पृथ्वी के सबसे पास से गुजरा बड़ी कार के आकार का यह Asteroid- नासा

पृथ्वी के सबसे पास से गुजरा बड़ी कार के आकार का यह Asteroid- नासा
यह क्षुद्रग्रह अब तक के गुजरे क्षुद्रग्रहों में से पृ्थ्वी के सबसे पास से गुजरा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) ने बताया है कि हाल ही में एक क्षुद्रग्रह (Asteroid) पृथ्वी (Earth) के पास से गुजरा है. इतनी पास से अब तक कोई भी क्षुद्रग्रह नहीं गुजरा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 6:03 PM IST
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पृथ्वी के पास से क्षुद्रग्रहों (Asteroids) का गुजरना कोई विरली घटना नहीं हैं. ऐसा हर साल एक दो बार देखने को तो मिल ही जाता है. हाल ही में एक क्षुद्रग्रह पृथ्वी(Earth) के पास से गुजरा जिसका निकलना ऐतिहासिक हो गया. इस क्षुद्रग्रह का आकार एक एसयूवी (SUV) के जितना बड़ा था. यह पृथ्वी से 2950 किमी की ऊंचाई से निकला था. यह पृथ्वी के इतिहास में अवलोकित किया गया सबसे पास से गुजरने वाला क्षुद्रग्रह था.

पृथ्वी से टकराता तो क्या होता
नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी (JPL) ने अपने बयान में कहा, “अगर यह 2020QG नाम का क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकरा भी जाता संभव है कि उसने कोई भी नुकसान नहीं किया होता. बजाय इसके यह हमारे वायुमंडल में घुसते ही एक आग के गोले में बदल जाता, यानि उल्कापिंड (meteor) में बदल जाता और शायद पृथ्वी की सतह पर पहुंचने से पहले ही पूरी तरह से चल चुका होता.”

क्या होते हैं क्षुद्रग्रह
क्षुद्रग्रह छोटे पथरीले पिंड होते हैं जो हमारे सूर्य का चक्कर लगाते है. सूर्य का चक्कर लागने के बावजूद भी इन्हें ग्रह का दर्जा उनके छोटे आकार की वजह से नहीं दिया जाता है. हमारे सैरमंडल में भारी संख्या में क्षुद्रग्रह मौजूद हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर मंगल और गुरू ग्रह के बीच स्थित हैं. लेकिन कुछ क्षुद्रग्रह दूसरे ग्रहों की कक्षा में भी पाए जाते हैं इनमें  से कुछ पृथ्वी की कक्षा में भी सूर्य का चक्कर लगा रहे हैं. जब इन क्षुद्रग्रहों के टुकड़े पृथ्वी पर आकर सतह तक पहुंच जाते हैं उन्हें उल्कापिंड (Meteorites) कहा जाता है.



कितना खतरा था हमारे सैटेलाइट के लिए
3 से 6 मीटर लंबा यह क्षुद्रग्रह रविवार को भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे दक्षिणी हिंद महासागर के ऊपर से गुजरा था. इस पिंड की गति 12.3 किलोमीटर प्रति सेकंड थी. और यह जियोस्थितिक कक्षा (geostationary orbit), जो कि 35400 किमी की ऊंचाई पर है, से काफी नीचे से निकला था. इससे हमारे उपग्रहों को कोई खतरा नहीं हुआ जिनमें से ज्यादातर इसी कक्षा में हैं.

ऐसे पिंड गुजरते रहते हैं पृथ्वी के पास से
यह क्षुद्रग्रह सबसे पहले कैलीफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पालोमर ऑबजर्वेटरी के ज्विकी ट्रांजिट फैसिलिटी टेलीस्कोप से दिखने के बाद छह घंटे तक आकाश में प्रकाश की एक लंबी पूंछ की तरह दिखा. नासा का कहना है कि इतने आकार के क्षुद्रग्रह पृथ्वी के पास से हर साल गुजरते रहते हैं.

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मुश्किल होता है इनका अवलोकन
इनके साथ समस्या यह है कि इन्हें रिकॉर्ड करना मुश्किल होता है जब तक कि ये आपके ग्रह की ओर न आ रहे हैं. ऐसे मामलों में वायुमंडल में एक विस्फोट देखा जाता है. जैसे  की साल 2013 में रूस के चेल्याबिन्स्क में हुआ था जब 66 फुट लंबा एक पिंड में विस्फोट होने से मीलों तक हजारों लोग घायल हो गए थे.

Asteroid
पृथ्वी के पास से हर साल ऐसे क्षुद्रग्रह गुजरते रहते हैंं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


नासा का एक अलग से मिशन है ये
नासा का एक मिशन विशाल क्षुद्रग्रह पर नजर रखने का भी है जिनका आकार 460 फुट से ज्यादा होता है जो वास्तव में पृथ्वी के लिए खतरा होते हं. लेकिन नासा के उपकरण छोटे क्षुद्रग्रह को भी पकड़ लेते हैं.

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नासा में नियर अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज सेंटर के निदेशक पॉल चोडस का कहना है कि इतने छोटे क्षुद्रग्रहों का इतने पास तक आ जाना बहुत रोमांचक है. क्योंकि हम पृथ्वी के गुरुत्व के कारण इन्हें मुड़ते हुए देख पाते हैं. जेपीएल के गणना के मुताबिक यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी के गुरुत्व के कारण 45 डिग्री तक मुड़ गया था.
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