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जन्म के कितने समय बाद बातें समझने लगता है बच्चा, हाव-भाव से देने लगता है जवाब

जन्म के कितने समय बाद बातें समझने लगता है बच्चा, हाव-भाव से देने लगता है जवाब

बच्चों (Babies) में पैदा होते से ही हास-परिहास को समझने की क्षमता नहीं होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

बच्चों (Babies) में पैदा होते से ही हास-परिहास को समझने की क्षमता नहीं होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

नवजात शिशुओं (New-born babies) का विकास कई चरणों में होता है. शारीरिक और मानसिक विकास के अलावा बच्चों में व्यवहारिक बदलाव (Behavioural Changes) भी समय के साथ विकसित होते हैं. हाल ही में यूके में हुए एक अध्ययन मे शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि बच्चों में हास-परिहास (Sense of Humour) की समझ कैसे और कितने समय में विकसित होती है. इसमें पाया गया है कि बच्चों में एक महीने तक इसकी शुरुआत भी नहीं होती है.

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    Babies take a month to develop a sense of humour says study Viks
    नवजात शिशुओं (New-born Babies) को देखना ही अपने आप में एक बड़ा सुख है. उनके विकास के दौरान उनके बर्ताव में आए बदलाव भी माता पिता (Parents) को बहुत सुख देने का काम करते हैं. इसके अलावा उनकी किलकारी तो हर देखने वाले को खुशी से भर देती है. नए अध्ययन से पता चला है कि बच्चे पैदा होते ही हंसाने वाली बातें और हाव भाव (Sense of Humour) तक नहीं समझ पाते हैं. यह समझ विकसित करने में उन्हें एक महीने का समय लगता है. इस अध्ययन के नतीजे कई लोगों के लिए हैरानी वाले लग सकते हैं क्योंकि आमतौर पर छोटे बच्चों से हम खुश होकर बात भी करते हैं.

    बहुत उपयोगी हो सकता है अध्ययन
    यह अध्ययन जर्नल विहेवियर रिसर्च मेथड्स में प्रकाशित हुआ है. मनोवैज्ञानिक शोधकर्ता उम्मीद कर रहे हैं कि उनका अध्ययन शिशुओं के विकास में आने वाले अंतर को पहचाने वाले उपकरण के तौर पर उपयोगी सिद्ध हो सकता है. यह अध्ययन यूके की ब्रिस्टल यनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है.

    खास तरह का सर्वे
    शोधकर्ताओं ने इंटरनेशनल अर्ली ह्यूमर सर्वे में 0-47 महीनों की उम्र के 671 शिशुओं पर किया है. उनका उद्देश्य यह जानना था कि पैदा होने के बाद बच्चे अपने अंदर बाल्यावस्था के स्तर की विनोदपूर्णता या परिहास की समझ कब तक विकसित कर पाते हैं.

    एक दो महीने पर विकसित हुई समझ
    शोधकर्ताओं ने अपने कार्य में विभिन्न उम्रों में 21 अलग –अलग प्रकार के विनोद या परिहास की पहचान की. इसमें एक महीने की उम्र सबसे कम थी जब बच्चे सबसे पहले परिहास को समझ पाते हैं. करीब आधे बच्चे इस बिंदु पर 2 महीने में पहुंच सके. वहीं 50 प्रतिशत बच्चों को खुद से मजाक बनाने में 11 महीने की उम्र तक का समय लगा.

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    शिशुओं (Babies) के एक-दो महीने होने के बाद ही उन्हें हंसी मजाक के हाव भाव समझ में आने लगते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    एक साल तक के बच्चों में परिहास
    12 महीने से कम उम्र के शिशु पीकाबू, गुदगुदी, अजीब सा चेहरा बनाने, अजीब आवाज निकालने या चीजों का अजीब तरह से इस्तेमाल करने जैसे खेलों के दौरान की गई अधिकांश गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते पाए गए. वहीं एक साल तक के बच्चे इससे भी ज्यादा स्तर के हंसी मजाक को समझते पाए गए.

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    कब होता है ज्यादा विकास
    बच्चों में हंसी मजाक का भाव तब ज्यादा विकसित होने लगता है जब वे घुटने के बल चलने लगते हैं. जैसे 2 साल की उम्र के प्रतिभागियों ने शोधकर्ताओं द्वारा परिभाषित नॉनसेंसर ह्यूमर यानि बेमतलब का मजाक का आनंद लिया जो कोई अजीब या बेहूदा से वाक्य या वाक्यांश होता है. वे दूसरों को चोट लगने या अपमानित करने वाले मजाक को भी समझने लगते हैं.

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    बच्चों (Babies) में 4 साल की उम्र तक हास परिहास की समझ का विकास हो जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    बच्चों में क्षमताओं के विकास के लिए जरूरी
    इस अध्ययन में तीन साल के बच्चों ने दर्शाया कि वे और भी जटिल मजाक और दूसरों की हंसी उड़ाने वाले प्रैंक्स आदि भी समझ सकते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि सही हास परिहास का विकास सामाजिकता के लिए बहुत जरूरी है. इससे बच्चों में कल्पनाशीलता और दूसरी संज्ञानात्मक क्षमताओं का विकास होता है.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि हास-परिहास पहले चार साल की उम्र तक विकसित होने वाली एक जटिल प्रक्रिया है. यह जरूरी है कि हम ऐसे उपकरण विकसित करें जिससे पता चल सके कि हास-परिहास पहले कैसे विकसित होता है. इससे हम बच्चों के विकास के बारे में यह भी जान सकेंगे कि उनके कार्यों में संज्ञानात्मक, सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से हास परिहास कितना मददगार होता है.

    Tags: Health, Research, Science

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