अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से ‘छोटा’ हो जाता है दिल- शोध

लंबी अंतरिक्ष यात्राएं (Long space Travels) दिल पर स्थाई बदलाव लाने वाले प्रभाव करती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

लंबी अंतरिक्ष यात्राएं (Long space Travels) दिल पर स्थाई बदलाव लाने वाले प्रभाव करती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

लंबी अंतरिक्ष यात्राओं (Long Space Travel) में दिल (Heart) की संरचना में बहुत बदलाव आता है जिसे कम तीव्रता वाली कसरतों (Exerciese) से रोका नहीं जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 1:38 PM IST
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दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों ने मंगल ग्रह (Mars) पर अपने अभियान भेजना शुरु कर दिए हैं. तभी से वहां पर मानव अभियान भेजने की भी तैयारियां चल रही हैं. इसी के साथ ही अंतरिक्ष में लंबे समय (Long Space travel) तक इंसान के रहने में आने वाली चुनौतियों पर शोधों में भी तेजी आ गई है. ऐसे ही एक शोध में लंबे समय तक इंसान के अंतरिक्ष में रहने से उसका दिल (Heart) सिकुड़ सकता है.

लंबी अंतरिक्ष यात्रा का दिल पर असर

हाल ही में जर्नल सर्कूलेशन में प्रकाशित अध्ययन ने पाया गया है कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से इंसान के दिल की संरचना में बदलाव आ सकता है जिससे दिल सिकुड़ने के साथ एट्रोफी जैसी स्थिति भी आ सकती है जिसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है.

कसरत और अंतरिक्ष की भारहीनता
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए तैरने और लंबी अंतरिक्ष यात्राओं में दिल पर पड़ने वाले प्रभावों की तुलना की. उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि क्या कम तीव्रता और लंबे समय तक कसरत बार बार होने वाली भारहीनता के असर को कम कर सकते हैं या नहीं. इसके लिए उन्होंने एस्ट्रोनॉट स्कॉट कैली के एक साल में अंतरिक्ष में रहने और एथलीट  बेनॉइट लीकोम्टे के लंबी तैराकी के प्रभावों की तुलना की.

कसरत के बाद भी सिकुड़ गया दिल

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता और अमेरिका के डैलास की यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्सासके साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर में इंटरनल मैडिसिन के प्रोफेसर डॉ बेनजमिन नेवाइन के मुताबिक अध्ययन में पाया गया कि जब कैली ने एक साल अंतरिक्ष में गुजारा तो उनका दिल सिकुड़ गया था, जबकि उन्होंने 340 के प्रवास के दौरान हफ्ते में छह दिन नियमित काम किया.



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दिल की संचरना (Heart Structure) पर भारहीनता की स्थिति में बदलाव लाने वाला असर होता है. (तस्वीर: shutterstock)


दोनों मामलो में कसरत काफी नहीं

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि इसी तरह के बदलाव लकोम्टे में भी देखे गए जब उन्होंने साल 2018 में प्रशांत महासागर में 159 दिन की तैराकी की. अध्ययन का कहना है कि दोनों मामलों में दिल के बदलावों को रोकने के लिए कसरत काफी नहीं है. अध्ययन में सुझाया गया है कि लंबे समय तक भारहीनता दिल की संरचना में बदलाव ला देती है और कम तीव्रता वाली कसरत इसे रोकने के लिए काफीन नहीं है.

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गुरुत्व और दिल की प्रक्रिया

शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी पर अनुभव किए जाने वाले गुरुत्व से दिल को उसके आकार और क्रियात्मकता कायम रखने में मदद मिलती है. क्योंकि इससे वह लगातार नसों के जरिए खून पम्प कर सकता है. उन्होंने कहा कि गुरुत्व जब भारहीनता से बदल दिया जाता है, तब प्रतिक्रिया स्वरूप दिल सिकुड़ जाता है.

अंतरिक्ष में कसरत

अध्ययनके मुताबिक कैली गुरुत्व के बगैर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में मार्च 2105 से लेकर मार्च 2016 तक रहे. उन्होंने इस दौरान हफ्ते में छह दिन रोज दो घंटे तक स्टेशनरी बाइक और ट्रेडमील पर वर्कआउट किया और प्रतिरोधी गतिविधियों में संलग्न रहे. वहीं लेकोम्टे 5 जून से 1 नवंबर 2018 तक 1753 मील तक औसतन छह घंटे प्रतिदिन तैरते रहे.

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चाहे अंतरिक्ष हो या फिर पानी भारहीनता (Weightlessnes) का असर दोनों ही स्थितियों में होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


फिर भी यह हुआ असर

अध्ययन में यह पाया गया कि लेकोम्टे पृथ्वी पर ही थे, वे पानी में घंटों समय बिता रहे थे जिससे गुरुत्व का प्रभाव कम हो गया था. उन्होंने यह भी उम्मीद की थी जिस तरह की कसरत दोनों ने ही अपने दिल के लिए की थीं वह उनके दिल को सिकुड़ने और कमजोर होने से बचा लेगा. लेकिन केली और लेकोम्टे दोनों का ही वजन कम हुआ और उनके दिल का आकार कम हो गया.

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शोधकर्ताओं का कहना है कि दिल का आकार छोटा हाना और कुछ मासंपेशियां कमजोर होने से दिल कमजोर नहीं होता है. यह पूरी तरह से सही ही होता है. इसका काम सामान्य रहता है और यह फिट भी रहता है. बस यह केवल खुद को नए हालातों  में ढाल रहा होता है.
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