50 डिग्री पार जाता है पारा, तो सच में कितनी गर्मी बर्दाश्त कर सकता है शरीर?

झांसी के पास केरल एक्सप्रेस में चार लोगों की मौत के बाद सवाल ये है कि प्रचंड गर्मी की कौन सी हद है, जिसे हम बर्दाश्त कर सकते हैं? राजस्थान में बढ़ते तापमान की खबरें हैं, पारा 50 डिग्री सेल्सियस के पार हो जाए तो हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है?

News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 1:22 PM IST
50 डिग्री पार जाता है पारा, तो सच में कितनी गर्मी बर्दाश्त कर सकता है शरीर?
प्रतीकात्मक तस्वीर.
News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 1:22 PM IST
इस हफ्ते की शुरूआत में खबर थी कि केरल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे चार लोगों की मौत झांसी के पास हो गई. शायद कई लोगों को हैरानी भी हुई हो कि मौत का कारण प्रचंड गर्मी थी, जो इस साल देश के कई इलाकों में काफी लंबे समय से कहर ढहा रही है. तमिलनाडु के चार वरिष्ठ नागरिकों की मौत के बाद ये सवाल उठता है कि आखिर इंसानी शरीर कितनी गर्मी झेलने लायक है?

प्रचंड गर्मी की वो कौन सी हद है, जिसे हम बर्दाश्त कर सकते हैं? और पिछले दिनों राजस्थान में बढ़ते तापमान की खबरें हैं. पारा 50 डिग्री सेल्सियस के पार हो जाए तो हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है?



पढ़ें : क्या होते हैं मौसम विभाग के येलो, ऑरेंज व रेड अलर्ट?

हीट स्ट्रेस कब होता है?

इंसानी शरीर पर बढ़ते तापमान के असर के बारे में बात करते हुए डॉक्टर और शोधकर्ता अक्सर 'हीट स्ट्रेस' शब्द का इस्तेमाल करते हैं. हीट स्ट्रेस को समझाते हुए आईआईटी दिल्ली में एसोसिएट प्रोफेसर डे कहते हैं, 'जब हमारा शरीर बेहद गर्मी में होता है, तो वो अपने कोर तापमान को बनाए रखने की कोशिश करता है. वातावरण और शारीरिक स्थितियों पर निर्भर करता है कि शरीर अपने कोर तापमान को बनाए रखने की कोशिश किस कदर कर पाता है, ऐसे में हमें थकान महसूस होती है'.

हीट स्ट्रेस के लक्षणों के बारे में नेफ्रॉन क्लीनिक के डॉ. संजीव बागई कहते हैं कि पारा अगर 40 डिग्री के पार हो जाए, तो शरीर के लिए मुश्किल पैदा हो ही जाती है. हालांकि अलग स्थितियों में असर अलग होता है, लेकिन सामान्य रूप से दिखने वाले लक्षण बताते हुए डॉ. बागई कहते हैं, 'पारा 40 से 42 डिग्री तक हो तो सिरदर्द, उल्टी और शरीर में पानी की कमी जैसी शिकायतें होती हैं. और पारा 45 डिग्री हो तो बेहोशी, चक्कर या घबराहट जैसी शिकायतों के चलते ब्लड प्रेशर का कम होना आम शिकायतें हैं'.

weather news, today temperature, heat impact, heat wave, heat stroke, मौसम समाचार, आज का तापमान, गर्मी का असर, हीट वेव, हीट स्ट्रोक
Loading...

इसके आगे, अगर आप 48 से 50 डिग्री या उससे ज़्यादा तापमान में ज़्यादा देर रहते हैं तो मांसपेशियां पूरी तरह जवाब दे सकती हैं और मौत भी हो सकती है. जैसा कि झांसी के पास केरल एक्सप्रेस के यात्रियों के साथ हुआ. ये बताने की ज़रूरत है नहीं कि इस तरह की स्थितियों में बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिलाएं या बीमार लोग जल्दी शिकार हो सकते हैं.

शरीर और गर्मी की केमिस्ट्री
मानव शरीर का सामान्य तापमान 98.4 डिग्री फारेनहाइट या 37.5 से 38.3 डिग्री सेल्सियस होता है. इसका मतलब ये नहीं है कि 38 या 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर आपको गर्मी नहीं लगनी चाहिए. वास्तव में ये शरीर का कोर तापमान होता है. यानी त्वचा के स्तर पर इससे कम तापमान भी महसूस हो सकता है. बाहरी तापमान के बढ़ते ही आपको गर्मी क्यों लगती है? आपने महसूस किया होगा कि 32 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर भी आप हल्की गर्मी महसूस करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों? जबकि आपके शरीर का तापमान ही इससे ज़्यादा होता है!

ये हैं वैज्ञानिक कारण
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हवा ऊष्मा की सुचालक नहीं है. आसान भाषा में ऐसे समझिए कि तापमान की तुलना आप अपने शरीर के संपर्क में आने वाले वातावरण के साथ करते हैं. आपका शरीर जब हवा के संपर्क में आता है तो हवा का तापमान आपके शरीर में ट्रांसफर होता है, लेकिन आपके शरीर का तापमान हवा में उतना ट्रांसफर नहीं होता क्योंकि हवा ऊष्मा की अच्छी चालक नहीं है. लेकिन पानी है. जब आप पानी के संपर्क में आते हैं तो आपके शरीर का तापमान पानी में ट्रांसफर होता है. यही वजह है कि 45 या 50 डिग्री सेल्सियस के ताप वाला पानी आपको उतना गर्म नहीं महसूस होता, जितनी इसी ताप वाली हवा.

weather news, today temperature, heat impact, heat wave, heat stroke, मौसम समाचार, आज का तापमान, गर्मी का असर, हीट वेव, हीट स्ट्रोक
न्यूज़18 क्रिएटिव


ऐसे रिएक्ट करता है शरीर
क्लिनिकल शोधों के मुताबिक तापमान बढ़ने पर शरीर एक खास पैटर्न में रिएक्ट करता है. शरीर का 70 फीसदी से ज़्यादा अंश पानी निर्मित है. यानी हमारे शरीर का पानी बढ़ते तापमान में शरीर का तापमान स्थिर बनाए रखने के लिए गर्मी के साथ जूझता है. पसीना आना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. लेकिन ज़्यादा देर अगर शरीर इस प्रक्रिया में रहता है तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है.

पढ़ें : अगले 24 घंटों में मुंबई समेत इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी

पानी की कमी होते ही हर शरीर अपनी तासीर के हिसाब से रिएक्ट करता है. किसी को चक्कर आ सकते हैं, तो किसी को सिरदर्द हो सकता है और किसी को बेहोशी भी. असल में, पानी की कमी से सांस की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है. इस वजह से खून का फ्लो बनाए रखने के लिए दिल और फेफड़ों पर ज़्यादा दबाव पड़ता है. इससे रक्तचाप पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है.

खून के फ्लो से सबसे जल्दी मस्तिष्क यानी दिमाग पर असर पड़ता है. इसलिए सिरदर्द की समस्या अमूमन सबसे पहला लक्षण होती है. माइग्रेन के रोगियों को तो डॉक्टर ज़्यादा गर्मी से पूरी तरह बचने की सलाह देते ही हैं. इन नतीजों के बाद सबसे खराब हो सकता है हीट स्ट्रोक. एक स्टडी में पाया गया कि जो लोग हीट स्ट्रोक के बुरी तरह शिकार हुए थे, उनमें से 28 फीसदी की मौत इलाज के बावजूद एक साल के भीतर हो गई.

weather news, today temperature, heat impact, heat wave, heat stroke, मौसम समाचार, आज का तापमान, गर्मी का असर, हीट वेव, हीट स्ट्रोक

अगर आपकी त्वचा सूखती है, जीभ और होंठ सूखते हैं, त्वचा पर लाल निशान उभरते हैं, मांसपेशियों में कमज़ोरी महसूस होती है तो आपको समझना चाहिए कि बढ़ता तापमान आपके शरीर को खासा प्रभावित कर रहा है.

वॉटर लॉस क्यों बर्दाश्त नहीं कर सकता शरीर?
पानी हमारे शरीर का जीवन स्रोत है इसलिए हमारे शरीर में सबसे ज़्यादा पानी ही है. गर्मी में पसीना बहने से न केवल पानी बल्कि सॉल्ट यानी नमक की भी कमी होती है. पानी हर अंग के लिए ज़रूरी है. 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के चलते अगर शरीर में पानी की कमी होती है और देर तक बनी रहती है तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं जैसे हीट स्ट्रोक, हार्ट स्ट्रोक या ब्रेन हैमरेज तक.

गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी व सॉल्ट की कमी के चलते ही कई समस्याएं पैदा होती हैं. पानी की कमी ज़्यादा हो जाए या देर तक रहे तो हार्ट रेट बढ़ सकता है, रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है. पानी और नमक की कमी के कारण किडनियां यूरिन बनाने का काम ठीक से नहीं कर पातीं. मस्तिष्क तक खून का प्रवाह अवरुद्ध होता है. मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं. कुल मिलाकर पानी और सॉल्ट हर अंग के लिए ज़रूरी हैं. ज़रूरी है कि बढ़ती गर्मी के मौसम में अपने शरीर की पानी की ज़रूरत पूरी करते रहें.
डॉ. आशुतोष दरबारी, एमएस


कुछ सवाल हैं, जिनके जवाब हैं मुश्किल
कोई मनुष्य अधिकतम कितने तापमान में ज़िंदा रह सकता है? ये एक ऐसा सवाल है, जिसका कोई ठीक-ठीक जवाब नहीं दिया जा सकता. क्योंकि हमारी धरती पर अलग-अलग तरह के क्लाइमेट यानी वातावरण हैं और अलग-अलग क्षमताओं वाले शरीर भी. अब तक ऐसी कोई स्टडी नहीं है जो इस सवाल का ठीक ठीक जवाब दे सके. लेकिन हां, 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बाद सामान्य परिस्थिति वाले हर व्यक्ति को सतर्कता और सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है.

weather news, today temperature, heat impact, heat wave, heat stroke, मौसम समाचार, आज का तापमान, गर्मी का असर, हीट वेव, हीट स्ट्रोक

ऐसा ही एक सवाल है कि गर्मी ज़्यादा घातक होती है या आर्द्रता? वास्तव में, दोनों का एक तालमेल होता है. अगर बढ़ते तापमान और आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी का तालमेल सही है तो आपका शरीर ज़्यादा देर तक बर्दाश्त कर पाएगा, वरना नहीं.

हीट वेव और हीट स्ट्रोक क्या है?
हीट वेव को भारतीय संदर्भ में समझा जाए तो इसका मतलब लू है. जैसे सर्दियों के मौसम में शीतलहर होती है, वैसे ही गर्मियों में लू. यानी बेहद गर्म हवा. हीट वेव किस तापमान की होती है? इसका जवाब ये है कि स्थान के हिसाब से एक सामान्य तापमान तय होता है. अगर उस सामान्य तापमान से करीब 5 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा तापमान होता है, तब हीट वेव होती है.

पहले बताए जा चुके कारणों से जब हीट वेव या बेहद गर्मी के चलते शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाता और शरीर का तापमान बढ़ने से पैदा होने वाली गंभीर समस्याओं को हीट स्ट्रोक कहा जाता है. बेहोशी, चक्कर और तेज़ सिरदर्द इसके साफ लक्षण हैं.

ये भी पढ़ें:

नोएडा: पुलिसवाले करते थे हनीट्रैप से वसूली, चौकी इंचार्ज 3 सिपाहियों समेत 15 गिरफ्तार


केरला एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में गर्मी से 4 यात्रियों की मौत, रेलवे प्रशासन में मचा हड़कंप

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पाससब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...