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Ayodhya Verdict : इस 'अयोध्‍या' को बर्मा की सेना ने 1767 में कर दिया था तबाह

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 6:48 PM IST
Ayodhya Verdict : इस 'अयोध्‍या' को बर्मा की सेना ने 1767 में कर दिया था तबाह
थाईलैंड में लोकतंत्र की स्थापना 1932 में हुई थी. इसके बाद 1976 में थाईलैंड की सरकार ने 'अयोध्‍या' के पुनर्निर्माण पर ध्‍यान दिया.

15वीं सदी में स्‍याम (आज का थाईलैंड) की राजधानी 'अयुत्थया' शहर ही था, जो स्थानीय भाषा में अयोध्या का समानार्थी है. बर्मा (अब म्यांमार) की सेना ने 1767 में इस शहर पर हमला कर तहस नहस कर दिया था. उन्‍होंने वहां मौजूद मूर्तियों तक के सिर काट दिए. बाद में जब चीनी सेना बर्मा में घुस आई तो उन्हें स्‍याम छोड़कर जाना पड़ा.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 6:48 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्‍या में विवादित जमीन (Ayodhya Disputed Land) पर राममंदिर निर्माण (Ram Temple) का आदेश दे दिया है. इसके लिए सरकार को एक ट्रस्‍ट बनाने को कहा गया है. इस बीच हम आपको बता रहे हैं एक और अयोध्‍या के बारे में, जो थाईलैंड (Thailand) में है. 15वीं सदी में स्‍याम (आज का थाईलैंड) की राजधानी 'अयुत्थया' शहर ही था, जो स्थानीय भाषा में अयोध्या का समानार्थी है. बर्मा (अब म्यांमार) की सेना ने 1767 में इस शहर पर हमला कर तहस नहस कर दिया था. उन्‍होंने वहां मौजूद मूर्तियों तक के सिर काट दिए. बाद में जब चीनी सेना बर्मा में घुस आई तो उन्हें स्‍याम छोड़कर जाना पड़ा और यहां एक नए राजवंश व देश का उदय हुआ. उसी ने घोषणा की थी कि वह इस शहर को बैंकॉक (Bangkok) के रूप में स्थापित करेगा.

बर्मा की सेना लौटने के बाद रामायण को दोबारा मिली प्रतिष्‍ठा
चक्री वंश के पहले राजा की उपाधि ही राम प्रथम थी. थाईलैंड में आज भी यही राजवंश है. जब बर्मा की सेना यहां से चली गई तो देश में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को खोजने की मुहिम चली. इसी दौरान रामायण (Ramayana) को यहां दोबारा प्रतिष्ठा मिलनी शुरू हुई. रामायण का जो संस्करण आज यहां प्रचलित है वो राम प्रथम के संरक्षण में रामलीला के रूप में 1797 से 1807 के बीच विकसित हुआ था. राम प्रथम ने इसके कुछ अंशों को दोबारा लिखा भी है. महाकाव्य रामकेईन में ये बातें कही गई हैं, जो स्थानीय भाषा में रामायण का ही नाम है. थाईलैंड में राजा सहित तकरीबन पूरी आबादी रामकेईन के 18वीं शताब्दी में अस्तित्व में आए संस्करण को राष्ट्रीय ग्रंथ की तरह मानती है.

1932 में लोकतंत्र की स्‍थापना के बाद शहर का हुआ पुनर्निर्माण

थाईलैंड में लोकतंत्र (Democracy) की स्थापना 1932 में हुई थी. इसके बाद 1976 में थाईलैंड की सरकार ने इस शहर के पुनर्निर्माण पर ध्‍यान दिया. यहां के जंगलों को साफ कर शहर में मौजूद अवशेषों की मरम्‍मत कराई गई. शहर के बीचो-बीच एक प्राचीन पार्क मौजूद है. इसमें बिना शिखर वाले खंभे, दीवारें, सीढ़ियां और बुद्ध की सिरकटी प्रतिमा मौजूद है. इस पार्क में एक बुद्ध का सैंडस्‍टोन का बना सिर पीपल के वृक्ष की जड़ों में जकड़ा हुआ है. यह पेड़ अयोध्‍या में वट महाथाट यानी 14वीं शताब्‍दी के प्राचीन साम्राज्‍य के स्‍मृति चिह्नों वाले मंदिरों के अवशेषों में मौजूद है.

सोराय नदी के तट पर बनाया जा रहा है भव्‍य राममंदिर
भारत के राम जन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट ने पिछले साल थाईलैंड में एक भव्‍य राम मंदिर का निर्माण करने की घोषणा की. ट्रस्ट ने पिछले साल अगस्‍त में भूमि पूजन के साथ इसकी शुरुआत भी कर दी. यह राममंदिर शहर के किनारे प्रसिद्ध सोराय नदी (भारत में अयोध्‍या सरयू नदी के किनारे बसी हुई है.) के तट पर बनाया जा रहा है. बता दें कि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक को महेंद्र अयोध्या भी कहते है. लोगों का मानना है कि यह इंद्र की बनाई महान अयोध्या है. यही कारण है कि थाईलैंड के सभी राम (राजा) इसी अयोध्या में रहकर कामकाज संभालते हैं.
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First published: November 9, 2019, 6:32 PM IST
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