वैज्ञानिकों को मिला ऑस्ट्रेलिया का अब तक का सबसे विशाल डायनासोर जीवाश्म

ये विशाल काय जीव ऑस्ट्रेलिया में अब तक पाए गए सबसे बड़े डायनासोर (Dinosaurs) हैं. (तस्वीर: Vlad Konstantinov @Aussiedinosaurs)

ये विशाल काय जीव ऑस्ट्रेलिया में अब तक पाए गए सबसे बड़े डायनासोर (Dinosaurs) हैं. (तस्वीर: Vlad Konstantinov @Aussiedinosaurs)

वैज्ञानिकों को ऑस्ट्रेलिया (Australia) में वहां अब तक का सबसे बड़ा डायनासोर (Dinaosaur) जीवाश्म (Fossil) मिला है जो अब के खोजे गए डायनासोर में बिलकुल नई प्रजाति का है.

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कहा जाता है कि डायनासोर (Dinosaur) के युग में जीवों की जितनी विविधता थी उतनी आज के युग में नहीं थी. शायद यही वजह है कि हमारे वैज्ञानीकों बार बार नई प्रजाति के डायनासोर के जीवाश्म (Fossils) मिल रहे हैं. इस बार ऑस्ट्रेलिया (Australia) में वैज्ञानिकों ने उस क्षेत्र में अब तक का पाया गया सबसे बड़ा डायनासोर जीवाश्म पाया है. यह एक बड़ी खोज मानी जा रही है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में डायनासोर के जीवाश्म आसानी से नहीं मिलते हैं.

कितना लंबा चौड़ा

पियरजे जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार ऑस्ट्रेलियोटाइटन या साउदर्न टाइटन एक लंबी गर्दन वाला टाइटनोसॉरियन है जिसकी लंबाई 25- 30 मीटर है जबकि उसकी  ऊंचाई 5-6.5 मीटर है. इनका भार 1400 लाल कंगारुओं के बराबर हुआ करता था. ये महाविशालकाय जीव दक्षिण पश्चिम क्वीन्सलैंड के इलाके में 9.2 से 9.6 करोड़ साल पहले रहा करते थे.

 दुनिया से अलग तरह के इलाके में
ऑस्ट्रलिया उस जमाने में ऑस्ट्रेलिया एंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था और ये जीव उन आखिरी डायनासोर में से एक थे. ऑस्ट्रेलियोटाइटन यहां पाए गए डायनासोर में सबसे बड़े जीव हैं. क्वींसलैंड के तटवर्ती इलाकों से बहुत अंदर के मैदानों में डायनासोर के जीवाश्म मिले हैं. दुनिया के बाकी जीवाश्म मिलने वाली जगहें पहाड़ोंस गहरी खाई या ऊबड़ खाबड़ इलाकों में मिलती हैं.

डायनासोर का दस्तावेजीकरण

जहां ऑस्ट्रेलियोटाइटन रहा करते थे आज वहां तेल, गैस और चारागाह वाले इलाके हैं. यह अध्ययन इस जीवाश्म वाले इलाके से डायनासोर का दस्तावेजीकरण का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है. ऑस्ट्रेलियोटाइन के पहली हड्डियां साल 2006 से 2007 में क्वींसलैंड और इरोमैग्ना नेचरल हिस्ट्री म्यूजियम के जीवाश्म विज्ञानी और स्वयंसेवियों ने किया था.



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इतने विशाल टाइटनसोर (Titanosaur) का जीवाश्म ऑस्ट्रेलिया में पहली बार मिला है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हर हड्डी का अध्ययन जरूरी

जिस जीवाश्म को वैज्ञानिकों ने खोजा था उसे कूपर नाम दिया गया जो पास की कूपर क्रीक इलाके में मिला था उत्खनन के बाद शोधकर्ताओं ने चट्टान से कूपर की हड्डियों को निकलने का लंबा और कठिन कार्य किया. यह कार्य शोधकर्ताओं के लिए बहुत जरूरी था जिससे वे हर हड्डी की पूरी पहचान कर सकें.

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बिलुकल नई प्रजाति

शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्हें कूपर ही हड्डियों की ऑस्ट्रेलिया और दुनिया भर में पाए जाने वाले सॉरोपॉड डायनासोर की अन्य प्रजातियों से तुलना करनी पड़ी जिससे वे यह सुनिश्चित कर सकें कि यह वाकई में एक नई प्रजाति है. लेकिन दुनिया भर के म्यूजियम में जाकर सैकड़ों किलो के नाजुक डायनासोर हड्डियों की तुलना करना  संभव नहीं था.

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ऑस्ट्रेलिया में चार तरह के सॉरोपॉड (Sauropod) डायनसोर के जीवाश्म मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

इस तकनीक से मिली मदद

शोधकर्ताओं ने इसकी जगह थ्रीडी स्कैनिंग तकनीक का उपयोग किया जिससे वे अप्रत्यक्ष रूप से हजारों किलो की डायनासोर की हड्डियों को एक साथ किलो के लैपटॉप में समेट कर ला सके. इस तरह के शोध परियोजनाओं ने म्यूजियम और शोधकर्ताओं को दूसरे शोधकर्ता और लोगों के साथ अपने अनोखे संग्रह को वैश्विक स्तर पर साझा करने का मौका दिया है.

डायनासोर नहीं, स्तनपायी प्रजातियों में आपस में ही रहती थी प्रतिस्पर्धा- शोध

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में सभी चार सॉरोपॉड डायनासोर की पता लगा लिया जो ऑस्ट्रलिया में 9.2 से 9.6 करोड़ साल पहले रहा करते थे. ये एक दूसरे नजदीकी तौर पर संबंधित तो थे, लेकिन वे एक ही समय पर एक ही जगह पर नहीं कभी मौजूद नहीं रहे. इसका साफ मतलब है कि वे अगल अलग आवासों में विकसित हुए और संभवतः कभी मिले भी नहीं. ऑस्ट्रेलिया की प्रजाति दक्षिण अमेरिका और एशिया के टाइटनोसारियन से संबंधित भी हैं जिससे पता चलता है कि वे अंटार्कटिका के जरिए दक्षिण अमेरिका में ग्लोबल वार्मिंग के दौर में फैल पाए.

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