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HIV मलेरिया से नहीं, बैक्टीरिया वायरस की विशेष क्षमता से मर रहे हैं ज्यादा लोग

HIV मलेरिया से नहीं, बैक्टीरिया वायरस की विशेष क्षमता से मर रहे हैं ज्यादा लोग

संक्रमण वाली बीमारियों (Disease) में दवाएं अब ज्यादा बेअसर होती जा रही हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

संक्रमण वाली बीमारियों (Disease) में दवाएं अब ज्यादा बेअसर होती जा रही हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सेहत (Health) को लेकर एक चौंकाने वाले अध्ययन में खुलासा हुआ है कि संक्रमण (Infection) से मरने वाले लोगों की संख्या में ऐसे मामले ज्यादा हैं जो एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस (Antimicrobial Resistance) संक्रमण के शिकार है, जबकि माना यह जाता है कि संक्रमण से मरने वाले एचाईवी एड्स या फिर मलेरिया जैसी बीमारीयों से ज्यादा मरते हैं. इस अध्ययन में यह भी पाया गया है कि अब बच्चे उन संक्रामक बीमारियों से ज्यादा मर रहे हैं जिनका पहले इलाज हो जाता था.

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    स्वास्थ्य (Health) को लेकर कोविड महामारी ने हम इंसानों को बहुत सारे सबक सिखाए हैं. इसमें एक अहम सबक यह है कि हमें अपनी सेहत को प्राथमिकता के तौर पर लेना होगा. इस समय पूरी दुनिया जहां ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) से जूझ रही है, वहीं स्वास्थ्य संबंधी एक अध्ययन के चिंताजनक नतीजे सामने आए हैं. एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस (Antimicrobial Resistance) जिसे एएमआर भी कहते हैं, मानव स्वास्थ्य के लिए के एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है. आमतौर लोगों का यही मानना होता है कि इंसानों की मौत एचाईवी या मलेरिया जैसे खतरनाक संक्रमण से होता है. लेकन इस अध्ययन ने यह नजरिया बदलने पर मजबूर कर दिया है.

    क्या होता है एएमआर
    एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस तब होता है जब संक्रमण फैलाने में सक्षम बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद और परजीवी समय के साथ बदलते हैं और उन पर दवाओं का असर नहीं होता है इससे संक्रमण का इलाज मुश्किल हो जाता है और बीमारी के फैलने, गंभीर होने और मौत होने का जोखिम बढ़ जाता है.

    हर व्यक्ति को खतरा
    लेसेंट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि  एएमआर से हर व्यक्ति को खतरा है, लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि युवा बच्चों में इसका खास तौर पर प्रभाव पड़ रहा है. अध्ययन में इस बात को रेखांकित किया गया है कि पूरी दुनिया में एएमआर मौत की प्रमुख वजह हो गई है. यहां तक कि इस मामले में यह एचआईवी/एड्स और मलेरिया से भी ज्यादा आगे निगल गया है.

    बच्चों में ज्यादा मामले
    इस अध्ययन साल 2019 में किया गया था जिसमें पाया गया कि 49.5 लाख लोगों की मौत की वजह कम से कम एक दवा रोधक संक्रमण थी और एएमआर सीथे 12.7 लाख लोगों की मौत की वजह बना. वहीं बच्चों में एएमआर की वजह से 5 साल से कम उम्र के बच्चों में पांच में से एक मौत ऐसी थी जिनका पहले इलाज हो सकने वाले संक्रमण से हुई थी.

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    एड्स (AIDS) जैसी बड़ी संक्रामक बीमारी ज्यादा मौतों की वजह नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    दौड़ में आगे रहना जरूरी
    इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक एंड इवेल्यूएशन के डायरेक्टर और इस अध्ययन के सह लेखक प्रोफेसर क्रिस मुरे ने बताया, “यह शोधपत्र वह अहम कदम है जससे हमें यह पता लग रहा है कि  चुनौती की पूरा स्वरूप कितना बड़ा है. अब हमें इन आंकलनों को उपयोग कारगर कदम उठाने लिए करना होगा. और नवचार से बचाव के नए तरीके खोजने होंगे अगर हमें एएमआर की दौड़ में आगे रहना चाहते हैं तो.

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    नई दवाओं में कमी
    इस शोध में 204 देशों में लोगों का अध्ययन किया गया जिसमें 47.1 लाख लोगों के रिकॉर्ड थे. इसमें बताया गया है कि हमें प्रभावी वैक्सीन, दवाओं और इलाज के लिए पर्याप्त तेजी से नए उपाय विकसित नहीं कर पा रहे हैं. 1980 से 2000 के बीच केवल 63 ही नई एंटीबायोटिक दवाओं को इलाज के लिए उपयोग में लाने के लिए अनुमति दी गई, जो 2000 से 20018 तक केवल 15 ही रह गई.

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    एंटीमाइक्रोबियल रजिस्टेंस (Antimicrobial Resistance) से बच्चे ज्यादा संख्या में पीड़ित होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    पूरी दुनिया में असर
    उप सहारा अफ्रीका पर इस मामले में  सबसे ज्यादा बोझ है, जहां केवल एक ही साल में एएमआर की वजह से 2.55 लाख मौतें हुई हैं. वहीं उच्च आय वाले देशों में ही हालात चेताने वाले ही हैं जहां एशेरिकिया कोलाए या ई कोलाए बैक्टीरया संक्रमण जो गुर्दे को प्रभावित करता है और खून को संक्रमित करने वाले स्टैफिलोकॉकस ऑरियस जो लोगों को अस्पताल ही पहुंचा देता है, मौत की सामान्य वजह बनते जा रहे हैं.

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    इसानों के लिए एएमआर पहले ही एक  बहुत बड़ी चुनौती बन गया है. मौत की संख्या से ज्यादा वे मरने वालों के परिवार और समुदाय के लोग हैं जो खामोश एएमआर महामारी का दंश झेल रहे हैं. इसमें भी चिंता की बात यह है कि एएमआर में बीमारियों और संक्रमण की सूची बढ़ती जा रही है. जून 2021 में हुए जी7 देशों के स्वास्थ्यमंत्रियों को इस शोधपत्र का पूर्व प्रकाशन सौंपा गया था. उन्होंने इस पर सहमति जताई थी कि वैश्विक स्वास्थ्य तंत्रों के नियोजनों में एएमआर को प्राथमिकता के रूप में लिया जाना चाहिए.

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