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Attack on Hindus: बांग्लादेश का वो कौन सा संगठन है, जो हिंदुओं पर कर रहा है हमला

Attack on Hindus: बांग्लादेश का वो कौन सा संगठन है, जो हिंदुओं पर कर रहा है हमला

बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना

बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना

Attack on Hindus in Bangladesh: बीते करीब 10 दिनों से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा के पीछे आखिर किसका हाथ है? आखिर लंबे समय बाद जमात संगठन क्यों सक्रिय है?

    Attack on Hindus in Bangladesh: बीते करीब 10 दिनों से बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा से भारत में रह रही बहुसंख्यक आबादी चिंतित है. वैसे तो बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का इतिहास उसकी स्थापना के साथ ही शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार की हिंसा ने एक बार फिर बांग्लादेश और भारत में एक सवाल पैदा कर दिया है कि क्या पड़ोसी देश में बेहद कट्टरपंथी सोच रखने वाले जमात संगठन पर वहां की सरकार लगाम लगाने में विफल है? या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश है जो समय-समय पर जमात को उभरने का मौका देता है.

    दरअसल, बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा हमेशा से एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा रही है. इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक साजिश चलती रही है. माना जा रहा है कि इन हमलों के पीछे जमात संगठन का हाथ है. दरअसल, हिंसा की शुरुआत कोमिल्ला (Comilla) से हुई. जहां कुछ घंटा पहले जमात ने एक बड़ी रैली की थी.

    हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के पीछे की राजनीति
    हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्टफोस्ट पर छपी अभिजीत मजूमदार की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री शेख हसीना खुद तो यह दिखाती रहती हैं कि उनको देश के कट्टरपंथियों से कुछ लेना देना नहीं है. लेकिन राजनीति के जानकार इससे पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नेता शेख मुजीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना कट्टरवाद की लगाम अपने हाथ में रखना चाहती हैं. वह जब चाहती हैं तो इसे थोड़ा ढीला कर देती हैं और फिर अपने हिसाब से उसे खींच देती हैं.

    दरअसल, इससे शेख हसीना को दोहरा फायदा होता है. वह सत्ता में रहते हुए विपक्ष का भी काम कर लेती हैं. शेख हसीना को 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने का क्रेडिट दिया जाता है. उन्हें भारत में पसंद किया जाता है, क्योंकि वह अपने देश में जिहाद की आग पर काबू पाने और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में सफल रहीं. एक इस्लामिक देश में वह खुद एक धर्मनिरपेक्ष नेता की छवि बनाने में सफल रहीं. इस छवि की वजह से उन्हें काफी फायदा मिलता है.

    प्रशासन की ढिलाई और साजिश का नतीजा?
    अपनी खुद की बेहद सख्त छवि रखने वाली शेख हसीन के शासन में हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा से कई सवाल उठे हैं. यह वही शेख हसीना हैं जो देश में अपने विरोधियों से बेहद कड़ाई के निपटती हैं, लेकिन हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़कने से नहीं रोक पा रही हैं. जानकारों का कहना है कि हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मसले पर बांग्लादेश का प्रशासन कहीं न कहीं थोड़ी लापरवाही दिखाता है.

    जमात की रैली के बाद हिंसा
    इसे केवल एक इत्तेफाक ही कहा जाएगा या फिर कुछ और कि कोमिल्ला में जमात की एक बड़ी रैली के बाद यह हिंसा भड़की. बांग्लादेश का जमात संगठन मुख्य रूप से भूमिगत है. शेख हसीना की सरकार इनके साथ कड़ाई से पेश आती है. लेकिन अचानक जमात के आईटी सेल के सक्रिय होने को इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता. इससे कई सवाल खड़े होते हैं.

    आवामी लीग का गढ़ है कोमिल्ला
    कोमिल्ला आवामी लीग का गढ़ है. यहां के स्थानीय सांसद एकेएम बहाउद्दीन बहर अभी सऊदी अरब में हज करने गए हैं. वह यहां के कद्दावर नेता हैं. उनको बड़ी संख्या में हिंदू वोट करते हैं, लेकिन उनके गढ़ में हिंदू विरोधी हिंसा का भड़कना किसी को समझ में नहीं आ रहा है. कोमिल्ला में कहा जाता है कि उनकी जानकारी के बिना ऐसी कोई घटना घट ही नहीं सकती

    Tags: Bangladesh

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