सौर ज्वाला की प्रक्रियाओं का बना खास मॉडल, मिलेगी अब ज्यादा जानकारी

सौर ज्वाला की प्रक्रियाओं का बना खास मॉडल, मिलेगी अब ज्यादा जानकारी
सौर ज्वालाओं के बारे में अब तक स्वसंगत मॉडल नहीं बन सका था जो बन गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सौर ज्वाला (Solar Flares) को पृथ्वी से अवलोकित करना संभव नहीं है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इसकी प्रक्रियाओं का मॉडल बना लिया है.

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नई दिल्ली: हमारे सूर्य को लेकर वैज्ञानिक हमेशा ही अध्ययन में लगे रहते हैं, लेकिन कई अध्ययन हमेशा ही संभव नहीं होते. कुछ अध्ययन केवल सूर्यग्रहण के समय पर मुमकिन होते हैं तो कुछ केवल तभी जब सूर्य की सतह पर खास तरह की प्रक्रियाएं चलती हैं. ऐसी है बहुत सारी प्रक्रियाएं तभी होती हैं जब सौर ज्वालाएं (Solar Flares) बनती हैं. इससे संबंधित सभी प्रक्रियाओं का एक स्वसंगत मॉडल (Self-consistent Model) अभी तक नहीं बन सका था, लेकिन अब वैज्ञानिकों को इसमें सफलता मिल गई है.

बना दिया सिम्यूलेशन मॉडल
केयू ल्यूवेन के प्लाज्मा एस्ट्रोफिजिसिस्ट ने  सौर ज्वाला के दौरान होने वाली प्रक्रियाओं का पहला स्वसंगत (Self-consistent) सिम्यूलेशन बनाने में सफलता पाई है. इसके लिए शोधकर्ताओं ने फ्लेमिश सुपरकम्प्यूटर और फिजिकल मॉडल के नए संयोजन का उपयोग किया है.

क्या होती हैं ये सौर ज्वालाएं
सौर ज्वाला सूर्य की सतह पर होने वाले वे विस्फोट हैं जो अत्याधिक मात्रा में उर्जा उत्सर्जित करते हैं. यह ऊर्जा एक ही समय में करोड़ों आणविक बम के द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा के बराबार होती है.अपने अति रूप में ये ज्वाला पृथ्वी के रेडियो संचार व्यवस्था को भी ठप्प कर सकती हैं. वे अंतरिक्ष के मौसम पर गहरा प्रभाव डालती हैं. नॉर्दर्न लाइट्स के लिए भी सौर ज्वालाओं को ही जिम्मेदार माना जाता है.



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इस अध्ययन में सुपर कमप्यूटर का उपयोग कर मॉडल बनाया गया था.


क्या करती हैं ये सौर ज्वालाएं
सौर ज्वालाओं और उससे संबंधित प्रक्रियाओं का समझने में हमारे सैटेलाइट और टेलीस्कोपों की अहम भूमिका रहा है. हम सौर ज्वाला के दौरान होने वाली प्रक्रियाओं से अच्छे से परिचित हैं. सौर ज्वाला मैग्नेटिक फील्ड से ऊर्जा को लेकर ऊष्मा, प्रकाश और चलायमान ऊर्जा में कारगरता से बदल देती है.

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इन प्रक्रियाओं को मानक 2 डी सौर ज्वाला माडल के तौर पर जाना जाता है. अबतक इस मॉडल की सविस्तार पुष्टि नहीं हुई थी क्योंकि इसका एक पूरा सुसंगत सिम्यूलेशन बनाना एक बड़ा चुनौतीपूर्ण काम था. इसकी वजह यह थी हमसे करीब हजारों किलोमीटर दूर कणों के महीन स्तर और बड़े स्तर दोनों ही पर होने वाले प्रभावों को शामिल किए जाने की जरूरत थी जो कि बहुत ही मुश्किल काम था.

क्या किया शोधकर्ताओं ने
केयू ल्यूवेन के शोधकर्ताओं ने इस काम को मुमिकन कर दिखाया है और उन्होंने इस सिम्यूलेशन को बनाने में सफलता हासिल कर ली है. इस शोध में वेंजी रुआन ने अपने साथी प्रोफेसर रोनी कैप्पन्स के साथ सिम्यूलेशन पर काम किया. शोधकर्ताओं ने फ्लेमिश सुपरकम्प्यूटर के साथ ऐसे मॉडल्स का उपयोग किया जिसमें माइक्रोस्कोपिक स्तर पर त्वरित आवेशित कणों (Accelarated charged particles) को मैक्रोस्कोपिक माडल में शामिल किया गया था. शोधकर्ता इससे सौर ज्वाला की ऊर्जा में बदलाव की कारगरता पर काम कर सके. इसके लिए उन्होंने सूर्य की ज्वाला की मैग्नेटिक फील्ड की ताकत और  उसकी गति को मिलाया. और ऐसा उन्हें कुछ सेकेंड से कुछ मिनटों में ही करना था.

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सूर्य का पृथ्वी से अध्ययन करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


इसके लिए शोधकर्ताओं ने टेसीस्कोप के आंकड़ों का भी सहयोग लिया. इसी वजह से अंततः एक वास्तविक मॉडल में बना सके जो अब तक केवल पाठ्यपुस्तकों बताया जाता था.

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सौर ज्वालाओं का पृथ्वी से अवलोकन करना बहुत ही मुश्किल है. सूर्य की तेज रोशनी की वजह से ये दिखाई नहीं देती हैं. इनका घटित होना भी कभी कभी ही होता है. लेकिन ये सौर तूफान के साथ भी पैदा हो जाती है. जब आवेशित इलेक्ट्रॉन प्लाज्मा से अंतरक्रिया करते हैं तब सौर ज्वाला निकलती है.
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