थाइलैंड में भी है एक अयोध्या, 'रामायण' को मिला हुआ है राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा

थाइलैंड में भी है एक अयोध्या, 'रामायण' को मिला हुआ है राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा
15वीं सदी में थाइलैंड की राजधानी 'अयुत्थया' शहर था, जो स्थानीय भाषा में अयोध्या का समानार्थी है

17वीं सदी में तत्कालीन बर्मा (म्यांमार) की सेना ने थाइलैंड पर हमला करके राम-सीता की मूर्तियां तक तोड़ दी थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 4, 2020, 5:36 PM IST
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रामनगरी अयोध्या (Ayodhya) में 5 अगस्त का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है. इस रोज पीएम नरेंद्र मोदी राम मंदिर का भूमि पूजन (Ram mandir bhumi pujan) करेंगे. इसके साथ ही सदियों से चला आ रहा इंतजार खत्म हो जाएगा. इस बीच जानिए, थाइलैंड की अयोध्या (Ayutthaya, Thailand) के बारे में. माना जाता है कि 15वीं सदी में थाइलैंड की राजधानी 'अयुत्थया' शहर था, जो स्थानीय भाषा में अयोध्या का समानार्थी है. बाद में बर्मीज सेना के आक्रमण के दौरान पूरा शहर तबाह हो गया, साथ ही मंदिर की मूर्तियां भी नष्ट कर दी गई थीं.

क्या है इतिहास
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगे कि दक्षिण पूर्व एशिया के देश थाइलैंड में एक वक्त पर राम का ही राज था. माना जाता है कि वहां चक्री वंश के पहले राजा की उपाधि ही राम प्रथम थी. थाईलैंड में आज भी यही राजवंश है. जब बर्मा की सेना यहां से चली गई तो देश में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को खोजने की मुहिम चली. इसी दौरान रामायण (Ramayana) को यहां दोबारा प्रतिष्ठा मिलनी शुरू हुई.

बर्मीज सेना के आक्रमण के दौरान पूरा शहर तबाह हो गया, साथ ही मंदिर की मूर्तियां भी नष्ट कर दी गईं (Photo- needpix)

राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा


रामायण का जो संस्करण आज यहां प्रचलित है वो राम प्रथम के संरक्षण में रामलीला के रूप में 1797 से 1807 के बीच विकसित हुआ था. राम प्रथम ने इसके कुछ अंशों को दोबारा लिखा भी है. महाकाव्य राम कियेन में ये बातें कही गई हैं, जो स्थानीय भाषा में रामायण का ही नाम है. थाईलैंड में राजा सहित तकरीबन पूरी आबादी रामकेईन के 18वीं शताब्दी में अस्तित्व में आए संस्करण को राष्ट्रीय ग्रंथ की तरह मानती है.

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दोबारा बसा शहर
थाईलैंड में लोकतंत्र (Democracy) की स्थापना 1932 में हुई थी. इसके बाद 1976 में थाईलैंड की सरकार ने इस शहर के पुर्ननिर्माण पर ध्‍यान दिया. यहां के जंगलों को साफ कर शहर में मौजूद अवशेषों की मरम्‍मत कराई गई. शहर के बीचों-बीच एक प्राचीन पार्क मौजूद है. इसमें बिना शिखर वाले खंभे, दीवारें, सीढ़ियां और बुद्ध की सिरकटी प्रतिमा मौजूद है. इस पार्क में एक बुद्ध का सैंडस्‍टोन का बना सिर पीपल के वृक्ष की जड़ों में जकड़ा हुआ है. यह पेड़ अयोध्‍या में वट महाथाट यानी 14वीं शताब्‍दी के प्राचीन साम्राज्‍य के स्‍मृति चिह्नों वाले मंदिरों के अवशेषों में मौजूद है.

राम जन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट ने लगभग दो साल पहले थाईलैंड में एक भव्‍य राम मंदिर का निर्माण करने की घोषणा की


वहां भी है सरयू नदी
भारत के राम जन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट ने साल 2018 में थाईलैंड में एक भव्‍य राम मंदिर का निर्माण करने की घोषणा की. इसकी शुरुआत भी हो चुकी है. यह राममंदिर शहर के किनारे प्रसिद्ध सोराय नदी (भारत में अयोध्‍या की सरयू नदी के किनारे बसी हुई है) के तट पर बनाया जा रहा है. बता दें कि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक को महेंद्र अयोध्या भी कहते है. लोगों का मानना है कि यह इंद्र की बनाई महान अयोध्या है. यही कारण है कि थाईलैंड के सभी राम (राजा) इसी अयोध्या में रहकर कामकाज संभालते हैं.

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यहां स्थानीय भाषा में राम कियेन की मान्यता है, जो असल में रामायण ही है. इसका अर्थ है राम कीर्ति या राम की महिमा. वक्त-वक्त पर यहां राम कियेन पर आधारित नाटकों और कठपुतली प्रदर्शन होता रहता है, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोग काफी शौक से जमा होते हैं.

यहां स्थानीय भाषा में राम कियेन की मान्यता है, जो असल में रामायण ही है


क्या होता है राम कथा में
इसमें राम-सीता, लक्ष्मण, हनुमान, बाली और रावण जैसे सारे चरित्र होते हैं और कथा रामायण से थोड़ी अलग होती है. हालांकि उसके मूल में राम-सीता ही होते हैं. राम कियेन में आखिर में राम और सीता दोबारा मिल जाते हैं. धरती में समाई सीता को वापस बुलाने के लिए राम भी कठिन तप करते हैं और सीता लौट आती हैं.

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वैसे भगवान राम के अलावा भी बौद्ध धर्म को मानने वाले इस देश में कई हिंदू प्रतीक मिल जाएंगे. जैसे यहां का राष्ट्रीय चिन्ह गरूड़ है, जो हिंदू माइथोलॉजी से प्रेरित माना जाता है. साथ ही यहां बैंकॉक एयरपोर्ट पर लाउंज में समुद्र मंथन से मिलता-जुलता दृश्य उकेरा हुआ है.
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