Black Hole को पहली बार पलक झपकाते देखा खगोलविदों ने

Black Hole को पहली बार पलक झपकाते देखा खगोलविदों ने
इस ब्लैकहोल के कोरोना की चमक उम्मीद ज्यादा तेजी से कम ज्यादा होती है. (Photo-Twitter NASA JPL)

वैज्ञानिकों ने पहली बार ब्लैकहोल (Black Hole) के पास कोरोना (Corona) की चमक (Glow) में तेजी से बदलाव देखे जैसे कि वह पलक झपक (Blinking) रहा हो.

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ब्लैकहोल (Black Hole) आज भी हमारे लिए एक रहस्य हैं. वे चमकते नहीं हैं बल्कि उनकी आसपास चमकने वाले पिंड (Objects) से ही उनके बारे में जानकारी मिलती है. उनके गुरुत्व के बचकर प्रकाश तक निकल नहीं सकता. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने एक ब्लैकहोल के पास अजीब सी गतिविधि देखी है. उन्होंने इस ब्लैकहोल के आसपास की चमक (Glow) को गायब होकर फिर से वापस आते देखा है जैसे की उसने पलक झपकी (Blinking) हो.

क्या होते हैं ब्लैकहोल
ब्लैकहोल का गुरुत्व बहुत शक्तिशाली होता है. वे प्रकाश तक को खींचने की क्षमता रखता है, लेकिन एक दूरी के बाद उनके पास की चीजें उनके अंदर तक नहीं खिंच पातीं, लेकिन गुरुत्व के प्रभाव के कारण तेजी से उनका चक्कर जरूर लगाती हैं. जैसे उपग्रह पृथ्वी के अंदर गिरने के बजाए उनका चक्कर लगाते हैं. इन्हीं चीजों की चमकने से ब्लैकहोल की उपस्थिति का आभास होता है. यानि बहुत सी चीजें अगर किसी दिखाई न देने वाले केंद्र का चक्कर लगा रही हैं तो समझ लीजिए वे ब्लैकहोल का चक्कर लगा रही हैं.

क्या है यह घटना
जिस ब्लैकहोल की बात हो रही है वह हमसे 27.5 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है और उसका भार हमारे सूर्य से 1.9 करोड़ गुना ज्यादा है. वह 1ES1927+654 गैलेक्सी के केंद्र में हैं. इसके आसपास के एक क्षेत्र जिसे कोरोना कहते हैं, 40 दिन में एक बार अपनी चमक खो देता है और उसकी चमक फिर लौट आती है और लौटने के बाद यह चमक ज्यादा बढ़ी हुई होती है. यह अध्ययन एस्ट्रोफिजिकल जर्नल ऑफ लेटर्स में प्रकाशित हुआ है.



ऐसा पहले कभी नहीं सुना
मैसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉडी की भौतिकविद एरीरन कारा का कहना है कि इस चमक में करोड़ों अरबों साल के समय में बदलाव हो सकता है, लेकिन इस ब्लैकहोल में एक साल दस हजार बार या फिर आठ घंटों में सौ बार तक बदलाव हो सकता है. ऐसा पहले कभी नहीं सुना गया और यह तो विलक्षण है.





क्या होता है ब्लैकहोल के आसपास
ब्लैकहोल के पास के इलाके में बहुत कुछ होता है. इसमें सबसे खास होता है वह क्षेत्र या सीमा जिसे इवेंट होराइजन कहते हैं यानि जिसके पार कुछ भी, यहां तक कि प्रकाश भी चला जाए तो  वह बाहर नहीं आ सकता.  इसके अलावा एक सक्रिय ब्लैक होल के पास, यानि इवेंट होराइजन से भी दूर एक्रीशन डिस्क होती है. यह डिस्क उन पदार्थों से मिल कर बनी होती है जो बहुत तेजी से ब्लैकहोल की परिक्रमा लगा रहे होते हैं. जैसे पानी के भंवर के आसपास का पानी तेजी से चक्कर लगाता दिखाई देता है. ब्लैकहोल के इवेंट होराइजन के बाहर एक्रीशन डिस्क के अंदरूनी किनारे को कोरोना कहते हैं.

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क्या खास बात होती है इस कोरोना में
यह इलाका बहुत ही गर्म इलेक्ट्रॉन से मिलकर बना होता है जिस पर ब्लैकहोल के मैग्नेटिक फील्ड से शक्ति मिलती है. यह एक सिंक्रोटॉन की तरह होता है जो इलेक्ट्रोन का त्वरण इतना बढ़ा देता है कि उस उच्च ऊर्जा से उससे एक्स रे की वेवलेंथ की चमक निकलने लगती है.

Black Hole
ब्लैकहोल की स्पिन की गति नहीं निकाली जा सकती थी, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसका तरीका निकाल लिया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे आती जाती है यह चमक
खगोलविदों ने पहली बार 1ES 1927+654 में इस अजीब घटना को साल 2018 में देखा था. ऑल स्काय ऑटोमेटेड सर्वे फॉर सुपरनोवा (ASASSN) आकाश में अचानक दिखने वाली चमक को ढूंढ रहा था. इस सर्वे ने एक बहुत ही ज्यादा  बड़ी चमक को अपने स्वाभाविक चमक से 40 गुना ज्यादा चमकते देखा. इसके करीब 160 दिन बाद यह चमक कम होने लगी और 40 दिन बाद यह गायब ही हो गई. कारा के मुताबिक ऐसे खगोलविदों ने कभी नहीं देखा कि ब्लैकहोल का कोरोना देखते ही देखते गायब हो गया हो. इसके बाद उस कोरोना की चमक 300 दिन के बाद अपने शुरुआती तीव्रता में लौट आई. लेकिन इस बार वह पहले से 20 गुना ज्यादा चमक रही थी.

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इस घटना के कारणों पर वैज्ञानिक अभी किसी निर्णायक मत नहीं पहुंचे हैं. हो सकता है कि यह ब्लैकहोल की मैग्नेटिक फील्ड के कारण हो, जिसमें एक तारे का ब्लैकहोल के कारण फटने की प्रक्रिया से कोरोना पर प्रभाव पड़ रहा हो. या यह भी हो सकता है कि यह एक सामान्य घटना हो लेकिन अब तक किसी का इस पर ध्यान नहीं गया हो.
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