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कितनी उपयोगी है क्षुद्रग्रह की खुरदरी सतह की मिली नई जानकारी?

कितनी उपयोगी है क्षुद्रग्रह की खुरदरी सतह की मिली नई जानकारी?

क्षुद्रग्रहों (Asteroids) की सतह के खुरदुरेपन का कारण उनके आकार और गतिविधि के बारे में भी बता सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

क्षुद्रग्रहों (Asteroids) की सतह के खुरदुरेपन का कारण उनके आकार और गतिविधि के बारे में भी बता सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

क्षुद्रग्रहों (Asteroids) पर हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि उनमें धूल के छोटे कण (Dust Grains) कढ़ाई में उछलते पॉपकॉर्न की तरह फूट कर निकले होंगे और सतह पर फैल गए हैं. इन पिंडों की खुरदरी और ऊबड़ खाबड़ सतह (Rough Surface of Asteroids) की वजह जानकर वैज्ञानिकों को यह भी समझ में आएगा कि क्षुद्रग्रह समय के साथ आकार कैसे बदल देते हैं और इससे उनकी अंतरिक्ष में यात्राओं में क्या प्रभाव पड़ता है.

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    ब्रह्माण्ड में कितने तरह के पिंड हैं. कई तरह के तारे हैं, ब्लैक होल हैं, ग्रह हैं, उपग्रह हैं. लेकिन बड़ी बड़ी चट्टानों की आकार के क्षुद्रग्रहों (Asteroids) का भी कम महत्व नहीं है. वैज्ञानिक मानते हैं कि क्षुद्रग्रहों में सौरमंडल के इतिहास के संकेत छिपे हुए हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए क्षुद्रग्रहों का इतनी गहराई से अध्ययन से किया जाता है. नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने क्षुद्रग्रहों की असामान्य, ऊबड़ खाबड़ और खुरदरी सतह (Rough Surface of Asteroids) का रहस्य पता  लगाने में सफलता हासिल की है. उन्होंने पाया है कि इसके पीछे की वजह धूल का पॉपकॉर्न जैसा प्रभाव (popcorn like Effect) है.

    सटीक पथ की जानकारी के लिए
    जनसामान्य में क्षुद्रग्रह को लेकर कौतूहल इस बात के लिए रहता है कि कहीं पृथ्वी की ओर आ रहा कोई क्षुद्रग्रह उससे टकरा तो नहीं रहा है. लेकिन वैज्ञानिक भी इस कारण से क्षुद्रग्रह का अध्ययन करते हैं जिससे वे उसकी यात्रा के पथ की सटीक जानकारी पा सकें. कोलोराडो बोउल्डर यूनिवर्सिटी के भौतिकविदों का यह अध्ययन इसी लिहाज से अहम माना जा रहा है. इस प्रभाव के कारण समय के साथ क्षुद्रग्रह की धूल गायब हो जाती है और वे खुरदुरे दिखाई देने लगते हैं.

    और यह जानकारी भी
    नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन को लेकर वैज्ञानिकों का विश्वास है कि इससे वे क्षुद्रग्रहों के बदलते आकार के बारे में जान सकेंगे और साथ ही यह भी जान सकेंगे कैसे वे अपना रास्ता बदल कर खतरनाक तरीके से पृथ्वी के पास आ जाते हैं. यह अध्ययन साल 2020 में नासा के द्वारा साझा की गई तस्वीरों पर गिए गए शोध पर आधारित है.

    खुरदुरे रेतमाल की तरह
    ये तस्वीरें नासा के ओसाइरस रेक्स के द्वारा बेन्नू क्षुद्रग्रह की ली गई थीं जो पृथ्वी से एक अरब मील की दूरी पर स्थित है, इस क्षुद्रग्रह की सतह खुरदुरे रेतमाल की तरह दिखाई दी ना कि बिलकुल चिकनी जैसा की उम्मीद की जा रही थी. बेन्नु क्षुद्रग्रह की सतह पर बड़े पत्थर भी बिखरे हुए देखने को मिले थे.

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    यह अध्ययन बेनु क्षुद्रग्रह (Bennu Asteroid) की तस्वीरों के आधार पर शुरू किया गया था. (तस्वीर: NASA @OSIRISREx)

    कम्प्यूटर सिम्यूलेशन का उपयोग
    इस नई और चौंकाने वाली जानकारी ने कोलोराडो बोउल्डर के शोधकर्ताओं को इस अध्ययन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने एक कम्प्यूटर सिम्यूलेशन या प्रतिमान बनाए और प्रयोगशाल के प्रयोगों के आधार पर क्षुद्रग्रहों की खुरदरी परत के कारणों की पड़ताल शुरू कर दी. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक सियांग वेन सू ने बताया कि उनकी टीम ने स्थैतिकी विद्युकी की तरह के बलों की खोज की जिनकी वजह से धूल के छोटे छोटे कण क्षुद्रग्रह से बाहर निकल कर अंतरिक्ष में चले गए.

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    धूल की जानकारी
    अपने शोध में वैज्ञानकों ने दो काल्पनिक क्षुद्रग्रहों  की मिट्टी की भौतिकी की पड़ताल कर गणनाओं की शृंखला चलाई और यह पता किया कि धूल कैसे बनी होगी और फिर कैसे सैकड़ों हजारों सालों में सतह पर आई होगी. इसमें से एक क्षुद्रग्रह केवल आधा मील चौड़ा तो दूसरा कई मील चौड़ा था.

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    इस अध्ययन के नतीजे हर तरह के क्षुद्रग्रह (Asteroids) पर लागू हो सकते हैं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    धूल के कण और गुरुत्व
    इस पड़ताल में शोधकर्ताओं ने पाया कि जब धूल के कण बड़े क्षुद्रग्रह से बाहर निकलते हैं, वे इतनी गति नहीं पकड़ पाते हैं कि क्षुद्रग्रह के गुरुत्व से खुद क मुक्त कर सकें. लेकिन ऐसा छोटे क्षुद्रग्रह के साथ नहीं पाया गया. क्षुद्रग्रह जमा हुआ दिखाई दे सकते हैं, लेकिन वे भी अपने जीवनकाल में उद्भव प्रक्रिया से गुजरते हैं. इस प्रभाव के समझाते हुए शोधकर्ताओं ने बताया कि बेन्नू जैसे क्षुद्रग्रह लगातार घूर्णन करते हैं जिससे उनकी सतह सूर्य की रोशनी के सामने उजागर होती फिर अंधेरे में जाकर फिर से उजागर होती है.

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    गर्म होने और ठंडे होने के इस अनंत चक्र के कारण बड़ी चट्टानों की सतह में तनाव का प्रभाव आता है और धीरे धीरे उनमें दरार आ जाती है जिससे धूल के छोटे कण उछल कर बाहर निकलने लगते हैं.  इन कणों की गति 20 मील प्रति घंटा तक या उससे ज्यादा भी हो सकती है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह परिघटना अकेले बेन्नू क्षुद्रग्रह पर ही लागू नहीं होती होगी. ऐसा वायु विहिन पिंडों जैसे चंद्रमा और यहां तक कि शनि के छल्लों पर भी लागू होती होगी.

    Tags: Asteroid, Research, Science, Solar system, Space

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