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मुंबई हमले से कसाब की फांसी तक, जानें कब-क्या हुआ

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Updated: November 21, 2018, 10:41 AM IST
मुंबई हमले से कसाब की फांसी तक, जानें कब-क्या हुआ
आतंकी अजमल कसाब (फाइल फोटो)

26 नवंबर 2008 में मुंबई पर पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हमला किया था. इस दौरान कमांडों कार्रवाई में अकेले कसाब ही पकड़ा जा सका था.

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मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को दस पाकिस्तानी आतंकवादियों ने समुद्र के रास्ते से आकर हमला किया. इस हमले में 166 लोग मारे गए. सैकड़ों अन्य घायल हुए. दस आतंकवादी हमलावरों में बस एक अजमल कसाब को ही जिंदा पकड़ा जा सका. इसके बाद कसाब पर चार सालों तक अदालत में केस चला. फिर 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा जेल में उसे सुबह साढे़ सात बजे फांसी दे दी गई.

हमले से लेकर कसाब को फांसी दिए जाने तक का पूरा घटनाक्रम पढ़िए...

26 नवंबर, 2008: अजमल कसाब और नौ आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया. हमले में 166 लोग मारे गए. कसाब को गिरफ्तार कर लिया गया.

30 नवंबर, 2008: कसाब ने पुलिस हिरासत में गुनाह कबूल किया.



27-28 दिसंबर, 2008: कसाब की पहचान परेड हुई.

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13 जनवरी, 2009: एमएल तहलियानी को 26/11 मामले में विशेष जज नियुक्त किया गया.

16 जनवरी, 2009: ऑर्थर रोड जेल को कसाब के ट्रायल के लिए चुना गया.

कसाब को मुंबई पुलिस ने अकेले जिंदा आतंकवादी के तौर पर पकड़ा (फाइल फोटो)


22 फरवरी, 2009: उज्जवल निकम को सरकारी वकील नियुक्त किया गया.

25 फरवरी, 2009: मेट्रोपॉलिटिन कोर्ट में कसाब के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाखिल.

1 अप्रैल, 2009: विशेष अदालत ने अंजलि वाघमारे को कसाब का वकील नियुक्त किया.

20 अप्रैल, 2009: कसाब को 312 मामलों में आरोपी बनाया गया.

6 मई, 2009: कसाब पर 86 आरोप तय किए गए, कसाब का आरोपों से इनकार.

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16 दिसंबर, 2009: अभियोजन पक्ष ने 26/11 मामले में जिरह पूरी की.

31 मार्च, 2010: फ़ैसला 3 मई के लिए सुरक्षित रखा गया.

3 मई, 2010: कोर्ट ने कसाब को दोषी ठहराया

6 मई, 2010: कसाब को विशेष अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई.

विशेष अदालत ने वर्ष 2010 में कसाब को फांसी की सजा सुनाई


18 अक्टूबर, 2010: बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू. कसाब की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी.

19 अक्टूबर, 2010: कसाब ने निजी तौर पर अदालत में हिस्सा लेने की मांग की.

21 अक्टूबर, 2010: कसाब ने निजी तौर पर अदालत में हिस्सा लेने की बात अपने वकील से दुहराई.

25 अक्टूबर, 2010: हाई कोर्ट के न्यायाधीशों ने सीसीटीवी फ़ुटेज देखी.

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27 अक्टूबर, 2010: वकील उज्जवल निकम ने निचली अदालत द्वारा दी गई कसाब की मौत की सज़ा को सही ठहराया.

29 अक्टूबर, 2010: उज्जवल निकम के मुताबिक कसाब ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश की.

22 नवंबर, 2010: निकम ने कसाब को झूठा और साजिशकर्ता बताया.

23 नवंबर, 2010: हाई कोर्ट के न्यायाधीशों ने एक बार फिर सीसीटीवी फ़ुटेज देखी.

25 नवंबर, 2010: कसाब के वकील अमील सोलकर ने जिरह शुरू की. निचली अदालत की कार्यवाही को ग़लत ठहराते हुए दोबारा ट्रायल की मांग की.

30 नवंबर 2010: सोलकर ने तर्क दिया कि कसबा के खिलाफ़ “देश के खिलाफ़ युद्ध छेड़ने के आरोप नहीं बनते.”

5 दिसंबर 2010: बचाव पक्ष के वकील सोलकर ने तर्क दिया कि सबूतों को दबा दिया गया है. सिर्फ़ कुछ सीसीटीवी फुटेज अदालत में दिखाई गई.

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी कसाब की फांसी पर मुहर लगा दी (फाइल फोटो)


7 दिसंबर 2010: कसाब ने पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे और दो अन्य पुलिस अधिकारियों की हत्या से इनकार किया. उसके वकील का तर्क था कि मारे गए पुलिस अधिकारियों के शरीर में मिली गोलियां कसाब की राइफल से मैच नहीं होती.

8 दिसंबर 2010: सोलकर का कहना था कि पुलिस ने गिरगाम चौपाटी में 26 नवंबर 2008 को झूठी मुठभेड़ का नाटक करके कसाब को फंसाया है. साथ ही मौके पर कसाब की मौजूदगी से इनकार करते हुए उसकी गिरफ़्तारी को ग़लत बताया.

10 दिसंबर 2010: कसाब के वकील ने निचली अदालत में रखी कश्ती का निरीक्षण किय और उस कश्ती को 10 व्यक्तियों के आने के लिए नाकाफ़ी बताया और दावा किया कि अभियोजन पक्ष का दावा ग़लत है.

13 दिसंबर 2010: कसाब ने खुद को किशोर होने की दलील देते हुए अदालत से अपने मानसिक हालत के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों के एक पैनल की नियुक्ति करने का आग्रह किया.

14 दिसंबर 2010: अदलात ने कसाब की मांग को खारिज कर दिया.

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21 फ़रवरी 2011: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कसाब पर निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया और उसकी अपील खारिज कर दी. मुंबई हमलों के मामले में फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को बरी कर दिया गया.

29 जुलाई 2011: कसाब ने फांसी की सज़ा के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की.

10 अक्तूबर 2011: सुप्रीम कोर्ट ने कसाब की फांसी की सज़ा पर रोक लगाई.

26/11 हमले का आतंकी अजमल कसाब (फाइल फोटो)


31 जनवरी 2012: सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरु हुई. कसाब का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन को अदालत का मित्र यानी एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया.

25 अप्रैल 2012: कसाब की अपील पर कोर्ट ने सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रखा.

28 अगस्त 2012: मुंबई हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब को फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बरक़रार रखा.

16 अक्तूबर 2012: राष्ट्रपति के सामने दया के लिए भेजी गई कसाब की अर्ज़ी गृहमंत्रालय ने ख़ारिज की और अपनी सिफ़ारिश राष्ट्रपति को भेजी.

5 नवंबर 2012: राष्ट्रपति ने कसाब की दया याचिका ख़ारिज की.

8 नवंबर 2012: कसाब को मौत की सज़ा दिए जाने की फ़ाइल महाराष्ट्र सरकार को भेजी गई. इसी दिन महाराष्ट्र सरकार ने 21 नवंबर को मौत की सज़ा देने का फ़ैसला किया.

21 नवंबर 2012: कसाब को सुबह 7:30 बजे फांसी दी गई.

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First published: November 21, 2018, 10:13 AM IST
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