जानिए कैसे हवा में दुनिया का सबसे विध्वंसक कॉम्बिनेशन है राफेल और सुखोई 30MKI

जानिए कैसे हवा में दुनिया का सबसे विध्वंसक कॉम्बिनेशन है राफेल और सुखोई 30MKI
5 राफेल फाइटर जेट कल (29 जुलाई) को अंबाला एयरबेस पहुंच जाएंगे.

राफेल (Rafale) और सुखाई 30MKI दुनिया के सबसे विध्वंसक लड़ाकू विमानों में से माने जाते हैं. सुखाई और राफेल एक बार साथ में ऑपरेट करना शुरू कर दें फिर किसी भी दुश्मन के लिए ये बेहद घातक कॉम्बिनेशन होगा.

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नई दिल्ली. बहुप्रतीक्षित लड़ाकू विमान राफेल (Rafale) की पहली खेप 29 जुलाई को भारत में पहुंच जाएगी. ये विमान फ्रांस (France) से अंबाला आएंगे और यहीं पर आधिकारिक तौर पर इन्हें भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के बेड़े में शामिल किया जाएगा. बालाकोट हमले (Balakot Airstrike) के बाद से भारत में इन विमानों की जरूरत महसूस की जा रही थी. भारत और फ्रांस के संयुक्त युद्धाभ्यास गरुण-6 के बाद तत्कालीन वाइस एयर चीफ आरकेएस भदौरिया (वर्तमान एयर चीफ मार्शल) ने दुश्मनों को सुखोई और राफेल की घातक प्रहार क्षमता को लेकर चेताया था.

बेहद घातक कॉम्बिनेशन
तब भदौरिया ने कहा था कि सुखोई और राफेल एक बार साथ में ऑपरेट करना शुरू कर दें फिर किसी भी दुश्मन के लिए ये घातक कॉम्बिनेशन होगा. साल 2016 में राफेल जेट के लिए फ्रांस से हुई बातचीत में आरकेएस भदौरिया भारतीय टीम के हेड थे. तब भी उन्‍होंने सुखोई और राफेल के कॉम्बिनेशन को बेहद घातक करार दिया था.

पीएम ने भी राफेल की जरूरत पर दिया था जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि अगर राफेल विमानों की मौजूदगी रही होती तो हम आतंकी ठिकानों को और अधिक तबाह कर पाते. मार्च 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि राफेल जेट की कमी पूरा देश महसूस कर रहा है. अत्याधुनिक तकनीक से लैस ये लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की क्षमता को और ज्यादा बढ़ा देंगे. अपनी मारक क्षमता के कारण इसे वायुसेना का ब्रह्मास्त्र भी कहा जा रहा है.



सुखोई 30-MKI की खासियतें
रूस में निर्मित Sukhoi Su-30MKI लड़ाकू विमान इस वक्त भारतीय वायुसेना में सबसे घातक विमान है. ये उड़ान के दौरान ही फ्यूल भर सकता है. इस फाइटर प्लेन में 12 टन तक युद्धक सामग्री लोड की जा सकती है. साथ ही इस विमान में डबल इंजन लगे हुए हैं जो इमरजेंसी की स्थिति में पायलट को मदद करते हैं. सुखोई-30 एमकेआई एक बार में 3,000 किमी की उड़ान भर सकता है. रूस के सहयोग से भारत  द्वारा निर्मित सुखोई-30 एमकेआई को दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों  में एक माना जाता है.

इसे बनाने के लिए भारत और रूस के बीच 2000 में समझौता हुआ था. भारत को पहला सुखोई-30 विमान 2002 में मिला था. रूस के सहयोग से भारत ने 2015 में स्वेदश निर्मित सुखोई-30 एमकेआई को भारतीय वायुसेना में शामिल करके अपनी ताकत कई गुना बढ़ा ली. वर्तमान में भारत के पास 200 से ज्यादा सुखोई-30 एमकेआई विमान हैं.

इस विमान में है ऑटोमेटिक फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम
लंबाई से लेकर रेंज और मिसाइल ले जाने की क्षमता तक के मामले में सुखोई-30 एमकेआई को अमेरिका F-16 से बेहतर माना जाता है. इसमें सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम लगा है, जो इसे किसी भी मौसम में दिन और रात दोनों वक्त काम करने के काबिल बनाता है. साथ ही इसमें लॉन्ग रेंज रेडियो नेविगेशन सिस्टम है. इसमें ऑटोमेटिक फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम है. ऑटोमेटिक सिस्टम से नेविगेशन सिस्टम को जानकारी मिलते ही यह खुद ही फ्लाइट के रूट से जुड़ी समस्‍याओं को ही सुलझा लेता है. इसमें टारगेट को नेस्तनाबूद करने के साथ ही वापस अपने एयरफील्ड तक लैंडिंग करना शामिल है.

राफेल विमान की ताकत
राफेल एक फ्रांसीसी कंपनी डैसॉल्ट एविएशन निर्मित दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है. राफेल लड़ाकू विमानों को 'ओमनिरोल' विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध में अहम रोल निभाने में सक्षम हैं. ये बखूबी सारे काम कर सकती है- वायु वर्चस्व, हवाई हमला, जमीनी समर्थन, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध. कुल मिलाकर राफेल विमानों को वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है.

राफेल चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट है. ये कई रोल निभाने में सक्षम कॉम्बैट फाइटर जेट है. ग्राउंड सपोर्ट, डेप्थ स्ट्राइक और एंटी शिप अटैक में सक्षम है. इसकी ताकत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ये छोटे न्यूक्लियर हथियारों को ले जाने में सक्षम हैं. राफेल एयरक्राफ्ट 9500 किलोग्राम भार उठाने में सक्षम है. ये अधिकतम 24500 किलोग्राम वजन के साथ उड़ान भर सकता है. इस फाइटर जेट की अधिकतम रफ्तार 1389 किमी/घंटा है. एक बार में ये जेट 3700 किमी तक का सफर तय कर सकता है. ये हवा से हवा और जमीन दोनों पर हमला करने वाली मिसाइलों से लैस है. चीन के साथ विवाद के मद्देनजर भारत ने इसमें हैमर मिसाइल लगाने का फैसला भी किया है.
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