Assam Election Results जानिए कैसा रहा है असम विधानसभा चुनाव का इतिहास

पिछले 70 सालों मेंअसम (Assam) में ज्यादातर कांग्रेस ने ही शासन किया है. (तस्वीर: shutterstock)

पिछले 70 सालों मेंअसम (Assam) में ज्यादातर कांग्रेस ने ही शासन किया है. (तस्वीर: shutterstock)

आसाम (Assam) के चुनावों के इतिहास (Election History) में कांग्रेस (Congress) का वर्चस्व रहा है, लेकिन 2016 में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया था.

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देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव (State Assembly Elections) के लिए मतगणना जारी है और रुझान आने शुरू हो गए हैं. असम (Assam) पिछले कुछ समय से राजनैतिक नजरिए अहम राज्य हो गया है. यहां पर पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने चौंकाने वाली जीत दर्ज करते हुए बहुमत हासिल किया था. लेकिन असम में हमेशा ही कांग्रेस (Congress) का वर्चस्व रहा है. इसका इतिहास इस बात की गवाही देता है.

भौगोलिक विभाजन

उत्तर पूर्व भारत के केंद्र माना जाने वाले असम में 126 सीटों के लिए चुनाव हुआ है. आजादी के बाद के पहले चुनाव से ही कांग्रेस ने जीत हासिल की और यह सिलसिला लंबे समय तक चला. इस बीच असम कई राज्यों में विभाजित हुआ और इसने हमेशा ही बड़ी ताताद में जनसंख्या बदलाव देखे जिसमें शरणार्थियों ने यहां के चुनावों को प्रभावित किया.

सीटों की संख्या में भी होता रहा बदलाव
आजादी के पहले 1937 मे असम प्रांत की विधानसभा में 108 सीटें थीं, जो आजादी के बाद बंटवारे के कारण केवल 70 रह गई थीं. लेकिन आजाद भारत में असम में द्विसदनीय व्यवस्था की जगह एकसदनीय व्यवस्था शुरु हुई. 1952 में पहले यहां 108 सीटें थी इसके बाद 1967 में बढ़कर 114 हो गईं और उसके बाद से 1972 से अब तक 126 सीटें हैं.

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असम में कांग्रेस (Congress) का हमेशा से ही गहरा प्रभाव रहा है. (File Pic)


चहिला रहे 3 साल तक मुख्यमंत्री



1952 से अब तक असम ने 14 विधानसभा चुनाव देखे हैं. इसमें अब तक कांग्रेस की 11 सरकारें बनी हैं. और प्रदेश में 16 व्यक्ति मुख्यमंत्री पद को संभाल चुके हैं. 1952 में विष्णु राम मेढ़ी असम के पहले मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद बीपी चलिहा दिसंबर 1957 ले कर नवंबर 1970 तक मुख्यमंत्री रहे. 1967 के चुनाव के बाद कांग्रेस के ही महेंद्र मोहन चौधरी ने कांग्रेस सरकार का कार्यकाल पूरा किया.

पहली बार असम में बना गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री

1972 में जब बांग्लादेश आजाद हुआ तब उसी साल कांग्रेस ने फिर से असम मे सरकार बनाई और शरत चंद्र सिन्हा मुख्मंत्री रहे. 1978 में कांग्रेस विरोधी लहर का असर असम में भी हुआ और जनता पार्टी के गोलप बोरबोरा और जोगेंद्रनाथ हजारिका मुख्यमंत्री बने.

बार –बार राष्ट्रपति शासन का दौर

12 दिसंबर 1979 को असम में राष्ट्रपति शासन रहा जिसके बाद 207 दिनों के लिए कांग्रेस के सैयदा अनवरा तैमूर दिसंबर 1980 में मुख्यमंत्री बने. 30 जून 1981 को एक बार फिर असम में राष्ट्रपतिशासनरहा जो 197 दिनों तक चला. इसके बाद केसब चंद्र गोगोई 13 जनवरी 1982  66 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने. फिर मार्च 1982 से फरवरी 1982 तक एक बार फिर से प्रदेश ने राष्ट्रपति शासन देखा. इसके बाद 1985 तक हितेश्वर सैकिया असम के मुख्यमंत्री रहे.

फिर रहे लंबे समय वाले मुख्यमंत्री

1985 में एक बदलाव का दौर आया और असम गण परिषद की सरकार में प्रफुल्ल कुमार मंहत मुख्यमंत्री बन कर पांच साल राज करने में सफल रहे. फिर पांच साल कांग्रेस के शासन के बाद महंत ने 1996 में वापसी की जिसके बाद 2001 के बाद तरुण गोगोईने कांग्रेस का शासन कायमरखा. अंत मे बीजेपी ने 2016 में बदलाव करते हुए सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में सरकार बनाई.
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