क्या ब्रह्माण्ड से भी पुराना है ये तारा? जानिए इस पहेली की कहानी

क्या ब्रह्माण्ड से भी पुराना है ये तारा? जानिए इस पहेली की कहानी
बीस साल पहले वैज्ञानिकों ने जब इस तारे की उम्र निकाली थी तब वह ब्रह्माण्ड की उम्र से भी ज्याादा निकली थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खगोलविदों (Astronomers) को लंबे समय से यह पहेली परेशान किए हुए है कि जब खुद ब्रह्मण्ड (Universe) की उम्र 13.9 अरब साल है तो एक तारा उससे दो अरब साल से ज्यादा कैसे बड़ा हो सकता है.

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हमारे वैज्ञानिकों को नए अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के लिए उन्नत उपकरण मिलते जा रहे हैं. इनसे कई रहस्य सुलझ रहे हैं और कई रहस्यों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है. ऐसा ही एक रहस्य है एक तारे (Star) की उम्र (Age) का जिसकी गणना करने पर वैज्ञानिकों ने पहले पाया था कि उसकी उम्र ब्रह्माण्ड (Age of universe) से भी ज्यादा है, लेकिन यह रहस्य शायद अभी सुलझा न हो. एक ताजा शोध ने इसी पहेली को सुलझाने की कोशिश की है.

सौ साल पहले से नजर में है यह तारा
खगोलविद सौ साल से इस तारे का अवलोकन कर रहे थे. यह हमारी पृथ्वी से 190 प्रकाशवर्ष दूर है. इसका नाम HD 140283 या मेथुसेलाह (Methuselah) है. माना जाता है कि यह ब्रह्माण्ड का सबसे पुराना तारा है.

20 साल पहले ही निकाली थी उम्र
साल 2000 में खगलोविदों ने यूरोपीय स्पेस एजेंसी के हिपार्कोस सैटेलाइट का उपयोग कर उसकी उम्र जानने की कोशिश की और पाया कि इसकी उम्र 16 अरब साल की होनी चाहिए. इस उम्र से उन खगोलविदों से सहित सभी को हैरानी हुई क्योंकि खुद ब्रह्माण्ड की उम्र वैज्ञानिकों ने कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB) के आधार पर 13.8 अरब साल निकाली है.



खड़ा हुआ बड़ा सवाल
इस गणना को देखते हुए मेथुसेलाह की उम्र से एक समस्या खड़ी कर दी क्योंकि इससे तारा ब्रह्माण्ड से पुराना साबित हो रहा था. यह बहुत उलझाने वाली बात थी क्यों कि यह नामुमकिन है कि एक तारे की उम्र खुद ब्रह्माण्ड से दो अरब साल से ज्यादा हो.

Space
वैज्ञानिक इस तारे का अध्ययन 100 सालों से कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)


11  अलग आंकड़ों का किया अध्ययन
पेनसिल्वेनिया स्टेटे यूनिवर्सिटी के खगोलविद होवर्ड बॉन्ड और उनके साथियों ने 11 अलग अलग आंकड़ों का अध्ययन किया जो कि हबल टेलीस्कोप के फाइन गाइडेंस सेंसर्स ने साल 2003 से 2011 के बीच रिकॉर्ड किए थे. इससे उन्होंने तारों की स्थिति, दूरी और ऊर्जा का अवलोकन किया.

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उम्र निकालने में सटीक दूरी जरूरी
बॉन्ड ने स्पेस को बताया, “HD 140283 की उम्र की अनिश्चितता का सबसे बड़ा पहलू यह था कि उसकी और पृथ्वी के बीच की दूरी का सही अनुमान हो क्योंकि सही दूरी से ही सटीक चमक का आंकलन हो सकता है जिससे तारे की उम्र का पता चलता है. ज्यादा चमकीला तारा ज्यादा युवा होता है.”

कैसे पता लगाई दूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि वे पैरेलैक्स पद्धति का उपयोग कर रहे थे जिसमें तारों की दूरी छह महीने की अंतर पर आंकी जाती है. इसमें तारे की स्थिति पृथ्वी की सूर्य की परिक्रमा के कारण कितनी बदलती है यह देखा जाता है. इसी से तारे की पृथ्वी से दूरी पता चलती है.

और ऑक्सीजन की मात्रा भी तो
इसके अलावा एक और तथ्य पर भी शोधकर्ताओं का ध्यान था. बॉन्ड ने बताया कि अन्य पहलुओं की तुलना में यह भी काफी अहम था कि तारे में ऑक्सीजन की मात्रा कितनी है. HD 140283 में ऑक्सीजन और लोहे का अनुपात जितना पहले अनुमान लगाया गया था उससे ज्यादा निकला है. चूंकि कुछ लाखों साल पहले ब्रह्माण्ड में ऑक्सीजन बहुत ही कम हुआ करती थी, इससे साफ जाहिर है कि खगोलविदों का मेथुसेलाह की उम्र खगोलविदों के पुराने अनुमान से कम होनी चाहिए.

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इस समय ब्रह्माण्ड की उम्र कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड पद्धति से निकाली गई मान्य है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


फिर भी ज्यादा उम्र
बॉन्ड और उनके साथियों ने HD 140283 की उम्र 14.46 अरब साल निकाली जो अब भी ब्रह्माण्ड की उम्र से काफी ज्यादा है. लेकिन शोधकर्ताओं ने 0.8 अरब साल का अंतर रखा है. जिससे तारे की उम्र ब्रह्माण्ड की उम्र के आसपास ही ठहरती है.

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यूके में बर्मिंघम की एस्टन यूनिवर्सिटी के भौतिकविद रॉबर्ट मैथ्यूज का कहना है कि इस तरह की सभी आंकलनों में रैंडम और सिस्टमैटिक त्रुटियों की संभावना होती है. इस अंतर को देखते हुए तो अंतर (Margin) की सीमाओं में ही इस विवाद का समाधान हो सकता है. इसके बाद भी मैथ्यूज सहित कई वैज्ञानिकों का मानना है कि उम्र चाहे ब्रह्माण्ड की हो या तारों की यह आज भी एक अनसुलझा मामला है.
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