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ओवैसी ने किस राज्य के यूनिवर्सल सिविल कोड का हवाला दिया, जहां हिंदू दो बीवियां रख सकते हैं

गोवा के यूनिवर्सल सिविल कोड में हिंदू पुरुष को एक साथ दो पत्नियां रखने की इजाजत है (shutterstock)

गोवा के यूनिवर्सल सिविल कोड में हिंदू पुरुष को एक साथ दो पत्नियां रखने की इजाजत है (shutterstock)

मुस्लिम नेता और आल इंडिया मजलिसे इत्तहाद मुसलमीन पार्टी के अध्यक्ष असाउद्दीन ओवैसी ने यूनिवर्सल सिविल लॉ को लेकर अपनी प ...अधिक पढ़ें

मुस्लिम नेता और आल इंडिया मजलिसे इत्तहाद मुसलमीन पार्टी के अध्यक्ष असाउद्दीन ओवैसी ने हाल ही में केंद्र सरकार के प्रस्तावित यूनिवर्सल सिविल कोड लॉ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसकी उपयोगिता पर सवाल उठाया है. उन्होंने अपने एक भाषण में कहा कि देश का एक ऐसा राज्य भी है, जहां के कानून हिंदू पुरुष को दो बीवियां रखने की इजाजत देते हैं. उन्होंने इस राज्य के तौर पर गोवा का जिक्र किया. जानते हैं कि क्वया वास्तव में ऐसा है. क्या वास्तव में गोवा का हिंदू मैरिज एक्ट एक हिंदू पुरुष को दो शादियों की इजाजत देता है.

वैसे आपको ये भी बता दें कि देश में यूनिवर्सल सिविल कोड अब तक एक राज्य में लागू है और ये राज्य गोवा ही है. इसके अलावा ना तो कभी केंद्र और ना अन्य राज्य सरकारों ने इस ओर कभी पहल की है. वैसे बेशक आप हैरान हो सकते हैं लेकिन जिस एक राज्य में समान नागरिक संहिता लागू है, वहां बाकी धर्मों को तो नहीं लेकिन वहां के हिंदुओं को शर्तों के साथ कई शादियों की आजादी है.

ये राज्य गोवा है. गोवा में जब पुर्तगाली शासन था, तब वहां पुर्तगाली सिविल कोड लागू किया गया. ये 1867 की बात है. तब तक भारत में ब्रिटिश राज में भी सिविल कोड नहीं बनाया गया था. लेकिन पुर्तगाल सरकार ने ऐसा कर दिया. जब पुर्तगाल सरकार ने गोवा उपनिवेश के लिए ये कानून बनाया तब गोवा में दो धर्म के लोग ही बहुलता में थे- ईसाई और हिंदू.

क्या था तब गोवा में हिंदुओं की शादियों का रिवाज 
तब वहां के हिंदुओं में कई शादियों का रिवाज था और भारत में हिंदू और मुसलमान कई शादी कर सकते थे. लेकिन गोवा में जब समान नागरिक संहिता कानून बना तो इसने हर किसी के लिए एक ही शादी का प्रावधान किया.

प्रावधान ये था कि पहली पत्नी के रहते कोई भी व्यक्ति दूसरा विवाह नहीं कर सकता लेकिन ये कानून कुछ शर्तों के साथ केवल वहां पैदा हुए हिंदुओं को एक पत्नी के रहते दूसरे विवाह की इजाजत देता था. ये कानून अब भी उसी तरह लागू है.

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प्राचीन भारत में बहुविवाह बहुत सामान्य बात थी. राजा, शासक, बड़े व्यापारी और अफसर कई शादियां करते थे.

जब गोवा आजाद हुआ तब क्या हुआ
जब गोवा आजाद हुआ तो नए राज्य में उसी सिविल कोड को अपना लिया गया तो पुर्तगालियों के शासन के तहत 93 सालों से वहां चल रहा था.  ये हिंदुओं को कुछ स्थितियों में बहुविवाह की अनुमति देता है. इसके अनुसार
– 25 साल की उम्र तक अगर पत्नी से कोई संतान नहीं हो तो पति दूसरी शादी कर सकता है.
– 30 साल की उम्र तक अगर पत्नी पुत्र को जन्म नहीं दे पाती तो भी पति दूसरी शादी कर सकता है.

क्या स्थिति थी प्राचीन भारत में 
वैसे अगर बहुविवाह की बात करें तो ब्रितानी राज में ही नहीं बल्कि प्राचीन भारत में एक पुरुष की कई शादियां बहुत सामान्य बात थी. राजा और बडे़ अफसर ऐसा खूब करते थे. इसे लेकर कोई प्रतिबंध नहीं था. कई राजाओं के यहां रानियों की फौज होती थी. जिस समय अंग्रेज भारत में शासन कर रहे थे, तब पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह के बारे में कहा जाता था कि उनके रनिवास में 80 से ज्यादा रानियां थीं. जिसमें कुछ को मुख्य रानियों का दर्जा हासिल था.

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भारत के कई बड़े व्यापारी भी कई पत्नियां रखते थे. आजादी से पहले प्रसिद्ध उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया ने 06 शादियां कीं.

ब्रिटिश राज में सिविल कोड
बाद में 1935 में जब ब्रिटिश राज में नागरिक सिविल कोड कानून लाया गया तब  हिंदुओं और मुसलमानों को उनके व्यक्तिगत कानूनों के चलते एक शादी के दायरे से अलग रखा गया.

मिजोरम में एक जनजाति अब भी करती है बहुविवाह
वैसे मिजोरम में जरूर एक ऐसी जनजाति है, जिसे लांपा कोहरान थार या चाना कहा जाता है, जिसमें एक पुरुष कई बीवियां रख सकता है. ये जनजाति ईसाई धर्म मानती है.

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मिजोरम में एक खास चाना जनजाति के पुरुषों को कई शादियों की इजाजत है. ये जियोना चाना हैं, जिनकी पिछले साल मृत्यु हो गई. आधिकारिक तौर पर उनका परिवार 38 बीवियों और 89 बच्चों का था. इसके अलावा 30 से ज्यादा नाती-पोते थे.

वहां ये रिवाज अब भी चल रहा है. इसी समुदाय से ताल्लुक रखने जिओना चाना के 38 बीवियां और 89 बच्चे थे. जियोना का 2021 में निधन हो गया लेकिन उनके नाम दुनिया के सबसे बड़े परिवार का रिकॉर्ड दर्ज था. कानून इस जनजाति की बहुविवाह परंपरा में दखल नहीं देता.

बांग्लादेश में भी हिंदुओं को बहुविवाह की इजाजत
बांग्लादेश 1971 में आजाद हुआ और इसके बाद गणतांत्रिक राज्य बना. वहां के सिविल कोड में भी हिंदुओं को कई शादियों की इजाजत है.

हिंदू कानून की दो प्राचीन शाखाएं क्या हैं
दरअसल हिंदू कानून के दो प्राचीन स्कूल या शाखाएं या धाराएं रही हैं, जिन्हें बाद अंग्रेजों ने लागू किया. ये प्राचीन स्कूल में एक मिताक्षरा है और दूसरी दायभाग. इन दोनों में शादी, पैतृक अधिकार के बारे में स्थापनाएं और नियम बताए गए हैं.

क्या है मिताक्षरा
डॉक्टर यू .सी .सरकार ने अपनी पुस्तक”हिंदू लॉ” मैं यह लिखा है कि मिताक्षरा ना केवल एक भाष्य है वरन वह स्मृतियों पर प्रकार का निबंध है जो 11वीं शताब्दी के अंत में अथवा 12 वीं शताब्दी के प्रारंभ में लिखा गया था.
– यह सर्वश्रेष्ठ विधि शास्त्री आंध्र प्रदेश का निवासी विज्ञानेश्वर द्वारा लिखित याज्ञवल्क्य स्मृति पर आधारित एक उच्च कोटि की किताब या संस्थापना है, जो हिंदू विधि की एक शाखा को संस्थापक कही जाती है.
– यह शाखा बंगाल और असम को छोड़कर लगभग सारे देश के हिंदुओं पर लागू होती है.आज की स्थिति यह है कि यह शाखा बंगाल में भी उन विषयों पर जिनकी दायभाग में विवेचना नहीं की गई है वहां मिताक्षरा को ही मान्यता प्रदान की जाती है.
– यह जीमूतवाहन से लगभग 300 वर्ष पूर्व की रचना है. जीमूतवाहन ने दायभाग शाखा की स्थापना मिताक्षरा में लिखे उत्तराधिकार की निकटस्थता के नियम के विरोध में की थी.
बाद में मिताक्षरा विधि की 05 उपशाखाएं हो गईं. इनका जन्म दत्तक ग्रहण तथा दायभाग के संबंध में मतभेद के चलते हुआ
1. बनारस शाखा, 2. मिथिला शाखा, 3. द्रविड़ अथवा मद्रास शाखा, 4महाराष्ट्र अथवा मुंबई शाखा, 5.पंजाब शाखा.

दायभाग क्या है
– जीमूत वाहन द्वारा रचित ‘दायभाग ‘बंगाल में एक प्रमुख मान्य और प्राधिकृत ग्रंथ माना जाता है.
– यह विधि बंगाल तथा असम के कुछ हिस्सों में लागू होती हैं. ‘दाय’ का अर्थ होता है ‘उत्तराधिकार’ तथा ‘भाग’ का अर्थ है ‘बंटवारा’.
– दायभाग किसी स्मृति विशेष पर टीका का नहीं है बल्कि सभी स्मृतियों का निबंध है. यह विधि जीमूत वाहन के ग्रंथ दायभाग पर आधारित है.
इस शाखा की प्रमुख प्रामाणिक कृतियां हैं:- 1. दायभाग,रघुनंदन द्वारा लिखित दायतत्व, 3. श्रीकृष्ण तरकालंकार द्वारा लिखित दायक्रमसंग्रह, 4. वीरमित्रोंदय, 5. दत्तक-चंद्रिका.

Tags: Asduddin Owaisi, Goa, Hindu, Marriage Law

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