होम /न्यूज /नॉलेज /अशोक गहलोत रहेंगे या जाएंगे या फिर चलेंगे कोई अगली चाल

अशोक गहलोत रहेंगे या जाएंगे या फिर चलेंगे कोई अगली चाल

गहलोत दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने के बाद वापस जयपुर चले गए हैं. उसके बाद से कयास लग रहे हैं कि अबकी बार बाजीगर फिर बच गया या फंस गया. (न्यूज 18)

गहलोत दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने के बाद वापस जयपुर चले गए हैं. उसके बाद से कयास लग रहे हैं कि अबकी बार बाजीगर फिर बच गया या फंस गया. (न्यूज 18)

अशोक गहलोत सियासत के चतुर खिलाड़ियों में है. सीधे सामने नहीं आते लेकिन परोक्ष तौर पर कंधों का इस्तेमाल करने में उनका को ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated :

राजस्थान में कांग्रेस का संकट फिलहाल तो छंट गया लगता है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 29 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने आए इसके बाद लगता है कि उनको फिलहाल पद पर बने रहने के लिए कुछ समय और मिल गया है. वैसे हकीकत ये भी है कि पंजाब में जिस तरह कांग्रेस ने चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व बदलाव करके हाथ जलाए थे, वैसा शायद अब करने के मूड में वह है नहीं. अशोक गहलोत भी बखूबी जानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल राजस्थान में बहुत कुछ करने की स्थिति में नहीं है. वहां बदलाव इसीलिए फिलहाल दीखता नहीं.

अशोक गहलोत की सियासी चालें तब शुरू हुईं जब उन्हें गांधी परिवार की ओर से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की बात करीब फाइनल हो गई. ये माना जाने लगा कि वह दिल्ली आएंगे. चुनाव के लिए नामांकन भरेंगे और जीत जाएंगे. पार्टी में सबकुछ सुकून से चलता रहेगा. राजस्थान में उनकी जगह सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा. पार्टी हाईकमान को ये सबकुछ बहुत शांति के साथ होता लग रहा था.

लेकिन ऐसा हुआ नहीं. नामांकन की अंतिम तिथि 30 सितंबर से एक हफ्ते पहले राजस्थान की राजनीति में भूचाल आ गया. 90 से ऊपर अशोक गहलोत के विधायकों ने विद्रोह कर दिया. उन्होंने ताल ठोंकते हुए कहा कि अगर अशोक गहलोत नहीं तो सचिन पायलट को भी वो बर्दाश्त नहीं करेंगे. मुख्यमंत्री तो वही बने जिसके ऊपर गहलोत का हाथ हो.

क्या ये गहलोत की शह पर हुआ 
अब ये जाहिर हो गया है कि इस पूरे कांड के पीछे सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन परोक्ष तौर पर गहलौत की ही शह रही होगी. बगैर उनके चाहे विधायक अचानक इस विद्रोही तेवर में क्यों आ जाएंगे. मतलब ये निकाला गया कि गहलोत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनना चाहते बल्कि वह राजस्थान में सीएम ही बने रहना चाहते हैं. राजस्थान में विधानसभा चुनाव अगले साल हैं.

Ashok Gehlot, Ashok Gehlot Latest Update, Gehlot double game, Congress President Election, rajasthan CM chair, Rajasthan News, Jaipur News,

अशोक गहलोत की टाइमिंग कमाल की मानी जाती है, इस बात को अपने 40 सालों से ज्यादा के सियासी सफर में उन्होंने हमेशा दिखाया है. (न्यूज 18 ग्राफिक)

कांग्रेस हाईकमान के पास ज्यादा विकल्प है नहीं
अगर वहां गहलोत की मर्जी के बगैर कांग्रेस आलाकमान बदलाव करता है तो सूबे में सरकार को बचाना भी शायद मुश्किल हो जाए. ये भी संभव था कि अगर कांग्रेस पहले की तरह अगर वहां जबरदस्ती नेतृत्व में बदलाव कर देता तो राजस्थान में पार्टी में दोफाड़ हो जाती, जिसका नुकसान अंत्वोगत्वा कांग्रेस को ही होना था. कांग्रेस इस हाल में है नहीं कि एक राज्य की सत्ता को हाथ से जाने दे.

गहलोत ने क्यों चली होगी ये चाल 
गहलोत इस बात को बखूबी भांप चुके थे और राजस्थान में हुए भूचाल में अपनी जीत को लेकर भी आश्वस्त थे. क्योंकि गुणा-भाग और आगे की चालें देख लेने में फिलहाल तो उनका कोई सानी नहीं. उन्हें ये भी नजर आ रहा था कि कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का मतलब सिवा कठपुतली बनने के और कुछ नहीं होगा.

फिलहाल तो उन्हें समय मिल चुका है
अब वो दिल्ली आकर फिलहाल तो अपने लिए वो समय पा चुके हैं जो चाहते हैं. वह अब अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हैं. दूसरी बात ये भी कि जब तक आलाकमान राज्य में नेतृत्व बदलाव की स्थिति में  नहीं होता तब तक वह पद पर बने रहेंगे. हकीकत ये है कि जो हालात हैं उसमें अगले साल चुनाव से पहले राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलना कांग्रेस के लिए सांसत वाली ही स्थिति है. बेशक गांधी परिवार अब कतई गहलोत को सीएम की कुर्सी पर नहीं देखना चाहे लेकिन उसके पास बहुत विकल्प नहीं हैं.

Ashok Gehlot news, Ashok Gehlot will visit Delhi today, Gehlot will visit Delhi, Gehlot's visit to Delhi, Gehlot latest news, Ashok Gehlot updates, Rajasthan's political struggle, Ashok Gehlot vs Sachin Pilot, Sachin Pilot vs Ashok Gehlot, Rajasthan's political crisis, Sonia Gandhi, fight for CM post in Rajasthan, Congress politics, Rajasthan Congress politics, Rajasthan politics, Rajasthan political news, Jaipur news, Jaipur Hindi news, Jaipur big news, Rajasthan news, Rajasthan latest news, Rajasthan political news, Rajasthan news in Hindi, Rajasthan Hindi News,अशोक गहलोत समाचार, अशोक गहलोत आज जाएंगे दिल्ली, गहलोत जाएंगे दिल्ली, गहलोत का दिल्ली दौरा, गहलोत ताजा समाचार, अशोक गहलोत अपडेट, राजस्थान का सियासी संग्राम, अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट, सचिन पायलट बनाम अशोक गहलोत, राजस्थान का राजनीतिक संकट, सोनिया गांधी, राजस्थान में सीएम पद की लड़ाई, कांग्रेस राजनीति, राजस्थान कांग्रेस राजनीति, राजस्थान की राजनीति, राजस्थान राजनीतिक समाचार, जयपुर समाचार, जयपुर हिन्दी न्यूज, जयपुर की बड़ी खबर, राजस्थान समाचार, राजस्थान ताजा समाचार, राजस्थान राजनीतिक समाचार, राजस्थान न्यूज इन हिन्दी, राजस्थान हिन्दी न्यूज

अशोक गहलोत तो दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलकर माफी मांग चुके हैं लेकिन उनका समर्थक खेमा अब भी आक्रमक तेवरों में है. जो भी हो फिलहाल तो गहलोत अभी सीएम बने हुए हैं और अगली चाल के लिए पर्याप्त समय भी पा चुके हैं. (न्यूज18)

क्यों अब भी आक्रमक है उनका खेमा
फिर कांग्रेस अभी तो अध्यक्ष पद के चुनाव में व्यस्त है. लिहाजा ऐसा लगता नहीं कि 17 अक्टूबर से पहले कुछ होगा. राजस्थान में जो कुछ हुआ, वो संकेत भी है कि गहलोत कड़ी कार्रवाई करने पर पार्टी से छिटक भी सकते हैं. आखिर उनके कैंप के विधायक तो ये कह ही रहे हैं सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने से बेहतर है कि सरकार गिर जाए और मध्यावधि चुनाव हों.

ये कांग्रेस आलाकमान को गहलोत ने अप्रत्यक्ष तौर पर संदेश दिया है कि अगर राजस्थान हाईकमान जल्दबाजी में बगैर उनकी मर्जी के कुछ करता है कि तो अपना नुकसान करेगा. वैसे ये भी नहीं कहना चाहिए कि गहलोत ने जो चाल चली है, वो कामयाब ही होगी. क्योंकि राजस्थान में सत्तारूढ़ दल कई खेमो में है.

Rajasthan Crisis, Rajasthan congress, Congress MLAs Rebellion, Ashok Gehlot vs Sachin Pilot, राजस्थान संकट, कांग्रेस विधायकों की बगवत, राजस्थान कांग्रेस, अशोक गहलोत और सचिन पायलट की लड़ाई

इंदिरा से लेकर हर कांग्रेसी सरकार में वह केंद्रीय मंत्री बने. अगर राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटे तो पार्टी में अहम पदों पर आ गए. अशोक गहलोत जैसी कल बहुत कम सियासी लोगों के पास होती है. (न्यूज 18)

04 दशक के सियासी सफर में गिरे नहीं
गहलोत को चतुर नेता माना जाता है. उन्होंने अपने 04 दशक के सियासी सफर में कभी गंवाया नहीं है बल्कि पाया ही है. जब ये माना गया कि उन्हें किनारे कर दिया गया,तब वह फिर उभर कर आ गए.ये उनकी पूरी राजनीति में हमेशा नजर आया है. सोनिया के साथ दिल्ली बैठक में वह यकीनन उनसे कुछ वादा करके और माफी मांगकर लौटे हैं. साथ ही कुछ और समय भी. जिसमें वो अपने विकल्पों पर भी सोच विचार जरूर करेंगे.

पहला विधानसभा चुनाव हारे थे
1977 में जब उन्होंने अपनी जिंदगी का पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था तो वह 4426 से कुछ ज्यादा वोटों से हार गए. लेकिन उसने उन्हें ये सिखाया कि चुनाव कैसे लड़ना चाहिए. तीन साल बाद ही जब कांग्रेस ने उन्हें जोधपुर से लोकसभा चुनाव का टिकट दिया तो वह 50 हजार से ज्यादा अंतर से जीते.

संजय से लेकर सोनिया के खास बनने तक 
इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर तो नहीं देखा है. पहले वह युवा कांग्रेस में संजय गांधी के खास हुए. जब वर्ष 1971 में बंगाल भेजे गए कि वहां बांग्लादेश से आए शरणार्थियों  का समस्याओं का निराकरण करते हुए उनकी व्यवस्थाओं को देखना था. इंदिरा वहां जब पहुंचीं तो अशोक गहलोत के कामकाज को देखकर प्रभावित हुईं, खासकर ये उनके पास हर प्राब्लम का समाधान था.

इंदिरा को उनमें भविष्य का एक अच्छा नेता नजर आया. यही वजह थी कि वो वर्ष 83-84 के आसपास जब वह बमुश्किल 23 साल के थे, तभी इंदिरा गांधी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बन गए. इसके बाद वह राजीव गांधी के विश्वस्त लोगों में शुमार हुए. उनके समय में भी केंद्रीय मंत्री रहे. नरसिंहराव ने भी उन्हें अपने मंत्रिमंडल शामिल जरूर किया लेकिन चंद्रास्वामी के चलते राव से उनकी खटकी और मंत्रिमंडल से बाहर करके राजस्थान में 93-94 में पार्टी संगठन मजबूत करने भेज दिया गया.

पहली बार मुख्यमंत्री का ताज
1998 में जब राजस्थान में कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की तो वह मुख्यमंत्री बने. हालांकि इस राज्य में आमतौर पर कोई सरकार एक बार पांच साल का कार्यकाल पूरा करके वापस नहीं लौटती. कुछ ऐसा ही गहलोत सरकार के साथ हुआ. हारे तो वापस फिर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी संगठन में वापसी हो गई.

who will be Rajasthan chief minister, Ashok Gehlot on Sachin Pilot, Ashok Gehlot Vs Sachin Pilot, Ashok Gehlot cryptic reply reply on Sachin Pilot, Ashok Gehlot increase Sachin Pilot Tension, Sachin Pilot news, Ashol Gehlot news, Rajasthan news, Congress President election, Sonia Gandhi, Rahul Gandhi

पहली बार तो वह अपनी मेहनत से मुख्यमंत्री बने लेकिन उसके बाद अगली दो बार मेहनत किसी और की थी लेकिन पद पर ताजपोशी कराने में वह सफल रहे.

कुछ चतुर चालें और कुछ भाग्य
कई बार गहलोत कुछ नहीं करते लेकिन उनकी चतुर चालें और कुछ उनका भाग्य भी उनके लिए रास्ते बनाता रहा. जैसे 2008 में हुआ. इस बार राज्य में चुनाव सीपी जोशी की अगुवाई में कांग्रेस ने लड़ा था लेकिन किसी पार्टी के पास बहुमत नहीं था. तब पता चला कि बसपा के जीते हुए 06 विधायक तो गहलोत के खेमे में पहुंच चुके हैं. गहलोत के भाग्य की छींका इसलिए और भी टूटा, क्योंकि मुख्यमंत्री के सबसे प्रबल कांग्रेसी दावेदार जोशी ने अपनी विधानसभा सीट केवल एक वोट से गंवा दी.

और ताज मिला गहलोत को
गहलोत फिर दूसरी बार मुख्यमंत्री बन गए. 2013 में जब फिर विधानसभा चुनाव हुए तो गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा. इतनी शर्मनाक हार कांग्रेस की वहां हुई जो अब तक कभी नहीं हुई. केवल 21 सीटें. अशोक गहलोत फिर केंद्र में कांग्रेस के संगठन में चले गए.

सचिन पायलट के आने के बाद 
जब राहुल गांधी की सलाह पर सचिन पायलट को प्रदेश की बागडोर सौंपकर अध्यक्ष बनाया गया तो आमतौर पर यही माना गया है कि अब राज्य की राजनीति से अशोक गहलोत दूर हो चुके हैं. खुद गहलोत अपने जानने वालों से यही कहते थे. सचिन ने वाकई बहुत मेहनत की. आत्मविश्वास खो चुकी राज्य ईकाई को दोबारा मुस्तैदी से खड़ा कर दिया.

फिर किसी का ताज ले उड़े
2018 में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत हुई. जब ये लग रहा था कि सचिन ही अब मुख्यमंत्री बनेंगे. गहलोत ने अपनी चालें इस तरह चलीं कि राज्य की सत्ता पर ताजपोशी उन्हीं की हुई. बीच में जब ऐसा लगा कि उन्हें अब जाना होगा तो वह पूरी चतुराई से विरोधियों को खदेड़ने में कामयाब रहे. विधायकों की गणित, समर्थन समीकरण के गुणा-भाग करने वाले वो जबरदस्त टीचर हैं.

होता वही है जो वह चाहते हैं
उन्हें काम करने वाले नेता के तौर पर जाना जाता है तो तंत्र से संपर्क बनाए रखने के उनके अपने तरीके हैं. याददाश्त बहुत तेज है, लिहाजा 71 साल के होने पर भी हर किसी का नाम याद रखते हैं. उन्हें जो करना हो वो बेशक खुद करते हुए नहीं लगें लेकिन किसी ना किसी जरिए वो हो ही जाता है, जो वह चाहते हैं.

अब तक तो गांधी परिवार पर उनका जादू चलता आ रहा था. वह तो अब खत्म हो चुका है. लेकिन फिलहाल अभी वो राजस्थान में कांग्रेस के लिए ऐसे नेता तो कतई नहीं जिसे निकाल कर फेंका जा सके. दुर्गति और कमजोरी की मार झेल रही कांग्रेस के लिए ये समय फूंक फूंक कर चलने वाला है और कांग्रेस की यही बेबसी गहलोत के लिए फिलहाल राहत भी है.

Tags: Ashok gehlot, Ashok Gehlot Government, Rajasthan CM, Rajasthan Congress

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें