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कैसी है बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत, क्यों भारत पलायन को हो रहे मजबूर

News18Hindi
Updated: December 12, 2019, 8:43 PM IST
कैसी है बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत, क्यों भारत पलायन को हो रहे मजबूर
भाषाई आधार पर पाकिस्तान से अलग हुए बांग्लादेश में मुजीबुर्रहमान के बाद सांप्रदायिकता तेजी से फैली. बीते डेढ़ दशक में देश से हिंदुओं का लगातार पलायन हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बांग्लादेश (Bangladesh) की आजादी (Independence) की पूरी लड़ाई धर्म पर आधारित न होकर भाषाई और सांस्कृतिक आधार पर थी. पाकिस्तान का ये पूर्वी हिस्सा बांग्ला भाषा के ऊपर उर्दू थोपने का विरोधी था.लेकिन देश में सांप्रदायिकता ने तेजी के साथ जड़ें जमाई हैं. हिंदुओं का पलायन पिछले ढाई दशक में तेजी से हुआ है.

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1947 में पाकिस्तान (Pakistan) की आजादी के कुछ सालों बाद 1952 में पूर्वी पाकिस्तान (East Pakistan) में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बांग्ला भाषा को लेकर प्रदर्शन किया था. पूर्वी पाकिस्तान के ढाका में 21 फरवरी 1952 को बंगाली भाषा के समर्थन में आयोजित इस प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ छात्र भी सम्मिलित थे. पाकिस्तान सरकार को ये बात पसंद नहीं आई और प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दी गईं. भाषा के लिए यहां से शुरू हुई एक मुहिम तब जाकर थमी जब पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया. 21 फरवरी 1952 के उन प्रदर्शनकारियों की याद में अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस हर साल मनाया जाता है.

भाषाई अस्मिता आंदोलन से सांप्रदायिकता की ओर बांग्लादेश
दरअसल बांग्लादेश की पूरी लड़ाई धर्म पर आधारित न होकर भाषाई और सांस्कृतिक आधार पर थी. पाकिस्तान का ये पूर्वी हिस्सा बांग्ला के ऊपर उर्दू थोपे जाने का विरोधी था. पाकिस्तानी आर्मी के अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद कर जब बांग्लादेश आजाद हुआ तब उसके सबसे बड़े नेता शेख मुजीबुर्रहमान थे. उन्हें बांग्लादेश के पिता या बंगबंधु के उपनामों से भी पहचाना जाता है. देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में एक धर्मनिरपेक्ष देश बनाने के कई प्रयास किए. लेकिन उनकी कोशिशों को जल्दी ही नुकसान पहुंचाया गया और देश के दूसरे राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने देश के संविधान पर इस्लाम धर्म को थोप दिया. काफी विरोध हुआ लेकिन वो नाकाफी था. जिया उर रहमान के कदम ने देश को सेकुलरिजम से सांप्रदायिकता के अंधेरे में धकेल दिया.

आजादी के समय बड़ी संख्या में रहते थे हिंदू

बांग्लादेश की आजादी के समय वहां पर बंगाली हिंदुओं की जनसंख्या करीब 13.5 प्रतिशत थी. दरअसल पाकिस्तान में हिंदुओं की ज्यादा आबादी इसी तरफ रहती थी. आजादी का पूरा आंदोलन भाषाई आधार पर था इस वजह से कभी यहां के हिंदुओं के मन में देश छोड़ने की बात कभी नहीं आई. लेकिन जियाउर रहमान ने संविधान के साथ जो खिलवाड़ किए उसके बाद धीरे-धीरे देश का इस्लामीकरण होना शुरू हो गया.

बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान ने देश में धर्मनिरपेक्ष मूल्य लागू करने की काफी कोशिश की थी.
बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान ने देश में धर्मनिरपेक्ष मूल्य लागू करने की काफी कोशिश की थी.


जिया उर रहमान की हत्या के बाद अब्दुल सत्तार देश के राष्ट्रपति बने लेकिन उन्हें तख्तापलट कर गद्दी से हुसैन मुहम्मद इरशाद ने हटा दिया. यहां से बांग्लादेश अपने सबसे बुरे दौर की तरफ मुड़ गया.बाबरी विध्वंस के बाद बढ़े हमले
बांग्लादेश में हिंदुओं पर सबसे बड़ी संख्या में हमले हुए बाबरी विध्वंस के विरोध में. अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 200 हिंदू मंदिरों को तोड़ डाला गया. कई जगह पर हिंदुओं पर हमले और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं सामने आईं. इसके बाद बांग्लादेश में इस्लामिक अतिवादियों को हवा देने का का दौर शुरू हुआ और हिंदुओं के पलायन की शुरुआत हुई. 1996 में विपक्ष की नेता रहीं बेगम खालिदा जिया ने तो यहां तक कह दिया था कि देश की स्थिति न सुधरी तो मस्जितों से अजान की जगह 'उल्लू ध्वनि' (बंगाली हिंदुओं की एक धार्मिक प्रथा जिसमें महिलाएं उल्लुओं जैसी ध्वनि निकालती हैं. इसे उलूक ध्वनि भी कहा जाता है.) सुनाई देगी. उनके इस बयान को लेकर काफी आलोचना भी हुई थी. बांग्लादेशी दक्षिणपंथी और इस्लामिक कट्टरपंथी पार्टियां अक्सर हिंदुओं पर आरोप लगाती हैं कि उनका झुकाव भारत की तरफ है.

बांग्लादेश में ढाकेश्वरी देवी का मंदिर.
बांग्लादेश में ढाकेश्वरी मंदिर.


एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले 2017 में 107 हिंदुओं की पूरे देश में हत्या हो गई. 782 हिंदुओं पर देश छोड़ने का दबाव डाला गया. रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में 6474 क्रूरता के मामले हुए. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान केवल ठाकुरगांव इलाके में आठ हिंदू परिवारों के घरों को आग लगा दी गई. लगातार हमलों के कारण बड़ी संख्या में हिंदुओं ने भारत की तरफ पलायन किया.

राजनीतिक प्रतिनिधित्व
अगर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात की जाए तो वर्तमान में हिंदुओं की जनसंख्या देश में घटकर महज 9.2 प्रतिशत रह गई है. राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व तकरीबन न के बराबर है. हालांकि शेख मुजीबुर्हरमान की बेटी शेख हसीना वाजेद एक धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक चेहरे के रूप में मशहूर हैं. उनकी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से सांप्रदायिक ताकतों को ताकतों को कमजोर करने की काफी कोशिश हुई है. उनके मंत्रिमंडल में साधन चंद्र मजूमदार और स्वपन भट्टाचार्य दो हिंदू मंत्री हैं. बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी एक हिंदू जज रह चुके हैं.

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First published: December 12, 2019, 6:47 PM IST
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