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खगोलविदों को मिले मिलते-जुलते पृथ्वी और सूर्य, उत्साह जगा रही है यह खोज

यह हमारे सौरमंडल के शुरुआती हालातों को दर्शाता है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

यह हमारे सौरमंडल के शुरुआती हालातों को दर्शाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खगोलविदों ने ऐसा बाह्यग्रह (Exoplanet) और उसका तारा खोजा है जो हमारी पृथ्वी (Earth) और सूर्य (Sun) से बहुत मिलता जुलता है. यह खोज वैज्ञानिकों को बहुत उत्साहित कर रही है.

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नई दिल्ली:  हमारे सौरमंडल (Solar System) के बाहर के बाहर अब तक वैज्ञानिकों को कई पृथ्वी जैसे ग्रह (Earth Sized Planets) मिले हैं. लेकिन इस बार खगोलविदों को लगता है कि उन्होंने पृथ्वी (Earth) जैसे ग्रह के साथ हमारे सूर्य (Sun) जैसा उसका सूर्य ढूंढ लिया है. दोनों ही हमसे तीन हजार प्रकाशवर्ष दूर हैं. इस अध्ययन को करने वाले शोधकर्ताओं के उत्साह के पीछे कई कारण हैं

दोनों के बीच की दूरी भी पृथ्वी-सूर्य जितनी
इस ग्रह का नाम KOI-456.04 है जो केप्लर 160 नाम के तारे का चक्कर लगा रहा है. दोनों के बीच की दूरी वैसी ही है जैसी हमारे सूर्य और हमारी पृथ्वी की है. यह ग्रह हमारी पृथ्वी के दोगुने आकर से थोड़ा छोटा है. इस ग्रह को उसके तारे से उतना ही प्रकाश मिल रहा है जितना की पृथ्वी को सूर्य से. यह दूरी उस ग्रह पर तापमान इस तरह का रख सकती है जिससे वहां जीवन पनपने के अनुकूल हालात बन सकते हैं.  इस ग्रह की खोज गौटिंगेन के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट की सोलर सिस्टम रिसर्ट टीम ने की है.

इस ग्रह का एक साल भी है पृथ्वी के जैसा
इस ग्रह के बारे में सबसे खास बात उसकी हैबिटेबल जोन है यानि उसकी कक्षा ऐसी है जिसकी वजह से उसकी सतह का तापमान ऐसा हो सकता है जिससे तरल पानी के होने की संभावना ज्यादा होती है. जैसा की हमारी पृथ्वी के साथ है. यह ग्रह अपने तारे का चक्कर 378 दिनों में लगाता है. यह संभवतः पहला ऐसा ग्रह है जिसका एक साल हमारी धरती के इतने नजदीक है.

Earth
फिलहाल पृथ्वी की तरह जीवन के अनुकूल परिस्थितियां किसी दूसरे ग्रह पर नहीं हैं.


नया तरीका अपनाया शोधकर्ताओं ने
इस शोध की अगुआई रेने हेलर ने की है. हेलर और उनके साथियों ने इस खोज के लिए नया तरीका अपना है.  उन्होंने तारे के प्रकाश वक्र में उछाल नहीं देखा, उन्होंने केप्लर 160 की चमक में विविधताओं का विस्तृत मॉडल बनाया. इस तकनीक से उस तारे के चौथे ग्रह के बारे में पता चल गया जो अब तक खगोलविदों से अनजान था.

तारा भी सूर्य के जैसा दे रहा है ग्रह को हालात
यह केप्लर 160 तारा दूसरे बाह्यग्रहों के केंद्रीय तारों की तरह प्रकाश तो उत्सर्जित करता ही है, लेकिन वह इंफ्रारेड विकरण भी उत्सर्जित करता है. यह तारा सूर्य के मुकाबले छोटा और कम चमकीला है.  यह लाल ड्वार्फ तारों की श्रेणी में आता है. केप्लर 160 की  सतह का तापमान हमारे सूर्य की सतह के तापमान से 300 डिग्री कम है. यदि उस ग्रह का भार बहुत ज्यादा नहीं हुआ और उसमें ग्रीनहाउस प्रभाव हो, भले ही पृथ्वी की तरह मजबूत ना सही, तो संभावना है कि उसकी सतह का तापमान अच्छा हो सकता है. शायद हमारे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के जैसे.

लेकिन अंतर भी है कुछ
केप्लर 160 और KOI 456.04 दोनों ही हमारी पृथ्वी और हमारे सूर्य से काफी मिलते जुलते हैं, लेकिन उनके सौरमंडल में और हमारे सौरमंडल में काफी अंतर है. इन सुदूर सौरमंड में तीन में दो अंदर के ग्रह पृथ्वी से बहुत भारी हैं. एक तो नेप्च्यून जितना बड़ा है. यह भी मुमकिन हो कि KOI 456.04 बड़ी पृथ्वी न हो कर छोटा नेप्च्यून हो.

Sun
अब तक दिखे बाह्यग्रहों के सूर्य बहुत अलग थे, लेकिन यह तारा हमारे सूर्य की तरह ही ग्रह को प्रकाश देता है.


क्यों खास है यह अध्ययन
यह अध्ययन बहुत अहम है क्योंकि अब तक खोजे गए सभी छोटे बाह्यग्रह ( जो पृथ्वी के दोगुने से छोटे हैं) जो एम ड्वार्फ तारे के चक्कर लगाते हैं, ये एम ड्वार्फ तारे भी लाल ड्वार्फ तारे होते हैं, लेकिन ज्यादा ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं. इस वजह से उनके पास पाए गए पृथ्वी जैसे ग्रहों में जीवन की अनुकूलता की संभावना कम होती है, क्योंकि उनकी सतह का तापमान ज्यादा होता है.  और उन ग्रहों में तापांतर भी बहुत ज्यादा होता है. लेकिन ज्यादा चमकीले K और G ड्वार्फ तारे जैसे कि हमारा सूर्य जीवन की संभावना वाले ग्रहों के तारे होने के लिए ज्यादा अनुकूल हैं.

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