आर्यभट्ट संस्थान ने खोजी ऐसी गैलेक्सियां, बन रहे हैं यहां सौ गुना तेजी से तारे

आर्यभट्ट संस्थान ने खोजी ऐसी गैलेक्सियां, बन रहे हैं यहां सौ गुना तेजी से तारे
ये गैलेक्सियां बहुत छोटी है, जिनमें 10 से 100 गुना तेजी से तारे बन रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत (India) के आर्यभट्ट संस्थान (ARIES) के वैज्ञानिकों ऐसी गैलेक्सियों (Galaxies) की खोज की है जिनमें हमारी गैलेक्सी मिल्की वे (Milky Way) के मुकाबले सौ गुना तेजी से तारों का निर्माण हो रहा है.

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  • Last Updated: August 26, 2020, 7:57 AM IST
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आमतौर पर ब्रह्माण्ड (Universe) में तारों के निर्माण (Star formation) प्रक्रिया बाकी प्रक्रियाओं की तुलना में तेज मानी जाती है. ऐसा हमारी गैलेक्सी (Galaxy) मिल्की वे (Milky Way) में भी होता है, लेकिन हाल ही खगोलविदों ने कुछ नई गैलेक्सियां (Galaxies) खोजी हैं. ये छोटी गैलेक्सियां (Dwarf Galaxies) ऐसी हैं जो हमारी मिल्की वे के मुकाबले दस से सौ गुना तक तेजी से तारे बना बना रही है, और यह खोज की है हमारे देश के आर्यभट्ट रिसर्च इंसीट्यूट ऑफ ऑफ ऑबजर्वेशनल साइंसेस  (ARIES) ने.

छोटी गैलेक्सियों पर हुआ शोध
ब्रह्माण्ड में फैली अरबों गेलैक्सियों में से बहुत सारी ऐसी छोटी गैलेक्सी हैं जिनका भार हमारी मिल्की वे से 100 गुना कम है. इनमें से 13 गैलेक्सी पर हुए शोध के नतीजे यूके की रॉयल  एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के जर्नल मंथली नोटिसेस ऑफ रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (MNRAS) के आने वाले अंक में प्रकाशित होने जा रहे हैं.

कई छोटी गैलेक्सियां बना रहीं हैं तेजी से तारे
इस अध्ययन का कहना है कि इनमें से ज्यादातर गैलेक्सियों को ड्वार्फ गैलेक्सी कहते हैं. इनमें बनने वाले तारे इनसे बड़ी गैलेक्लियों के मुकाबले धीरे बनते है, फिर भी कुछ छोटी गैलेक्सी ऐसी हैं जो नए तारे का निर्माण मिल्की वे के तारों के मुकाबसे 10 से सौ गुना तेजी से करती हैं. ये प्रक्रियाएं  कुछ करोड़ साल से ज्यादा लंबी नहीं होती हैं. लेकिन फिर भी इन गैलेक्सी की उम्र को देखते हुए यह काफी कम समय है क्योंकि ये गैलेक्सी कुछ अरब साल पुरानी हैं.



अजीब बर्ताव के संकेत
वैज्ञानिकों ने कुल 13 गैलेक्सियों के विस्तार से अध्ययन किया है. इसके लिए उन्हें दो भारतीय टेलीस्कोप का उपयोग किया है. इनके अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं को इन गैलेक्सियों के अजीब बर्ताव के संकेत मिले.  उन्होंने इस बर्ताव का रहस्य इन गैलेक्सियों में फैली हाइड्रोजन और इनमें से दो गैलेक्सियों के टकराव में पाया है.



हाइड्रोजन ने खोले राज
इस शोध में शामिल एक वैज्ञानिक अमितेश ओमर का ने बताया कि तारों के निर्माण में हाइड्रोजन एक अहम तत्व होता है, इतनी तेज गति से तारों के निर्माण के लिए इन गैलेक्सियों में बहुत ही घनी मात्रा में हाइड्रोजन की जरूरत होगी.

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ये दो टेलीस्कोप
भारत के विज्ञान और प्रोद्यौगिकी विभाग के एरीज (ARIES) संस्थान के ओमर और उनके पूर्व छात्र सुमित जयसवाल ने नैनीताल स्थित एक 1.3 मीटर के देवस्थल फास्ट ऑपटिकल टेलीस्कोप (DFOT) और जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) का उपयोग कर इन गैलेक्सियों का अवलोकन किया.

कैसे काम करते हैं ये टेलीस्कोप
देवस्थल फास्ट ऑपटिकल टेलीस्कोप (DFOT) ऑप्टिकल वेवलेंथ पर काम करता है जो आयनीकृत हाइड्रओजन से निकलने वाले विकरण की ऑप्टिकल लाइन को पकड़ने का काम करता है. वहीं जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) में 45 मीटर व्यास की 30 छतरियां हैं जो एक साथ मिलकर काम करती हैं. इनसे गैलेक्सी के न्यूट्रल हाइड्रोजन से आने वाली 1,420.40 मेगाहर्ट्ज की स्पैक्ट्रम लाइन के विकिरण के जरिए बहुत सटीक इंटरफेरोमेट्रिक तस्वीरें निकलती हैं.

इन गैलेक्सियों में हाइड्रोजन की मौजूदगी ने सारे राज खोले. (तस्वीर साभार नासा)


हाइड्रोजन का बिखराव
शोध में इन गैलेक्सी के बहुते से तारे बनने की तेज प्रक्रिया की 1,420.40 मेगाहर्ट्स की तस्वीरों से पता चला कि इन गैलेक्सियों में हाइड्रोजन बहुत ही बिखरा हुआ है. यह बिखराव बहुत ही अनियमित था और खास कक्षा के तहत गतिविधि भी नहीं करता दिखा. इनमें से कुछ हाइड्रोजन गैलेक्सी में अलग से बादलों और पूंछों की तरह भी दिखाई जैसे कि हाल ही में कोई दूसरी गैलेक्सी टकरा कर इन हाइड्रोजन पर एक तरह से कूची (Brush) फेर गई हो और गैसे इसकी वजह से फैल गई हो.

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ऑप्टिकल अवलोकन ने कई बार दर्शाया कि गैलेक्सी के मध्य में बहुत से आयनीकृत हाइड्रोजन बड़ी मात्रा में मौजूद हैं. हालांकि शोधकर्ताओं को दो गैलेक्सी का टकराव सीधे तौर पर तो दिखाई नहीं दिया, लेकिन उन्हें इसके संकेत जरूर मिले. उन्हें रेडियो और ऑप्टिकल इमेजिंग के जरिए इसका पता चला. शोध ने सुझाया है कि हाल ही में दो गैलेक्सी के टकराव की वजह से इनमें तारों के निर्माण में तेजी आई होगी.
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