क्षुद्रग्रह नहीं, धूमकेतु के टकराने से आया डायनासोर खत्म करने वाला महाविनाश

वैज्ञानिक पहले तो इस बात पर सहमत थे कि महाविनाश (Mass Extinction) क्षुद्रग्रह (Asteroid) या धूमकेतु (Comet) के टकराव से हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

वैज्ञानिक पहले तो इस बात पर सहमत थे कि महाविनाश (Mass Extinction) क्षुद्रग्रह (Asteroid) या धूमकेतु (Comet) के टकराव से हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की अध्ययन से पता चला है कि 6.6 करोड़ साल पहले डायनासोर (Dinosaurs) के खत्म करने वाला महाविनाश (Mass Extinction) क्षुद्रग्रह (Asteroid) के नहीं बल्कि धूमकेतु (Comet) के टकराने से आया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 6:16 AM IST
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अभी तक पृथ्वी (Earth) पर 6.6 करोड़ साल पहले डायनासोर (Dinosaurs) के खात्मे का कारण एक महाविनाश (Mass Extinction) को माना जाता रहा है. वैज्ञानिकों के अध्ययनों ने बताया था कि इस महाविनाश की शुरुआत पृथ्वी पर एक क्षुद्रग्रह (Asteroid)  के टकराने से हुई थी. इस टकराव की वजह से पृथ्वी ज्लावामुखियों (Volcanos) का सिलसिला भी चला जिससे बहुत ही लंबे समय तक पृथ्वी की सतह पर सूरज की किरणें नहीं पड़ी और पृथ्वी पर आए हिमयुग (Ice Age) में सारे डायनासोर नष्ट हो गए. अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harward University) के अध्ययन से पता चला है कि वास्तव में उस महाविनाश की शुरुआत क्षुद्रग्रह के टकराने से नहीं बल्कि धूमकेतु (Comet) के टकराने से हुई थी.

और भी मत हैं इस महाविनाश के बारे में

कई लोगों को हैरानी होती है, लेकिन इस महाविनाश के कारणों के लेकर कुछ अलग मत भी हैं. किसी मत के तहत ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद विशाल भूकंप ही इस महाविनाश की नीव बना, तो कुछ का मत है कि एक महामारी ने धरती के ज्यादातर जानवरों की लील लिया जिसमें डायनासोर भी शामिल थे. लेकिन एक बात निश्चित है कि एक समय पृथ्वी पर राज कर रहे डायनासोर इस समय के दौरान अचानक खत्म हो गए.

एक पिंड का टकराव निश्चित
लेकिन इनमें से निकटतम या कहें प्रचिलित मत वही है जो जिसका जिक्र यहां सबसे पहले हुआ है. जिसमें क्षुद्रग्रह या धूमकेतु के टकराव के साथ उसके बाद की घटनाओं के संकेत वैज्ञानिकों को समय समय पर मिलते रहे हैं. फिर भी ज्यादातर वैज्ञानिकों का यही मानना था कि एक विशालकाय पिंड का टकराव महाविनाश की शुरुआत था और वह पिंड क्षुद्रग्रह था.

टकराव के प्रमाण

अब नए अध्ययन में दावा किया गया है कि वास्तव में  वह टकराव क्षुद्रग्रह का नहीं बल्कि धूमकेतु का है. दिलचस्प बाद यह है कि इस टकराव के प्रत्यक्ष प्रमाण आज भी हैं. मध्य अमेरिका में जो मैक्सिको की खाड़ी है वह इसी टकराव की वजह से बने क्रेटर से बनी है जिसे चिक्सूलब इंम्पैक्टर कहा जाता है. यह क्रेटर एक मीलों चौड़े आकार का पिंड था जो 6.6 करोड़ साल पहले वहां पर टकराया था.



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महाविनाश के बारे में वैसे तो बहुत मत हैं, लेकिन (Asteroid) या धूमकेतु (Comet) के टकराव वाला मत वैज्ञानिक नजरिए से ज्यादा सही लगता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


बहुत विशाल क्रेटर

इस टकराव की वजह से बना क्रेटर 149 किलोमीटर चौड़ा और 19 किलोमीटर गहरा है. इस टकराव की वजह से उस समय पृथ्वी के पौधों और जानवरों की तीन चौथाई आबादी साफ हो गई थी और उसी से महाविनाश की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी जिसमें डायनासोर का भी पूरा सफाया हो गया था.

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धूमकेतु कैसे आया

वैसे ज्यादातर वैज्ञानिकों का मानना यही था टकाराने वाला पिंड क्षुद्रग्रह हो सकता है, लेकिन नए अध्ययन का कहना है कि वास्तव में यह पिंड धूमकेतु था. एवी लोएब, फ्रैंक बी बाइर्ड और आमिर सिराज की टीम ने सुझाया है कि यह धूमकेतु ऊर्ट बादल से आया था जो गुरू ग्रह के गुरुत्व के कारण अपने रास्ते से भटक गया था और सूर्य का चक्कर लगाते हुए पृथ्वी तक आया.

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शोधकर्ताओं ने इस बात के प्रमाण भी दिए कि टकराने वाले पिंड के धूमकेतु (Comet) होने की संभावना ज्यादा है. (तस्वीर: NASA)


धूमकेतु की संभावना ज्यादा

शोधकर्ताओं का तो यहां तक कहना है कि इस तरह की घटना हर 25 से 73 करोड़ साल में हो सकती है. शोधकर्ताओं ने बताया कि उनका शोध इस घटना की खगोलीय व्याख्या भी करता है. उनकी गणना के अनुसार लंबे काल वाले धूमकेतु के पृथ्वी से टकराने की संभावना ज्यादा है. वहां ऐसे धूमकेतुओं के सूर्य के पास पहुंच कर बिखरने की संभावना 20 प्रतिशत है.

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शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि क्रेटर की रासायनिक संरचना धूमकेतुओं में पाए जाने वाले पदार्थ कार्बनेसियस कोंड्राइट के होने की ज्यादा संभावना दिखाई दी है. यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है.
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