यूपी से ताल्लुक रखने वाला वो ईरानी, जिसके कारण ईरान-अमेरिका में हुई कट्टर दुश्मनी

यूपी से ताल्लुक रखने वाला वो ईरानी, जिसके कारण ईरान-अमेरिका में हुई कट्टर दुश्मनी
अयातुल्लाह खामैनी 80 के दशक में ईरान के सबसे ताकतवर शख्स बनकर उभरे

ईरान के सबसे असरदार धर्मगुरु अयातुल्लाह खामनेई का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से था. उनके दादा कभी यहां रहते थे. यहां से वो ईरान गए तो वहीं बस गए. 16 साल के निर्वासन के बाद खामनेई जब वापस ईरान लौटे तो वो वहां से सबसे ताकतवर शख्स बन गए. इसी के साथ ईरान और अमेरिका की दुश्मनी भी बढ़ती चली गई

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2020, 6:02 PM IST
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आप बेशक हैरान हो सकते हैं कि ईरान (Iran) ये सबसे बड़े धर्मगुरु अयातुल्लाह खामनेई (Ayatollah Khomeini ) के दादा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के थे. यहीं से वो ईरान गए और वहीं बस गए. ईरान और अमेरिका (America) के बीच कट्टर दुश्मनी के नायक वही थे. जब वो ईरान में क्रांति कर रहे थे तो उन्हें इसी वजह से उन्हें भारतीय मुल्ला और ब्रिटिश एजेंट भी कहा गया. असल ये अयातुल्लाह ही थे, जिसके कारण ईरान से अमेरिका की खटकी और फिर लगातार वही स्थिति बनी हुई है.

अयातुल्लाह खामनेई के दादा सैयद अहमद मसूवी हिंदी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले थे. 1830 के दशक में अवध के नवाब के साथ वह एक धार्मिक यात्रा पर इराक गए. वहां वह ईरान के खुमैन गांव में बस गए. इसलिए एक पीढ़ी बाद उनका सरनेम  खामनेई हो गया. वो बाराबंकी के किन्तूर गांव से ताल्लुक रखते थे. आमतौर पर ये शांत गांव है.

1978 में ईरान के सरकारी अखबार में खामनेई को ईरान सरकार ने "भारतीय मुल्ला" और "ब्रिटेन का एजेंट" लिखा. उन्हें आशिकाना "गजलों में खोया रहने वाला बुड्ढा" कहा गया. इस लेख के छपने के बाद ईरान की जनता भड़क गई.



ईरान के शाह ने देश से निकाल दिया



अयातुल्लाह रुहोल्लाह  खामनेई इस्लामिक नेता थे. वह शाह के मुखर विरोधी थे. लेकिन असली कहानी शुरू हुई 1963 में, जब मोहम्मद रजा शाह पहलवी ने श्वेत क्रांति का ऐलान किया. ये एक छह सूत्री कार्यक्रम था. ये सुधार पश्चिम की नीतियों पर आधारित थे. इन सुधारों का विरोध होने लगा. खामनेई इस विरोध की अगुआई कर रहे थे. 1964 में शाह ने खामनेई को देश निकाला दे दिया.

जनता से मिलते हुए अयातुल्लाह  खामनेई. उनके देश लौटते ही ईरान के रिश्ते अमेरिका से बिगड़ने लगे


 खामनेई की थी मौलवियों पर पकड़
शाह पहलवी पश्चिमी नेताओं के साथ कई बार पार्टियां करते थे. ऐसी एक पार्टी को खामनेई ने शैतानों की पार्टी कहा था. 1973 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी हुई. ईरान की अर्थव्यवस्था और शाह की श्वेत क्रांति के ख्वाब चरमरा गए. मौलवियों ने इस दौरान श्वेत क्रांति को इस्लाम पर चोट कहा. मौलवियों को  खामनेई निर्देश दे रहे थे.

सितंबर 1978 में तेहरान के शाहयाद चौक पर लाखों लोग इकट्ठा होकर शाह के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे. शाह ने आक्रोश को दबाने के लिए मार्शल लॉ लागू किया. जनवरी 1979 तक ईरान में गृहयुद्ध के हालात हो गए. प्रदर्शनकारी खामनेई का निर्वासन खत्म करने की मांग करने लगे.

जब  खामनेई वापस ईरान लौटे
16 जनवरी 1979 को शाह परिवार समेत ईरान छोड़ अमेरिका चले गए. शाह ने भागने से पहले विपक्षी नेता शापोर बख्तियार को प्रधानमंत्री बना दिया था. नए प्रधानमंत्री ने खामनेई को वापस आने की इजाजत दे दी. 12 फरवरी 1979 को खामनेई फ्रांस से ईरान लौटे. लाखों की भीड़ ने उनका स्वागत किया.

खामनेई ने बख्तियार सरकार को मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने ऐलान किया कि वह सरकार बनाएंगे. 16 फरवरी को उन्होंने मेहदी बाजारगान को नया प्रधानमंत्री घोषित किया. देश में दो प्रधानमंत्री हो गए थे. ईरान की वायुसेना ने खामनेई को अपना नेता मान लिया. 20 फरवरी को शाह समर्थक इंपीरियल गार्ड्स और वायुसेना के बीच युद्ध हो गया. शाह समर्थक सेना हार गई.

1979 में ईरान में नई सरकार चुनी गई. खामनेई को देश का सर्वोच्च नेता चुना गया


इस तरह खत्म हुआ ईरान का अमेरिका से रिश्ता 
अप्रैल 1979 में एक जनमत संग्रह करवाया गया. इसके बाद ईरान को इस्लामी गणतंत्र घोषित किया गया. एक सरकार चुनी गई और खामनेई को देश का सर्वोच्च नेता चुना गया. प्रधानमंत्री के पद की जगह राष्ट्रपति का पद आ गया. इस क्रांति के साथ अमेरिका का ईरान से प्रभाव एकदम खत्म हो गया.

फिर बन गए कट्टर दुश्मन 
शाह के समय दोस्त रहे दोनों देश अब दुश्मन बन गए थे. ईरान और अमेरिका ने आपस में राजनयिक संबंध खत्म कर लिए. तेहरान में ईरानी छात्रों के एक समूह ने अमेरिकी दूतावास में 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया. इन लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर से शाह को वापस ईरान भेजने की मांग की. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. धीरे धीरे ये दुश्मनी और पक्की होती चली गई. खामनेई की 1989 में 86 साल की उम्र में मृत्यु हो गई.

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