एपोपिस क्षुद्रग्रह जब पृथ्वी के पास गुजरेगा, तब होगा यह खास रक्षा परीक्षण

एपोफिस क्षुद्रग्रह (Apophis Asteroid) 6 मार्च को पृथ्वी से टकराएगा जो एफिल टॉवर के जितना बड़ा है. (तस्वीर: NASA)

एपोफिस क्षुद्रग्रह (Apophis Asteroid) 6 मार्च को पृथ्वी से टकराएगा जो एफिल टॉवर के जितना बड़ा है. (तस्वीर: NASA)

एपोपिस क्षुद्रग्रह (Apophis Asteroid) आगामी छह मार्च को पृथ्वी (Earth) के पास से गुजर रहा है. उसे ग्रह रक्षा तंत्र (Planetary Defence System) अभ्यास के लिए परीक्षण लक्ष्य चुना गया है.

  • Share this:
पृथ्वी के पास से हर महीने कोई न कोई क्षुद्रग्रह (Asteroid) जैसे पिंड जरूर गुजरता है. इनके पास आते ही लोगों के मन में यह सवाल उठने लगता है कि कहीं ये पिंड पृथ्वी से टकरा तो नहीं जाएगा. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा तक अलग से इन पिंडों, जिन्हें नियर अर्थ ऑब्जेक्ट (NEO) की निगरानी रखती है. इस तरह के पिंड के पृथ्वी से टकराव से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने एक ग्रह रक्षा तंत्र (Planetary Defence System) बनाया है जो पृथ्वी के पास आ रहे एपोफिस (Apophis) क्षुद्रग्रह पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण करेंगे जब वह पृथ्वी के पास गुजरेगा.

कितना बड़ा है एपोफिस
एपोफिस शुक्रवार 5 मार्च को पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है. ऐसे में हमारे खगोलविद और वैज्ञानिक इसे खगोलीय पिंडों के रास्तों की गणना की सटीकता की परीक्षा के लिए उपयोग करना चाहते हैं. इसके एक दूसरा मकसद क्षुद्रग्रह की कक्षा के बर्ताव का अध्ययन करना भी है. एपोफिस 99942 क्षुद्रग्रह है जिसका आकार एक हजार फुट है जो एफिल टावर के जितना बड़ा है.

ग्रह रक्षा तंत्र की मजबूती के लिए
वैज्ञानिकों का इरादा इस ग्रह रक्षा तंत्र को मजबूत बनाना है स्पेसडॉटकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए दुनिया भर के वैज्ञाननिकों को एपोफिस का अवलोकन करन के लिए आमंत्रित किया गया है. यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के ग्रह रक्षा विशेषज्ञ विष्णु रेड्डी इस अभियान का संयोजन कर रहे हैं. उनके मुताबिक यह स्वेच्छा का गठबंधन होगा.



कब गुजरेगा यह क्षुद्रग्रह
रेड्डी का कहना है कि गठबंधन बनने के बाद वैज्ञानिक इस अभियान के तहत एपोफिस का विशेष तौर से अवलोकन करेंगे. यह अभियान इंटरनेशनल एस्ट्रॉयड वार्निंग नेटवर्क (IAWAN) की वेबसाइट पर दर्ज है जिसके मुताबिक एपोफिस 6 मार्च को भारतीय समयानुसार सुबह 6.46 मिनट पर पृथ्वी के सबसे पास से गुजरेगा.

Asteroid, Earth, Apophis, Planetary Defence, Planetary Defence exercise , Planetary Defence System, NEO,
क्षुद्रग्रह (Aseroid)के पृथ्वी से टकराने की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे टकराते ही नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


अभी कितना खतरा है इससे
एपोफिस इस बार पृथ्वी से टकाराने की स्थिति में नहीं है, बल्कि यह 2029 के दौरान जब फिर से पृथ्वी से गुजरेगा तब पृथ्वी के ज्यादा पास होगा जब वह 4000 किलोमीटर से भी ज्यादा पास होगा. IAWAN इससे पहले भी इस तरह के अभियान आयोजित कर चुका है. इससे पहले 2012TC4 और 199KW4 के साथ ऐसे अभियान आयोजित किए जा चुके हैं.

बाद में पृथ्वी से टकरा भी सकता है एपोफिस
इससे पहले कई  बार एपोफिस के पृथ्वी से टकराने की संभावना जताई जा चुकी है. हालिया अध्ययन का दावा है कि साल 2068 में एपोफिस के गुजरने से उसके पृथ्वी से टकराने की संभावना 150000 है. अगर ऐसा टकराव हो जाता है तो एपोफिस इतना बड़ा है कि वह बहुत ज्यादा नुकसान करेगा. यही वजह है वैज्ञानिकों ने इसे अपने परीक्षण के लिए बहुत मुफीद माना है. जिससे भविष्य में यदि कोई विशाल पत्थर भी पृथ्वी से टकाराने का प्रयास करे तो उससे निपटा जा सके.

केवल 17 मिलीसेंकेड के आंकड़ों से मिली गुरू पर उल्कापिंड के टकराव की जानकारी

बेकार नहीं है यह रक्षा तंत्र
ग्रह रक्षा तंत्र नतीजे भी दे सकता है. अगर खतरनाक क्षुद्रग्रह के बारे में संभावित टकराव से काफी पहले जानकारी मिल जाए तो उसे उसके रास्ते से विचलित किया जा सकता है. इसमें समय का बहुत अहम भूमिका है इसके यह अभ्यास का भी मामला है. ब्रह्माण्ड में घूमते हुए क्षुद्रग्रह पृथ्वी की ओर खतरनाक गति से आ सकते हैं. एक निश्चित आकार और गति से ज्यादा होने पर ये पृथ्वी के लिए बहुत ही घताक हो सकते हैं.

, Asteroid, Earth, Apophis, Planetary Defence, Planetary Defence exercise , Planetary Defence System, NEO,
एपोफिस क्षुद्रग्रह (Apophis Asteroid) के बारे में कहा जा रहा है कि यह साल 2068 मेंपृथ्वी से टकरा जाएगा. (फाइल फोटो)


पहले महाविनाश ला चुका है इस तरह का टकराव
आज से 6.6 करोड़ साल पहले पृथ्वी से एक क्षुद्रग्रह टकराने पर यहां का 70 प्रतिशत जीवन खत्म हो गया था जिसमें डायनासोर भी शामिल थे. वैज्ञानिकों का कहना है कि भले ही टकराव हमेशा ही उतना खतरनाक ना हो, लेकिन हमारे ग्रह की पारिस्थिति को खतरनाक नुकसान तो पहुंचा ही सकता है. यही वजह है कि बहुत से वैज्ञानिक चिंतित हैं.

शुक्र ग्रह के कभी न देखे गए हिस्से की तस्वीर से वैज्ञानिक क्यों हुए हैरान

आमतौर पर जब अंतरिक्ष के कोई चट्टान पृथ्वी पर गिरती हे तो वह सतह से पहले ही वायुमंडल के घर्षण से जल कर राख हो जाती है, लेकिन बड़ी चट्टानें नुकसानदायक हो सकती है. इसीलिए वैज्ञानिक ऐसी घटना से बचने के लिए पृथ्वी की सुरक्षा के लिए समाधान चाहते हैं. और उनका मानना है कि खतरनाक होने वाले क्षुद्रग्रहों पर सटीक तरह से निगरानी रखी जानी चाहिए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज