वनी चौबे ने कहा था कि 'हममें अजब आदत है. हम हर चीज के लिए दिल्ली एम्स चले आते हैं. बिहार के लोग छोटी-मोटी बीमारी के लिए भी दिल्ली एम्स की दौड़ लगा देते हैं. इससे एम्स पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है. मैंने डॉक्टरों से कहा है कि वो ऐसे मरीजों को वापस राज्य में इलाज कराने के लिए भेज दें.'

अश्विनी चौबे के इस बयान के बाद भी बवाल मच गया था. बिहार में आरजेडी के अलावा बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीयू ने भी उनके बयान की आलोचना की थी. आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने कहा था कि कोई स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टरों को ऐसे आदेश कैसे दे सकता है कि वो जाकर बिहार में इलाज करवाएं? वो केंद्रीय मंत्री हैं लेकिन अपनी जिम्मेदारी भूल चुके हैं. हालांकि बीजेपी की तरफ से डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा गया कि अश्विनी चौबे के कहने का ये मतलबा था कि पटना में भी सारी सुविधाओं से लैस एम्स खुल चुका है. बिहार के मरीजों को वहीं इलाज करवाना चाहिए. अब दिल्ली आने की जरूरत नहीं रही.
arvind kejriwal statement on bihar patient know why bihari come to delhi aiims like hospital for medical treatment
बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है


बिहार से हर दिन 20 हजार लोग दिल्ली आते हैं

दिल्ली में यूपी-बिहार से आने वाले लोगों के लिए ये कोई नई बात नहीं है. अक्सर उन्हें इस तरह की सलाह या उनकी आलोचना होती रही है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रहते हुए शीला दीक्षित ने भी कहा था कि दिल्ली की गंदगी और यहां होने वाले अपराध के लिए बिहार-यूपी के लोग जिम्मेदार हैं. उनके इस बयान पर भी काफी बवाल मचा था. हालांकि न वो पहली और आखिरी नेता थीं, जिन्होंने इस तरह की राय जाहिर की थी.

ये सच है कि बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार और पढ़ाई-लिखाई का हाल बुरा है. इसलिए रोज बिहार से हजारों लोग दिल्ली आते हैं. एक आंकड़े के मुताबिक बिहार से हर दिन रोजगार, पढ़ाई-लिखाई और दूसरी वजहों से 20 हजार लोग दिल्ली-एनसीआर आते हैं. ज्यादातर लोग रोजगार की तलाश में दिल्ली आते हैं. जबकि दिल्ली से रोज बिहार जाने वालों की संख्या सिर्फ 5 हजार है. यानी हर रोज करीब 15 हजार बिहार के लोग दिल्ली में आकर बस रहे हैं.

इसमें 12 हजार लोग मजदूर वर्ग के होते हैं. ये दो वक्त की रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली में अपना ठिकाना तलाशते हैं. बिहार से सबसे ज्यादा पलायन दिल्ली में होता है. एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में रहने वाले प्रवासियों में 18.3 फीसदी लोग बिहार के हैं.

बिहार में 29 हजार की आबादी पर है एक डॉक्टर

बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है. इसलिए बिहार के लोग बेहतर इलाज के लिए दिल्ली जैसे शहरों का रुख करते हैं. अभी हाल का एक आंकड़ा बिहार के स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बयां करता है. बिहार में 29 हजार की आबादी पर एक डॉक्टर है. 8,645 लोगों पर एक अस्पताल का बेड है. उस पर भी अस्पतालों का बुरा हाल है.

पिछले दिनों में बिहार के कुछ इलाकों में फैले चमकी बुखार ने बिहार की स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी थी. चमकी बुखार की वजह से उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर और उसके आसपास लगते इलाकों में 200 बच्चों की मौत हो गई थी.

बिहार में राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर सबसे कम पैसे खर्च करती है. बिहार सरकार कुल खर्चों का सिर्फ 3.94 फीसदी हिस्सा हेल्थ पर खर्च करती है. हरियाणा के बाद बिहार स्वास्थ्य सेवाओं पर दूसरा सबसे कम खर्च करने वाला राज्य है. यूपी अपने कुल खर्च का 5.07 फीसदी हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती है.

arvind kejriwal statement on bihar patient know why bihari come to delhi aiims like hospital for medical treatment
बिहार में प्रति व्यक्ति सिर्फ 495 रुपए का मेडिकल खर्च करती है सरकार


बिहार में एक व्यक्ति पर सिर्फ 495 रुपए का मेडिकल खर्च करती है सरकार

उसी तरह से प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी बिहार सरकार कम पैसे खर्च करती है. बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रति व्यक्ति खर्च 495 रुपए का है. वहीं पड़ोस के राज्य यूपी में सरकार 733 रुपए खर्च करती है.

बिहार सरकार को पिछले साल स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने के लिए केंद्र सरकार से 3,370 करोड़ रुपए मिले. लेकिन बिहार सरकार इसमें से सिर्फ 50 फीसदी ही खर्च कर पाई. इसके अलावा बिहार को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत के तहत 300 करोड़ रुपए हासिल हुए थे.

बिहार में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का इतना हाल बुरा है कि पिछड़ा राज्य होने के बावजूद वहां के लोग प्राइवेट मेडिकल सुविधा लेने वाले राज्यों में सबसे आगे हैं. बिहार की मेडिकल जरूरतों का 91 फीसदी हिस्सा प्राइवेट सेक्टर पूरा करता है. ये देश के औसत 74 फीसदी से काफी ऊंचा है. इसी से समझा जा सकता है कि बिहार में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का क्या हाल है. ऐसे में बिहार के लोग इलाज के लिए दिल्ली-मुंबई का रुख नहीं करेंगे तो कहां जाएंगे?

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First published: September 30, 2019, 4:24 PM IST
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