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कौन है म्यांमान की आंग सान सू की, क्यों दुनिया भर में हैं चर्चित

कौन है म्यांमान की आंग सान सू की, क्यों दुनिया भर में हैं चर्चित

आंग सान सू (Aung San Suu Kyi) को म्यांमार में चार साल की कैद की सजा दी गई है. (तस्वीर: Nadezda Murmakova _Shutterstock)

आंग सान सू (Aung San Suu Kyi) को म्यांमार में चार साल की कैद की सजा दी गई है. (तस्वीर: Nadezda Murmakova _Shutterstock)

आंग सान सू (Aung San Suu Kyi) म्यांमार (Myanmar) की लोकप्रिय नेता हैं जो दशकों से वहां लोकतंत्र (Democracy) की बहाली के लिए संघर्ष कर रही है. 1988 से शुरू हुए उनके संघर्ष में उन्हें 15 सालों से भी ज्यादा समय तक नजरबंद या जेल में रहना पड़ा. इसी तख्तापलट के बाद हाल ही में एक बार फिर सैन्य शासन ने उन्हें गिरफ्तार किया है जिससे वे एक बार फिर पूरी दुनिया में सुर्खियों में आ गई हैं.

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    म्यांमार (Myanmar) की लोकप्रिय नेता आंग सान सू (Aung San Suu Kyi) की को वहां की सैन्य सरकार ने चार साल की कैद में डाल दिया है. इस वजह से वे पूरे संसार में चर्चा का विषय बन चुकी हैं. ऐसा नहीं है कि सू की केवल इस घटना की वजह से सुर्खियों में हैं. उनका चर्चित होना उनके इतिहास संबंधित है. उन्होंने म्यांमार में दशकों तक सैन्य शासन के खिलाफ लोकतंत्र (Democracy) के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है. लेकिन फिर भी उनकी वैश्विक छवि में भी उतार चढ़ाव आए हैं. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी का सुर्खियों में आना, कहा जा सकता है, तय ही था.

    कौन हैं आंग सान सू की?
    76 वर्षीय आंग सान सू की म्यांमार में लोकतंत्र की लड़ाई लड़ने वाली नेता हैं जिन्होंने दशकों तक वहां के सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष किया है. उनके पिता आंग सान ने बर्मा की आजादी के लिए द्वितीय विश्व युद्ध में जापानियों से हाथ मिलाया था और उसके बाद 1947 में ब्रिटेन से बर्मा की आजादी की मांग की थी. उसी साल उनकी हत्या कर दी गई थी. सू की को उनकी मां ने पाला था. उन्हें बर्मी, अंग्रेजी, फ्रेंच और जापानी भाषाओं का ज्ञान है.

    इस साल फिर हुईं कैद
    1991 में उन्हें उनके इस संघर्ष के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार भी दिया गया था. उस समय वे नजरबंद थीं. साल 2015 में उन्हंने म्यांमार में 25 साल में पहली  बार हुए चुनाव में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) का नेतृत्व कर जीत हासिल की. लेकिन उन्हें साल 2021 में सेना ने तख्तापलट में हटा दिया. अब उन्हें देशद्रोह और कोविड नियमों को तोड़ने का दोषी करार देते हुए चार साल कैद की सजा सुनाई गई है.

    जीत के बाद भी नहीं बन सकीं राष्ट्रपति
    लेकिन वे म्यांमार की बौध बहुसंख्यक समुदाय में बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय बनी रहीं हैं. सू की ने 1989 से 2010 के बीच 15 साल सैन्य कैद में बिताए और उनका लोकतंत्र के लिए अत्याचारों के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल बन गया था. 2015 में जीत के बाद भी म्यांमार संविधान के कारण वे देश की राष्ट्रपति नहीं बन सकीं क्यों उनके बच्चों की नागरिकता विदेशी थी.

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    आंग सान सू (Aung San Suu Kyi) म्यांमार में बहुत अधिक लोकप्रिय नेता हैं. (तस्वीर: R. Bociaga / Shutterstock)

    सत्ता के  पास और फिर सेना का दखल
    लेकिन सू की म्यांमार की निर्विवाद रूप से सर्वोच्च नेता ही मानी जाती रही हैं. उनका आधाकारिक पद राज्य सलाहकार का रहा और 2021 के तख्तापलट से पहले तक राष्ट्रपति विन म्यिंट उनके नजदीकी साथी रहे. साल 2020 में उनकी पार्टी ने एक बार फिर भारी अंतर से बहुमत हासिल किया जो साल 2015 के मतों से भी ज्यादा था. लेकिन ताकतवर सेना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया. और संसद के पहले दिन ही सेना ने सू की को दूसरे राजनेताओं के साथ कैद कर लिया.

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    कई सालों तक विदेश में रहीं सू की
    1960 में सू की अपने मां डॉ खिन की के साथ भारत आ गईं जिन्हें दिल्ली में म्यांमार का राजदूत नियुक्त किया गया था. इसके चार साल बाद वे ऑक्सफोर्ड में पढ़ीं जहां उनकी मुलाकात माइकल एरिस से हुई जिनसे बाद में उन्होंने शादी की. इसके बाद वे जापान, भूटान में कुछ समय रहकर अपने परिवार के साथ यूके में रहने लगीं 1988 में वे अपनी बीमार मां की देखरेख के लिए यंगून वापस आईं. जब म्यांमार में राजनैतिक अस्थिरता चल रही थी.

    रोहिंग्याओं (Rohingya) की समस्या से निपटने के मामले में आंग सान सू की दुनिया में बहुत आलोचना होती रही है. (तस्वीर: Sk Hasan Ali / Shutterstock)

    लोकतंत्र के लिए नेतृत्व
    उस साल हजरों लोगों ने लोकतंत्र में सुधार की मांग के साथ जनरल नी विन के खिलाफ आंदोलन किया जिसका नेतृत्व सू की ने अपने हाथ में ले लिया. उनका शांतिपूर्ण आंदोलन दबा दिया गया और उन्हें घर पर ही नजरबंद कर दिया गया. सैन्य सरकार ने 1990 में चुनाव कराए जिसमें सू की की पार्टी को जीत  मिली लेकिन जुंटा सैन्य शासन ने उन्हें सत्ता नहीं सौंपी. इसके बाद उन्हें कई बार छोड़ा और गिरफ्तार किया गया.

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    अंतरराष्ट्रीय स्तर सू की की छवि में उतार चढ़ाव आए हैं. उनके पार्टी के शासन में म्यांमार के अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की समस्या को लेकर उनके रवैये लेकर दुनिया भर में उनकी आलोचना हुई थी. साल 2017 में जब सेना के अत्याचारों के चलते लाखों रहिंग्या पड़ोसी बांग्लादेश में शरणार्थी बन गए थे. म्यांमार में अब भी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नरसंहार का मुकदमा चल रहा है.

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