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Ashfaqulla Khan B’day: बेमिसाल थी रामप्रसाद बिस्मिल से अशफाक की दोस्ती

Ashfaqulla Khan B’day: बेमिसाल थी रामप्रसाद बिस्मिल से अशफाक की दोस्ती

अशफाक उल्ला खान (Ashfaqulla Khan) काकोरी मामले में पकड़े जाने वाले क्रांतिकारियों में सबसे आखिरी क्रांतिकारी थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

अशफाक उल्ला खान (Ashfaqulla Khan) काकोरी मामले में पकड़े जाने वाले क्रांतिकारियों में सबसे आखिरी क्रांतिकारी थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

Ashfaqulla Khan Birthday: ऐतिहासिक काकोरी मामले (Kakori Case) में क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) के दोस्त अशफाक उल्ला खां को फांसी हुई थी.

    भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian freedom movement)  में अशफाक उल्ला खान (Ashfaqulla Khan) का नाम प्रमुख क्रांतिकारियों (Freedom Fighters) में से लिया जाता है. अशफाक को उनके बलिदान के साथ उनकी शायरी और क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil)  की दोस्ती के लिए भी जाना जाता है. अशफाक उल्ला खां की कहानी उन लोगों के लिए एक सबक है जो मानते हैं कि भारत की आजादी की लड़ाई में हिंदू मुस्लिमों ने मिल कर नहीं लड़ी थी. आज भी आशफाक को हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल माना जाता है. 22 अक्टूबर को देश उनके जन्मदिन पर उन्हें याद कर रहा है.

    बचपन से शायरी का शौक
    अशफाक उल्ला खान का जन्म 22 अक्टूबर 1900 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के मोहल्ला एमन जई जलाल नगर के पठान परिवर में  हुआ था. पिता शफीक उल्ला खान और मां मजरूहन्निसा बेगम की छह संतानों में वे सबसे छोटे थे. उन्हें बचपन से ही शायरी का बहुत शौक था, लेकिन अपने बड़े भाई के सहपाठी राम प्रसाद बिस्मिल की तारीफ सुनते सुनते अशफाक उनके मुरीद हो गए.

     गांधी जी का असहयोग आंदोलन में
    हसरत तखल्लुस नाम से शायरी लिखने वाला अशफाक का भावुक दिल में देश प्रेम की तीव्र भावनाएं थी. जब मैनपुरी कांड में राम प्रसाद बिस्मिल का नाम आया तब से देशभक्त अशफाक के मन में बिस्मिल से मिलने की इच्छा और तीव्र हो गई. इसी बीच 1920 में गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ सहयोग आंदोलन छेड़ दिया. इसमें अशफाक भी कूद पड़े.

    क्रांति की ओर युवाओं के साथ अशफाक
    गांधी जी ने जब 1922 में चौरीचौरा कांड के कारण असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया, तो देश भर में हताशा का माहौल बन गया. इससे कई युवाओं में ऐसी निराशा छाई और वे क्रांति के रास्ते पर चल दिए. अशफाक भी उन्ही क्रांतिकारियों के सूची में शामिल हो गए जो पहले असहयोग आंदोलन से जुड़े और बाद में क्रांतिकारियों से.

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    अशफाक उल्ला खान बचपन से ही राम प्रसाद बिस्मिल (Ram Prasad Bismil) से बहुत प्रभावित थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

    पहली मुलाकात में ही निकल पड़ी दोस्ती
    लेकिन अशफाक के क्रांतिकारी बनने से पहले जब बिस्मिल शाहजहांपुर आए तो उनकी मुलाकात  हुई जिसमें अशफाक ने अपना परिचय उनके सहपाठी के छोटे भाई के रूप में दिया. अशफाक ने बिस्मिल को बताया कि वे वारसी और हसरत नाम से शायरी करते हैं. जब बिस्मिल ने अशफाक की शायरी सुनी तो उन्हें बहुत पसंद आई. जिसके बाद दोनों की दोस्ती चल निकली.

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    क्रांतिकारियों में भी मशहूर हुए दोनों
    जब गांधी से लोगों में निराशा हुई तो बिस्मिल और उनके साथियों ने 1924 में  हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया और इसमें बिस्मिल के साथ अशफाक भी थे. दोनों की शायराना जोड़ी पहले ही मशहूर हो चुकी थी. और क्रांतिकरियों में भी बिस्मिल और अशफाक की जोड़ी बहुत चर्चित थी.

    काकोरी षड़यंत्र
    क्रांतिकारियों को हथियारों की जरूरत ने उन्हें काकोरी में ट्रेन लूटने की योजना बनाने के लिए प्रेरित किया. टोली का नेतृत्व बिस्मिल कर रहे थे. यह लूट उनके ही दिमाग की उपज थी. 25अगस्त 1925 को हुई इस लूट को बखूबी अंजाम दिया गया. एक महीने तक कोई कोई गिरफतारी भी नहीं हुई. लेकिन धीरे धीरे सभी क्रांतिकारी गिरफ्तार होने लगे.

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    काकोरीकांड (Kakori Case) में बिस्मिल और अशफाक को एक ही दिन फांसी दी गई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

    मुश्किल से हुई गिरफ्तारी
    राम प्रसाद बिस्मिल 25 अक्टूबर 1925 को गिरफ्तार हुए, लेकिन पुलिस को अशफाक का सुराग नहीं मिला. अशफाक पहले बिहार गए, फिर वहां से बनारस चल गए जहां तीन महीने एक इंजीनियरिंग कंपनी में काम किया. अशफाक अब विदेश जाकर इंजीनियरिंग पढ़ना चाहते थे. इसके लिए पहले दिल्ली गए. उन्होंने विदेश जाने की तैयारी भी कर ली थी, लेकिन एक खबरी ने उन्हें धोखे गिरफ्तार करा दिया.

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    एक ही मामले में फांसी की सजा मिलने पर भी अश्फाक और बिस्मिल को अलग अलग जेल में  रखा गया. अशफाक को तोड़ने के लिए अंग्रेजों ने बिस्मिल के खिलाफ खूब कान भरने की कोशिश की, लेकिन अशफाक की दोस्ती कभी कम नहीं हुई. दोनों दोस्तों को 19 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई, लेकिन अलग अलग जगह पर.

    Tags: Freedom Movement, History, Revolutionary Freedom Fighter

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