ऑस्ट्रेलिया में उल्टे पड़ गए सारे ओपिनियन पोल, जानिए क्यों?

News18Hindi
Updated: May 20, 2019, 2:17 PM IST
ऑस्ट्रेलिया में उल्टे पड़ गए सारे ओपिनियन पोल, जानिए क्यों?
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन (फाइल फोटो)

ऑस्ट्रेलिया में सारे ओपिनियन पोल ऐतिहासिक रूप से गलत साबित हुए हैं, लेकिन ऐसा हुआ क्यों?

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पिछले शनिवार को ऑस्ट्रेलिया में चुनावी जानकार और मतदाता दोनों ही तब भौंचक रह गए जब मतों की गिनती के दौरान गठबंधन ने अनपेक्षित रूप से जीत दर्ज की. जबकि इससे लगभग सारे ही ओपिनियन पोल में ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी को जीतता हुआ बताया गया था. हालांकि पोल में सामने आए चुनावी रुझानों को ऑस्ट्रेलिया की गठबंधन सरकार ने नकार दिया था. अब जो नतीजे सामने हैं, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में गठबंधन दल के दावे पर मुहर लगा दी. ऑस्ट्रेलिया में ये ओपिनियन पोल ऐतिहासिक रूप से गलत साबित हुए हैं.

लगभग सारे पोल लेबर पार्टी की जीत तय बता रहे थे
जिन बड़े ओपिनियन पोल में लेबर पार्टी की जीत की बात कही गई थी, वे थे- न्यूजपोल, यूगॉव/ गैलेक्सी, आईपीएसओएस और रीचटेल पोल्स. इनमें से ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया के ही न्यूज संगठनों के जरिए कराए गए थे. इन पोल में लेबर पार्टी को शुक्रवार रात तक इस दो दलीय प्रणाली में 51-49 से आगे दिखाया जा रहा था.

यहां तक कि शुक्रवार को जारी किया गया फेडरल ओपिनियन पोल, जो सारे ही पोल का औसत दिखाता है, उसने इन सारे ही पोल का औसत मिलाकर लेबर पार्टी को 51.7% वोट और गठबंधन को 48.3% मिलने की बात कही थी. लेकिन जब रिजल्ट आया तो यह ऑस्ट्रेलिया में सभी के लिए चौंकाने वाला था क्योंकि शनिवार शाम को आए रिजल्ट में ऑस्ट्रेलिया के चुनाव आयोग ने गठबंधन को 51% और लेबर पार्टी को 49% वोट मिले.

जबकि ऑस्ट्रेलिया में रिजल्ट का गलत होना है लगभग नामुमकिन
इसके बारे में ऑस्ट्रेलिया के ही राजनीति विज्ञानी डॉ एंडी मार्क्स ने कहा कि इससे समझ आता है कि 'मुख्यधारा के लोगों की बातें कितनी बेकार हो चुकी हैं.' हालांकि पोल से पहले ही उन्होंने मतदान के आधार पर उन्होने पहले लेबर पार्टी की जीत की बात कही थी. उन्होंने आगे कहा, 'मैं समझता हूं कि पोल के लिए यह इस देश में वाकई एक दुर्घटना का युग है.'

हम हाल के दिनों में ब्रेक्सिट और ट्रंप की जीत से अचंभे में डाल दिया था. लेकिन अमूमन ऑस्ट्रेलिया में, अनिवार्य वोटिंग और दूसरे ज्यादा स्थिर कारकों के चलते ऐसा नहीं होता. हालांकि वे सामने नहीं आ सके. दरअसल ऑस्ट्रेलिया में अनिवार्य वोटिंग के चलते मतदान के आंकड़े बिल्कुल स्थिर होते हैं. इसके अलावा वहां ओपिनियन पोल के आंकड़े IVR यानि मशीन कॉल के जरिए आम लोगों को फोन कर जुटाए जाते हैं. जिनका गलत होना नामुमकिन माना जाता है.
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तो क्या रहे पोल के गलत होने के कारण?
तस्मानिया के चुनावी विश्लेषक केविन बॉनहेम ने भी इसे पोल की बड़ी असफलता बताया है. उन्होंने लिखा कि इन नतीजों को देखकर ऐसा लगा कि पोल और रिजल्ट का हाल ऐसा था, जैसे उन्हें शीशे के सामने रख दिया गया है. (दरअसल शीशे में चीजें उल्टी दिखती हैं, और नतीजे, ओपिनियन पोल से ठीक उल्टे आए.)

रविवार को ऑस्ट्रेलिया की SBS न्यूज ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में आए सभी पोल के नतीजों में करीब 3% की गड़बड़ी देखने को मिली.

केविन बॉनहेम ने इन चुनावों में पोल के गलत होने के कुछ संभावित कारण बताए हैं-
1. सैम्पल का सही तरह से प्रतिनिधित्व न होना
2. ऐसे लोग जो राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं ऐसे लोगों का सैंपलिंग में अनुमान से ज्यादा होना
3. मतदाताओं का ओपिनियन पोल में झूठे आंकड़े पेश करना
4. कुछ छिपे कारक

इसके अलावा उन्होंने लोगों के अपना पक्ष बताने से शर्माने और फोन में खराबियों को भी वजह बताया है. हालांकि इन दोनों ही वजहों को उन्होंने हल्के में लिया है और खारिज कर दिया है.

अब स्कॉट मॉरिसन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री बने रहेंगे. पहली बार जब वे प्रधानमंत्री बने थे तो उन्हें 'एक्सीडेंटल प्राइममिनिस्टर' कहा जा रहा था लेकिन अब उन्हें ऑस्ट्रेलियाई एक और जीत के बाद असली हीरो मानने लगे हैं.

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First published: May 20, 2019, 1:12 PM IST
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