वैज्ञानिकों ने देखा अब तक का सबसे चमकीला, तेज FBOT, जानिए क्या है यह

वैज्ञानिकों ने देखा अब तक का सबसे चमकीला, तेज FBOT, जानिए क्या है यह
यह अपने तरह का पहला एफबोट है जो देखा गया है. (प्रतीकात्मक फोटो)

खगोलविदों (Astronomers) ने एक अलग ही तरह का एफबॉट (FBOT) देखा है जो अब तक का सबसे तेज, चमकीला और भारी है.

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नई दिल्ली: हमारे ब्रह्माण्ड में कई घटनाएं क्षणिक होती हैं. ये घटनाएं सधारण घटनाएं नहीं होतीं. इनसे हमें कई ऐसी जानकारी मिलती है जिससे ब्रह्माण्ड के कई रहस्य सुलझ सकते हैं. गुरुत्व तरंगें की पुष्टि भी ऐसी ही घटना से हो पाई थी. अब खगलोविदों ने एक नई खगोलीय क्षणिक (Astronomical Transient) घटना का पता लगाया है जो रेडियो तरंगों के अनुसार अब तक की देखी गई  सबसे तेज, सबसे भारी और सबसे चमकदार घटना है.

क्या होते हैं ये ट्रांजिएंट
ये एक घटना या वे पिंड होते हैं जो कुछ ही समय के लिए अस्तित्व में होते हैं. इनका अस्तित्व कुछ सेकेंड, सप्ताह या फिर सालों में सिमटा हो सकता है. लेकिन यह समय विशाल तारे, गैलेक्सी आदि के विकास के समय के मुकाबले क्षणिक ही होता है. इन घटनाओं में तारे का विस्फोट, गामा किरणों का विस्फोट, सुपरनोवा, नोवा आदि शामिल हैं.

तो कौन सा ट्रांजिएंट है यह
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में हुए शोध के मुताबिक रेडियो और एक्स रे तरंगों के स्तर पर पकड़ी गई यह तीसरी फास्ट ब्लू ऑपटिकल ट्रांजिएंट (FBOT) है. एफ-बॉट एक तरह के ब्रह्माण्डीय विस्फोट होते हैं. ये इतने ज्यादा गर्म होते हैं कि यह नीले रंग के दिखाई देते हैं. शोध के अनुसार एफ-बॉट कुछ ही दिनों में अपनी परम चमक तक पहुंच जाते हैं और तेजी से धुंधले पड़ जाते हैं.



neutron star
शोधकर्ताओं की इस तरह के एफबॉट की उम्मीद नहीं थी.(प्रतीकात्मक फोटो)


इस एफ-बॉट को CRTS-CSS161010 नाम दिया गया है. शोधकर्ताओं यह सुनिश्चित करने में तो सफल रहे हैं कि यह एफ-बॉट है, लेकिन उसके होने की वजह के बारे में उन्हें जानकारी नहीं मिल सकी है. वे यह नहीं जान सके हैं कि यह तेजी से क्यों चमका और फिर उतनी ही तेज गति से क्यों धुंधला पड़ गया.

ऐसा पहले नहीं देखा गया
इस एफ-बॉट ने प्रकृति गका सबसे तेज बहिर्प्रवाह निकाला है. इसमें से निकलने वाली गैस और कणों में से 55 प्रतिशत प्रकाश की गति से निकले. शोध के पहले लेखक और नॉर्थवेस्टर्न के डैनी कोपेजान्स ने कहा, “यह बिलकुल अप्रत्याशित था, हम शक्तिशाली ऊर्जा विस्फोटों के बारे में जानते है कि वे प्रकाश की गति से पदार्थ उत्सर्जित कर सकते हैं. ऐसा खास तौर पर गामाकिरणों के प्रस्फोट में होता है, लेकिन वे भी केवल कम मात्रा में पदार्थ उत्सर्जित करते हैं. लगभग सूर्य के दस लाखवें हिस्से के बराबर. लेकिन यह तो नए ही तरह का ट्रांजिएंट है.

सोचा नहीं था किसी और कारण से होगा यह प्रस्फोट
इस अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका और नॉर्थवेस्टर्न के विनबर्ग कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस में फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी की प्रोफेसर राफाएला मारगुटी ने कहा, “हमने सोचा था कि हम जानते हैं कि अंतरिक्ष में सबसे तेज विस्फोट कैसे होते हैं. हमें लगता था कि ऐसा केवल दो ही प्रकार से संभव है. या तो दो बड़े तारों का विलय हो जाए जिससे गामा विकिरणों का प्रस्फोट हो जाए या फिर दो न्यूट्रॉन तारों का विलय हो जाए. हमें लगा कि यह घटना भी वही है, लेकिन इस शोध से हमें पता चला कि इन प्रस्फोटों का एक तरीका और है.

Neutron stars collision
इससे पहले इतनी अधिक मात्रा में बहिर्प्रवाह कभी नहीं देखा गया. (प्रतीकात्मक फोटो)


इससे पहले अब तक का सबसे चमकीला और तेज एफ-बॉट AT2018COW है जिसे द काउ के नाम से पुकारा जाता है. यह एक विरली घटना है जो ब्लैकहोल या एक न्यूट्रॉन स्टार के पैदा होने के समय होती है. लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्रह्माण्ड में एक नया जानवर है और वह भी उतनी ही ऊर्जा वाली परिघटना पैदा कर रहा है.
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