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Exit Poll Result 2022: क्या होते हैं एग्जिट पोल, वास्तव में कितने सटीक होते हैं, कैसे काम करते हैं

कितने सटीक होते हैं एग्जिट पोल, कितना भरोसा किया जा सकता है इन पर

कितने सटीक होते हैं एग्जिट पोल, कितना भरोसा किया जा सकता है इन पर

Exit Poll result 2022/Assembly Election exit poll result 2022: उत्तर प्रदेश में आखिरी चरण की वोटिंग का काम 07 मार्च को है. इसके बाद चुनाव आयोग के नियमानुसार रात 08.00 बजे से 05 उन राज्यों के एग्जिट पोल के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे, जहां विधानसभा चुनाव हुए हैं. ये राज्य हैं- पंजाब, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश. एग्जिट पोल के नतीजे अनुमानित होते हैं और एक सिस्टम के तहत वोट देने वालों से बातचीत करके अंदाज लगाए जाते हैं.

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    Exit Poll result 2022/Assembly Election exit poll result 2022: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में वोट डाले जाने के बाद 07 मार्च को रात 08.00 बजे से एक्जिट पोल के अनुमानित नतीजे आने शुरू हो जाएंगे. दरअसल ये असल नतीजे तो नहीं होते लेकिन लोगों के वोट डालने के रुझान के जरिए ये अंदाज लगाया जाता है कि नतीजे किधर की ओर जा सकते हैं. इसके जरिए अनुमान लगाया जाता है कि कौन सा सियासी दल कहां जीत रहा है और कौन कहां पीछे होगा. हालांकि इनके खरे उतरने को लेकर हमेशा शक रहा है.

    गौरतलब है कि फरवरी और मार्च में गोवा, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा के लिए वोट डाले गए हैं. इसमें उत्तर प्रदेश में वोटिंग 07 चरणों में हुई है. गोवा, पंजाब और उत्तराखंड में 14 फरवरी को वोटिंग हुई तो मणिपुर में 27 फरवरी और 03 मार्च को.  यूपी में वोटिंग 07 चरणों में हुई. वहां 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23, फरवरी, 27 फरवरी, 03 मार्च और 07 मार्च को वोट के दिन रहे. अब इन पांचों राज्यों में 10 मार्च को सुबह मतगणना का काम शुरू होगा. अनुमान है कि कुछ राज्यों में उसी दिन सारे परिणाम आ जाएंगे तो कुछ में अगले दिन तक पूरे नतीजे सामने आ पाएंगे.

    चुनाव आयोग ने नियम बना रखा है कि आखिरी चरण की वोटिंग के पहले एग्जिट पोल के जरिए अनुमानित नतीजों का ट्रेंड नहीं बताया जा सकता, लिहाजा अब जब यूपी में 07 मार्च को आखिरी और सातवें चरण का मतदान हो रहा है, जो इसके खत्म होने के बाद जब चुनाव आयोग रात करीब 08 बजे जब आधिकारिक तौर पर ये बताएगा कि सातवें चरण में कितना मतदान हुआ, उसके बाद टीवी चैनल्स और कुछ समाचार साइट्स एग्जिट पोल के वो नतीजे देने लगेंगी, जिसे उन्होंने खुद या एजेंसियों के जरिए करा रखे हैं.

    चूंकि एग्जिट पोल की सटीकता पर हमेशा ही सवाल उठते हैं लिहाजा ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि ये एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और चुनाव परिणामों को लेकर वो जो अनुमान लगाते हैं, वो कितने सटीक होते हैं.

    1. एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और वो कैसे किए जाते हैं?
    – एग्जिट पोल्स वोट करके पोलिंग बूथ के बाहर आए लोगों से बातचीत या उनके रुझानों पर आधारित हैं. इनके जरिए अनुमान लगाया जाता है कि नतीजों का झुकाव किस ओर है. इसमें बड़े पैमाने पर वोटरों से बात की जाती है. इसे कंडक्ट करने का काम आजकल कई ऑर्गनाइजेशन कर रहे हैं.

    2. एग्जिट पोल्स को टेलिकास्ट करने की अनुमति वोटिंग खत्म होने के बाद ही क्यों दी जाती है. इससे पहले क्यों नहीं?
    – जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 ए के तहत वोटिंग के दौरान ऐसी कोई चीज नहीं होनी चाहिए जो वोटरों के मनोविज्ञान पर असर डाले या उनके वोट देने के फैसले को प्रभावित करे. वोटिंग खत्म होने के डेढ़ घंटे तक एग्जिट पोल्स का प्रसारण नहीं किया जा सकता है. और ये तभी हो सकता है जब सारे चुनावों की अंतिम दौर की वोटिंग भी खत्म हो चुकी हो.

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    मतदान करने के बाद महिलाएं (फाइल फोटो)

    3. क्या एग्जिट पोल्स हमेशा सही होते हैं?
    – नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. अतीत में ये साबित हुआ है कि एग्जिट पोल्स ने जो अनुमान लगाए, वो गलत साबित हुए. भारत में एग्जिट पोल का इतिहास बहुत सटीक नहीं रहा है. कई बार एग्जिट पोल नतीजों के बिल्कुल विपरीत रहे हैं.

    4. ओपिनियन पोल्स और एग्जिट पोल्स के बीच अंतर क्या है?
    – ओपनियन पोल्स वोटिंग से बहुत पहले वोटरों के व्यवहार और वो क्या कर सकते हैं, ये जानने के लिए होता है. इससे ये बताया जाता है कि इस बार वोटर किस ओर जाने का मन बना रहा है. वहीं एग्जिट पोल्स हमेशा वोटिंग के बाद होता है.

    5. ये कब शुरू हुए?
    माना जाता है कि ये 1967 में सामने आए. एक डच समाजशास्त्री और पूर्व राजनीतिज्ञ मार्सेल वान डेन ने देश में चुनाव के दौरान एग्जिट पोल्स किया. हालांकि ये भी कहा जाता है कि इसी साल अमेरिका में ऐसा पहली बार एक राज्य के चुनावों के दौरान किया गया था. वैसे एग्जिट पोल्स जैसे अनुमान की बातों का 1940 में होना कहा जाता है.

    6. इनका विरोध क्यों हो रहा है?
    – क्योंकि आमतौर पर ये न तो बहुत वैज्ञानिक होते हैं और न ही बहुत ज्यादा लोगों से बातकर उसके आधार पर तैयार किए जाते हैं. इसीलिए अमूमन ये हकीकत से अक्सर दूर होते हैं. कई देशों में इन पर रोक लगाने की मांग होती रही है. भारत में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी. दुनियाभर में अब ज्यादातर लोग इन्हें विश्वसनीय नहीं मानते.

    Tags: Assembly Elections 2022, Exit poll, Goa Elections, Manipur Elections, Punjab Elections 2022, UP Assembly Election 2022 Exit Polls, Uttrakhand

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