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क्या क्षुद्रग्रहों ने छीन ली थी पुरातन पृथ्वी के वायुमंडल की ऑक्सीजन?

क्या क्षुद्रग्रहों ने छीन ली थी पुरातन पृथ्वी के वायुमंडल की ऑक्सीजन?

पृथ्वी (Earth) से टकराने वाले क्षुद्रग्रहों की संख्या पहले के अनुमानों से बहुत ही ज्यादा थी.  (फाइल फोटो)

पृथ्वी (Earth) से टकराने वाले क्षुद्रग्रहों की संख्या पहले के अनुमानों से बहुत ही ज्यादा थी. (फाइल फोटो)

पृथ्वी (Earth) की पर्पटी के अध्ययन से पाया गया है कि पुरातन काल में क्षुद्रग्रहों (Asteroids) की ‘बारिश’ उम्मीद से कहीं ज्यादा हुई थी जिससे वायुमंडल के ऑक्सीजन (Oxygen) स्तर बहुत ज्यादा प्रभावित हुए थे.

    पृथ्वी (Earth) की उत्पत्ति के बाद से वह कई दौर से गुजरी है. अपने इतिहास काल में 2.5 से 4 अरब साल पहले के दौर में इसने क्षुद्रग्रहों (Asteroids) और उल्कापिंडों की बारिश भी देखी है. इस दौरान विशालकाय चट्टानें आसमान से गिरती रहीं थीं इस घटना का पृथ्वी की संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ा था. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर इन्ही पिंडों से पानी और जीवन को पनपाने वाले पदार्थ आए थे. लेकिन इसका एक गहरा प्रभाव पृथ्वी के वायुमंडल पर भी पड़ा था. एक अध्ययन ने पता लगाया है कि इससे वायुमंडल के ऑक्सीजन के स्तरों (Oxygen levels) बड़े पैमाने पर कमी आ गई थी.

    छोटे कणों का अध्ययन
    पृथ्वी की  पर्पटी के कभी पिघले हुए कणों में से एक छोटे से कण के इस अध्ययन ने खुलासा किया है कि इन क्षुद्रग्रहों के टकराव जितना हमें सोचते थे उससे कहीं ज्यादा थे. और इन्हीं की वजह से पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजनेशन की प्रक्रिया टल गई होगी. और ऑक्सीजन के स्तरों में कमी बनी रही होगी. यह अध्ययन नेचर साइंस में प्रकाशित हुआ है.

    कब बनते हैं ये
    इन खास कणों को इम्पैक्ट स्फेरूल्स कहा जाता है. ये कण तब बनते हैं जब कोई क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराता है और उससे इतनी तीव्र ऊष्मा पैदा होती है कि पर्पटी पिघल जाती है और उसका स्प्रे की तरह हवा में छिड़काव सा हो जाता है. जब  पदार्थ नीचे बैठ कर ठंडा होता है तो ठोस हो जाता है और ग्रह की पर्पटी पर एक स्फेरूल्स की परत बना देता है.

    टकराव की दर ज्यादा थी
    हाल के सालों में बड़ी ताताद में स्फेरूल्स निकाले गए हैं जिससे पता चलता है कि जितना पहले सुझाया गया है, क्षुद्रग्रहों के टकराव उससे दस गुना ज्यादा गति से पृथ्वी से टकराए थे. इससे यह भी साफ होता है कि इनका पहले के मॉडल्स के द्वारा सुझाए गए पृथ्वी के ऑक्सीजन स्तरों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा होगा.

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    क्षुद्रग्रहों (Asteroid) की वर्षा ने पृथ्वी के वायुमंडल की रासायनिक संरचना को प्रभावित कर रखा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    गलत आंकलन था पहले के मॉडल का
    साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के ग्रह भूविज्ञानी सिमोन मार्ची का कहना है कि अभी के टकराव मॉडल उत्तर आर्कियन स्फेरूल्स की परतों की संख्या का आंकलन कम ही कर सके थे. इससे पता चलता है कि टकराव का प्रवाह जितना पहले सोचा गया था उससे 10 गुना ज्यादा मात्रा में  हुआ होगा.

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    ऑक्सीजन की मात्रा की अहमियत
    अंतरिक्ष से आने वाले इस अतिरिक्त सामग्री ने पृथ्वी के रसायनशास्त्र को बहुत प्रभावित किया इसका नतीजा यह हुआ कि बहुत सारी ऑक्सीजन पृथ्वी के वायुमंडल में नहीं आ सकी. पृथ्वी पर भारी मात्रा मे ऑक्सीजन कब कहां और कैसे आई, ये सवाल हमारे ग्रह को आवासीय बनाने के समय को समझने के लिए बहुत जरूरी हैं जहां इंसान सहित अधिकांश जीव ऑक्सीजन के बिना नहीं जी सकते हैं.

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    क्षुद्रग्रहों (Asteroid) की वर्षा रुकने के बाद ही पृथ्वी पर ऑक्सीजन का बढ़ना शुरू हो सका. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    इसके बाद ही बढ़ सकी ऑक्सीजन
    कारण तो स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन क्षुद्रग्रहों के भारी टकराव के होते रहने से पृथ्वी पर वह महान ऑक्सीकरण घटना शुरू नहीं हो सकी थी. इसके बाद ही 2.4 अरब साल पहले प्रकाशसंश्लेषण करने वाले साइनोबैक्टीरिया का उदय हो सका जिससे पृथ्वी पर पर वृहद जीवन की नींव पड़ी. इस नए विश्लेषण से पता चला है कि क्षुद्रग्रहों की वर्षा उन प्रणालियों में से एक हो सकती है जिनकी वजह से उस दौर में पृथ्वी पर ऑक्सीजन के स्तरों में इजाफा नहीं हो पा रहा था.

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    स्टैनफोर्ट यूनिवर्सिटी की खगोलविद और भूवैज्ञानिक लॉरा शेफर का कहना है कि उत्तर आर्कियान काल में हुई इस वर्षा से एक छह मील के व्यास का पिंड के टकराने से इतनी प्रतिक्रिया करने वाली गैसें पैदा हुई होंगी कि उनसे वायुमंडल की पूरी ऑक्सीजन खत्म कर दी होगी. यह प्रक्रिया उन प्रमाणों से मेल खाते हैं जो बताते हैं कि 2.5 अरब साल के बाद पृथ्वी ऑक्सीजन तेजी से बढ़ने लगी थी. अब शोधकर्ताओं का मानना है कि यह केवल एक संयोग मात्र नहीं था.

    Tags: Earth, Research, Science, Space

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