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नगालैंड ईसाई बहुल राज्य, फिर क्यों चला बीजेपी का जादू, कैसे मिला बहुमत?

नगालैंड में मतदाताओं पर बीजेपी गठबंधन का जादू खूब चला. गठबंधन को राज्‍य में स्‍पष्‍ट बहुमत मिलता हुआ दिख रहा है.

नगालैंड में मतदाताओं पर बीजेपी गठबंधन का जादू खूब चला. गठबंधन को राज्‍य में स्‍पष्‍ट बहुमत मिलता हुआ दिख रहा है.

Assembly Election Results 2023 - नगालैंड, मेघालय और त्रिपुरा विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने शुरू हो चुके हैं. इनमे ...अधिक पढ़ें

Nagaland Election Results 2023: त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड विधानसभा चुनावों के नतीजे व रुझान लगातार आ रहे हैं. नगालैंड और त्रिपुरा में बीजेपी (BJP) अपने प्रतिद्वंद्वी दलों से बढ़त बनाए हुए हैं. वहीं, मेघालय में बीजेपी को तो बहुत बड़ी सफलता हासिल नहीं हुई है, लेकिन राज्‍य में उसका बड़ा सहयोगी दल नेशनल पीपुल्‍स पार्टी (NPP) बाकी दलों पर अच्‍छी बढ़त बनाए हुए है. त्रिपुरा और नगालैंड में विधानसभा की 60-60 तो मेघालय में 59 सीटों के लिए चुनाव हुए. त्रिपुरा में बीजेपी गठबंधन 36 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं, नगालैंड में बीजेपी और उसके सहयोगी दल 40 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. मेघालय में बीजेपी 4 सीट पर तो उसका बड़ा सहयोगी दल एनपीपी 28 सीटों पर आगे चल रही है.

त्रिपुरा में बीजेपी का इनडीजीनियस पीपुल्‍स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) से गठबंधन है. वहीं, नगालैंड में बीजेपी का नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) के साथ गठबंधन है. सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाले नतीजे नगालैंड से आए हैं. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने नगालैंड की 60 में से 12 सीट पर जीत हासिल कर सत्‍ता भागीदारी हासिल की थी. इस बार बीजेपी गठबंधन 40 सीटों के आसपास हासिल करते हुए दिख रहा है. सवाल ये उठ रहा है कि ईसाई बहुल राज्‍य में बीजेपी को इतनी बड़ी सफलता कैसे मिल रही है. नगालैंड में ईसाई धर्म का इतिहास 150 साल पुराना है. ईसाई धर्म राज्‍य की संस्‍कृति का अहम हिस्‍सा है.

नगालैंड में छोटे-बड़े शहरों ही नहीं ग्रामीण इलाकों में भी गिरिजाघर नजर आ जाते हैं. दरअसल, राज्‍य की 90 फीसदी आबादी ईसाई धर्म से जुड़ी हुई है. ऐसे में ये चौंकाता है कि हिंदूवादी या दक्षिणपंथ की राजनीति करने वाली भाजपा ने ऐसा क्‍या किया कि उसके गठबंधन को बहुमत से भी ज्‍यादा सीटें हासिल होती हुई दिख रही हैं. इसके कई कारण सामने आ रहे हैं. बीजेपी अब तक यहां सहयोगी दल के तौर पर रही है. राज्‍य में बीजेपी स्‍थानीय नगा पार्टी एनडीपीपी के साथ मिलकर चुनाव मैदान में है. यहां बीजेपी ने इस बार 20 सीटों पर ही प्रत्‍याशी उतारे हैं.

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नगालैंड में नहीं है कोई विपक्ष
विधानसभा चुनाव 2018 में एनडीपीपी और बीजेपी गठबंधन ने सरकार बनाई. बाद में बाकी दलों ने भी इस गठबंधन को समर्थन दे दिया था. ऐसे में विधानसभा में बीजेपी के इस गठबंधन के सामने कोई विपक्ष ही नहीं था. राज्‍य में कांग्रेस, नगा पीपुल्‍स फ्रंट (NPF) एनपीएफ, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, लोक जनशक्ति पार्टी और कई क्षेत्रीय दल भी चुनाव मैदान में रहते हैं. दरअसल, 2018 के चुनावों में नगालैंड में एनपीएफ ने 60 में 26 सीटों पर जीत हासिल की थी. लेकिन 2021 आते-आते पार्टी के 21 विधायक बागी हो गए और उन्‍होंने एनडीपीपी-बीजेपी गठबंधन को समर्थन दे दिया था. इससे राज्‍य में कोई विपक्ष ही नहीं बचा.

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नगालैंड में एकबार फिर ऐसे आसार बनते हुए दिख रहे हैं कि विधानसभा में सत्‍तारूढ़ गठबंधन के सामने कोई विपक्ष नहीं होगा. (Image: PTI)

इस बार भी विपक्ष ना होने के आसार
विधानसभा चुनाव 2023 में एनपीएफ ने 60 में से 22 सीटों पर ही अपने प्रत्‍याशी उतारे हैं. अभी तक के नतीजों के मुताबिक पार्टी सिर्फ 3 सीटों पर आगे चल रही है. ऐसे में साफ है कि इस बार भी राज्‍य में कोई विपक्ष नहीं होगा. कांग्रेस अब तक राज्‍य में अपना खाता भी नहीं खोल पाई है. वहीं, अन्‍य 17 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. ऐसे में ये उम्‍मीद करना बेमानी नहीं होगा कि सभी नतीजे आने के बाद अन्‍य की श्रेणी में आने वाले प्रत्‍याशी गठबंधन सरकार को ही समर्थन दे देंगे. अगर ऐसा हुआ तो एक बार फिर गठबंधन सरकार के सामने किसी तरह की चुनौती नहीं होगी.

बीजेपी ने किया आक्रामक प्रचार
भारतीय जनता पार्टी दक्षिण और पूर्वोत्‍तर भारत में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए काफी समय से लगातार कोशिश कर रही है. इसी क्रम में इस बार विधानसभा चुनावों के दौरान नगालैंड में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत से प्रचार अभियान चलाया. अगर ये कहा जाए कि पार्टी ने बाकी दलों के मुकाबले राज्‍यों में सबसे ज्‍यादा प्रचार किया तो गलत नहीं होगा. चुनावी पोस्‍टरों में पीएम नरेंद्र मोदी लोगों से विकास का वादा करते हुए नजर आए. लोगों ने उनके रिकॉर्ड और वादा दोनों पर भरोसा जताया है. स्‍थानीय लोगों को उम्‍मीद है कि विकास की राजनीति करने वाली बीजेपी राज्‍य में अच्‍छा काम करेगी और उनकी आमदनी भी बढ़ेगी.

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नगालैंड के मौजूदा हालात कैसे हैं?
नगालैंड विकास के मामले में देश के बाकी राज्‍यों के मुकाबले काफी पीछे हैं. राज्‍य में ट्रांसपोर्टेशन की व्‍यवस्‍था भी बहुत अच्‍छी नहीं है. यहां तक राजधानी और बड़े शहरों की सड़कें भी खस्‍ताहाल हैं. पूरे राज्‍य में एक भी मेडिकल कॉलेज नहीं है. स्‍थानीय लोगों का कहना है कि राज्‍य में बीजेपी के सत्‍ता में शामिल होने के बाद ही कुछ विकास हुआ है. साथ ही लोगों को उम्‍मीद है कि हिंदुत्‍ववादी राजनीति करने वाली बीजेपी स्‍थानीय लोगों के धार्मिक मामलों में भी कोई हस्‍तक्षेप नहीं करेगी. उनका कहना है कि बीजेपी ने विकास को रफ्तार देने के लिए शिक्षा को बढ़ावा दिया है. उसका धर्म को लेकर कोई टकराव नहीं है.

ईसाई नेता ही बने बीजेपी की ताकत
नगालैंड में बीजेपी के ज्‍यादातर नेता ईसाई ही हैं. बीजेपी ने राज्‍य में पार्टी से जुड़े ज्‍यादातर पदों पर ईसाई लोगों को ही वरीयता दी है. स्‍थानीय मतदाताओं पर इस बात की भी असर नजर नहीं आता कि दिल्‍ली में गिरिजाघरों और ईसाई समुदाय से जुड़ी संस्‍थाओं ने उनके खिलाफ बढ़ रही हिंसक वारदातों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में शामिल हुए यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम (UCF) का कहना है कि 2022 तक ऐसी वारदातों की संख्‍या बढ़कर 598 हो गई है. नगालैंड के मतदाताओं का मानना है कि राज्‍य में ईसाई धर्म को मानने वालों पर किसी तरह का दबाव नहीं है. ऐसे में हमें बीजेपी से विकास की उम्‍मीदें हैं. साफ है कि राज्‍य में मतदाताओं ने बीजेपी को विकास के लिए चुना है.

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नगालैंड में एनडीपीपी ने 40, जबकि भाजपा ने 20 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. (Image: PTI)

नगालैंड में बीजेपी का चुनावी सफर
बीजेपी ने नगालैंड में 2003 के विधानसभा चुनावों में 7 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बाद 2008 में 2 और 2013 में 1 सीट पर ही जीत दर्ज की थी. वहीं, 2018 में 12 सीटों पर जीत हासिल कर बड़ी कामयाबी हासिल की थी. अगर लोकसभा चुनावों की बात की जाए तो बीजेपी के सहयोगी दल एनडीपीपी प्रत्‍याशी ने 2019 में राज्‍य की अकेली लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी. विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्‍य में बीजेपी ने सरकार बनाने में सहयोग किया, लेकिन अपनी जमीन मजबूत करने के लिए किसी का सहारा नहीं लिया. यहां भारतीय जनता पार्टी ने अपने रणनीतिक बल के दम धीरे-धीरे मजबूत जमीन तैयार की है.

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जमीन पर उतरकर बीजेपी ने किया काम
बीजेपी ने नगालैंड में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए सबसे निचले स्‍तर तक पहुंचकर काम किया है. पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर स्‍कूल बनाकर शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रहे हैं. जहां, ईसाइयों के धार्मिक मामलों में पार्टी कोई हस्‍तक्षेप नहीं करती. वहीं, गैर-ईसाई लोगों को अपने साथ जोड़ने में कोई कोर-कसर भी नहीं छोड़ती है. बीजेपी ने राज्‍य में अपनी आदिवासी कल्‍याण यूनियन भी बनाई हैं. पार्टी गैर-ईसाई समुदाय के लोगों को अपनी परंपराओं को नहीं छोड़ने के लिए प्रोत्‍साहित करती है. यही नहीं, उन्‍हें राज्‍य से बाहर पढ़ने के लिए भी भेजती है. ऐसे में राज्‍य में जगह-जगह बीजेपी का झंडा लहराता हुआ आसानी से दिख जाएगा.

विकास का एजेंडा समझाने में कामयाब
कांग्रेस समेत बीजेपी गठबंधन का विरोध करने वाली पार्टियां जहां लोगों को यही समझाती रहीं कि भारतीय जनता पार्टी हिंदुत्‍व की राजनीति करती है. वहीं, बीजेपी मतदाताओं के बीच विकास का एजेंडा लेकर गई. बीजेपी नेताओं ने मतदाताओं को समझाया कि पार्टी देश के बाकी हिस्‍सों में बेशक हिंदुत्‍व की राजनीति करती है, लेकिन उसने विकास को भी बड़े पैमाने पर अंजाम दिया है. यही नहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं को समझाया कि बीजेपी ईसाई धर्म के खिलाफ नहीं है. ऐसे में उन्‍हें डरने की कोई जरूरत नहीं है. बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार चला रहे मुख्यमंत्री नेफियू रियो भी अपनी सभाओं में लोगों यही समझा रहे थे कि उन्‍हें पूरी सुरक्षा मिलेगी. उन्‍हें डरने की जरूरत नहीं है. चुनावी नतीजों से साफ है कि पार्टी मतदाताओं को ये समझाने में पूरी तरह से कामयाब हो गई है.

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