जानिए वैज्ञानिकों ने कैसे खोजे पुरातन पृथ्वी जैसे ग्रह के अवशेष

पृथ्वी जैसे ग्रह (Earth Like Planet) के ये अवशेष कुछ सफेद बौने तारे (White dwarf) में देखे गए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सफेद बौने तारों (White Dwarf Star) का अध्ययन करते हुए शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के जैसे ग्रह (Earth like planet) के अवशेष पाए हैं.

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    हमारे वैज्ञानिक और खगोलविद पृथ्वी (Earth) से बाहर जीवन के संकेत (Extra-terrestrial life) शिद्दत से तलाश करते रहे हैं. उनका उद्देश्य पृथ्वी के वैकल्पिक स्थान की तलाश ही नहीं है, बल्कि जीवन की उत्पत्ति (Origin of life) को समझना भी है जिससे वे उसके कई रहस्य तलाश सकें. वैज्ञानिकों का विश्वास है ब्रह्माण्ड (Universe) में एक नहीं ऐसे बहुत से ग्रह (Planets) हैं जहां पृथ्वी की तरह जीवन हो सकता है. लेकिन शायद यह पहली ही बार होगा जब शोधकर्ताओं ने किसी ऐसे ग्रह के अवशेष (Remnants) खोजे हैं जो खत्म होने से पहले पृथ्वी की तरह था.

    कौन से अवशेष मिले
    यूनिवर्सिटी ऑफ वार्विक के खगोलविदों ने ऐसा ग्रह के अवशेष खोजे हैं जिसकी पर्पटी (Crust) पृथ्वी की ही तरह थी, लेकिन अब वह अस्तित्व में नहीं है. शोधकर्ताओं ने कुछ लंबे समय पहले खत्म हुए इस ग्रह के कुछ वाष्पीकृत अवशेष पाए हैं. ये अवशेष चार सफेद बौने तारों के वायुमंडल में पाए गए हैं. माना जा रहा है कि यह ग्रह इन्हीं तारे के पास रहा होगा.

    पृथ्वी और मंगल की तरह
    वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन अवशेषों से इस ग्रह के उन दिनों की जानकारी मिल सकती है जब यह अपने तारे का चक्कर लगा रहा होगा. शोधकर्ताओं को विश्वास है कि इन अवशेषों वाले पथरीले ग्रह की पर्पटी पृथ्वी और मंगल की पर्पटी की जैसी ही रही होगी. पर्पटी के अध्ययन से ग्रहों की रासायनिक जानकारी हासिल की जा सकती है.

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    शोधकर्ताओं को एक हजार सफेद बौने तारे (White dwarf) में से कुछ तारों मे असामान्य संकेत मिले. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    सफेद बौने तारों में से एक
    यह संभवतः अब तक खोजा गया सबसे पुराना तारा सिस्टम है. पिछले सप्ताह ही नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए आंकड़े यूरोपीय स्पेस एजेंसी के गीगा टेलीस्कोप से जुटाए गए थे. इस संग्रह में एक हजार से अधिक सफेद बौने तारे थे लेकिन इनमें से एक से असामान्य संकेत मिल रहे थे. सफेद बौने तारे वे तारे होते हैं जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव होते हैं और उनका जीवन चक्र पूर्ण होने वाला होता है.

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    स्पैक्ट्रोस्कोपी से तत्वों की पहचान
    शोधकर्ताओं ने स्पैक्ट्रोस्कोपी का उपयोग करते हुए इस सफेद बौने तारे का अध्ययन प्रकाश के अलग अलग तरंगदैर्ध्य पर  किया. शोधकर्ता इससे यह पता लगा सके कि इन तारों में मौजूद तत्व कौन से हैं. उन्हें स्पैक्ट्रम में इन प्रकाश की वे तरंगदैर्ध्य गायब मिले जिनकी तरंगे ये तत्व अवशोषित करते हैं. असामान्य संकेतों के अध्ययन से पता चला कि यह लीथियम की वजह से था.  वहीं पास के सफेद बौने से पौटेशियम तत्व के संकेत आते दिखे.

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    सफेद बौने तारे (White dwarf) में वहीं तत्व दिखे जो पृथ्वी की पर्पटी में पाए जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    कैसे पता चला पृथ्वी की तरह था वह
    दोनों तत्वों की मात्रा की और उनके साथ सोडियम और कैल्शियम के अनुपात की तुलना करने पर शोधकर्ताओं को पता चला कि यह पृथ्वी के अनुपात जैसा है. अध्ययन से शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि बीस लाख साल पहले जब यह ग्रह सिमट कर खत्म हुआ था तब इसकी पर्पटी वाष्पीकृत हो गई होगी और  तारे की बाहरी गैसीय परतों के साथ गायब हो गई होगी.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि ये तत्व बहुत अहम हैं क्योंकि ये ज्यादातर किसी ग्रह की पर्पटी में पाए जाते हैं. शोधकर्ताओं ने आंकलन किया कि सफेद बौने तारों की बाहरी परतों में पत्थरों के अवशेषों की मात्रा करीब 3 लाख गीगाटन होगी. इससे पता चला कि ये ग्रह के टुकड़े होंगे.

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