मंगल से वापसी के लिए मीथेन को बनाया जा सकता है रॉकेट ईंधन- शोध

मंगल ग्रह (Mars) पर ईंधन (Fuel) बनानी की नई तकनीक बहुत कारगर साबित हो सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मंगल ग्रह (Mars) पर ईंधन (Fuel) बनानी की नई तकनीक बहुत कारगर साबित हो सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मंगल ग्रह (Mars) से अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) की वापसी के लिए वहां के साधनों से ही रॉकेट ईंधन (Rocket Fuel) के तौर पर मीथेन (Methane) के कारगर उत्पादन की तकनीक विकसित हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 10, 2021, 3:14 PM IST
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मंगल ग्रह (Mars) पर मानव अभियान के लिए सबसे बड़ी बाधा यह है कि हमारे एस्ट्रोनॉट्स (Astronauts) को ले जाने और वापस लाने के लिये पर्याप्त ईंधन (Fuel) कैसे ले जाया जा सकेगा. इस समस्या को सुलझाने के लिए नासा (NASA) का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल पर वहां की कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) से ऑक्सीजन बनाने का प्रयोग करेगा. ऐसा लगता है कि उससे पहले वैज्ञानिकों ने इस समस्या का एक हल निकाल लिया है. अध्ययन में सुझाया गया है कि मीथेन (Methane) का ईंधन की तरह उपयोग इसका हल हो सकता है.

वापसी के लिए हो सकता है उपयोगी ईंधन

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोध में कहा गया है कि एस्ट्रोनॉट्स अपने पृथ्वी पर वापसी के लिए रॉकेट में मीथेन का ईंधन बनाए के लिए उपयोग कर सकते हैं. फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी में एसिस्टेंट प्रोफेसर होउलिन जिन की अगुआई में वैज्ञानिकों की टीम ने मंगल पर मीथेन आधारित रॉकेट ईंधन बनाने का कारगर तरीका खोजा है.

मंगल पर ईंधन बनाने की जरूरत क्यों
दरअसल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि मंगल ग्रह इतनी दूर स्थित है कि वहां आने जाने के लिए रॉकेट के ईंधन को पृथ्वी से ही लेकर जाना बहुत ज्यादा वजन बढ़ा देगा जिसे ले जाने के लिए और ज्यादा ईंधन की भी जरूरत होगी. इसलिए वैज्ञानिक ऐसे उपाय खोज रहे हैं जिससे मंगल ग्रह के उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर वापसी के लिए ईंधन बनाने की तकनीक विकसित की जा सके.

पहले इलोन मस्क सुझा चुके हैं यह विचार

मीथेन आधारित रॉकेट ईंधन बनाने का विचार नया नहीं है बल्कि इसे अरबपति और स्पेसएक्स के मालिक इलोन मस्क और उनकी टीम ने सुझाया था. इसमें एक सौर संरचना का उपयोग विद्युत पैदा करने के लिए किया जाता है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड की इलेक्ट्रोलिसिस हो जाती है. इसके बाद इसमें मंगल पर पाए जाने वाली बर्फ के पानी को मिलाया जाए तो उससे मीथेन पैदा हो सकती है.



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मंगल ग्रह (Mars) पर जाकर आने के लिए बहुत ईंधन (Fuel) की जरूरत होगी. इसलिए वहां पर ही ईंधन बनाने के उपायों पर शोध चल रहा है. (तस्वीर: Pixabay)


लेकिन आसान नहीं है ऐसा करना

फिलहाल इस तकनीक का उपयोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में सांस लेने योग्य ऑक्सीजन को बनाने के लिए किया जाता है. लेकिन मंगल पर इसे बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है. मंगल के लिए मुद्दा दो चरण की प्रक्रिया है जिसे कारगर तौर पर चलाने के लिए बड़ी सुविधाओं की जरूरत होगी. जिसके लिए हम पृथ्वी से उपकरण या सामग्री नहीं ले जा सकते.

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क्या करेगी यह तकनीक

जिन और उनकी टीम एकल चरण की पद्धति लेकर आए हैं जो बिखरे हुए जिंक का सिंथेटिक एंजाइम की तरह उपयोग करेगी. यह जिंक कार्बनडाइऑक्साइड के लिए उत्प्रेरण का काम कर प्रक्रिया की शुरुआत कर देगी. जिन और उनकी टीम की बनाई गई इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसके लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती और यह मंगल की सतह के हालातों के मुताबिक और वहां की सामग्री का उपयोक कर ही मीथेन का कारगर उत्पादन कर सकती है.

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नासा (NASA) अगले दशक में मंगल (Mars) पर मानव अभियान भेजने की तैयारी कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


जिंक का फायदा

जिन ने एक बयान में बताया कि जिंक मूलतः एक बड़ा उत्प्रेरक है. यह समय, चुनाव और आवाजाही के लिहाज से अंतरिक्ष यात्रा के लिए बहुत उपयुक्त है. जो प्रक्रिया टीम ने विकसित की है वह पानी से हाइड्रोजन् की प्रक्रिया के उपयोग की बजाए कार्बनडाइऑक्साइड को कारगर तरीके से मीथेन में बदलती है.

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शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक को पूरी तरह विकसित करने से पहले बहुत सी इंजिनियरिंग और शोधकार्य की जरूरत पड़ी थी. गौरतलब है कि नासा अगले दशक में मंगल पर इंसान भेजने की योजना पर काम कर रहा है. इसी के तहत उनसे मंगल पर पर्सिवियरेंस रोवर भेजा है जो अगले महीने वहां पहुंच जाएगा. पर्सिवियरेंस रोवर मंगल पर बहुत सारे प्रयोग करेगा जो आगे नासा के लिए उपयोगी साबित होंगे.
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