चाइनीज ऐप्स बंद करने से तिब्बती शरणार्थियों को क्यों हुई परेशानी

चाइनीज ऐप्स बंद करने से तिब्बती शरणार्थियों को क्यों हुई परेशानी
भारत में बसे तिब्बत के लोग तिब्बत में रह रहे अपने परिवारवालों से इसी माध्यम से जुड़े हुए हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

हाल ही में भारत ने चीन के 59 ऐप्स को बैन (Chinese app ban) कर दिया. खुफिया एजेंसियों (intelligence agencies) के मुताबिक ये ऐप भारत में जासूसी का काम कर रहे थे. हालांकि इनके बैन से तिब्बती शरणार्थी (tibetans-in-exile) काफी मुश्किल में आ गए हैं.

  • Share this:
चीन की लद्दाख में घुसने की कोशिश पर भारत सरकार ने भी आक्रामक रवैया अपनाया. काफी दिनों से चीनी ऐप्स पर बैन लगाने की बात हो रही थी. इसपर तुरंत फैसला हुआ और मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी न् 56 ऐप्स को बैन कर दिया. इनमें टिकटॉक, Mi कम्युनिटी जैसे कई ऐप्स के साथ-साथ वी-चैट भी शामिल है. इंटेलिजेंस एजेंसियों ने इनमें से 52 ऐप्स से भारत की सुरक्षा और गोपनीयता को खासतौर पर खतरा बताया था. ऐप बैन से जहां काफी सारे भारतीय खुश हैं तो कई परेशान भी हैं. तिब्बत से भारत आकर बसे शरणार्थी भी दूसरी श्रेणी में शामिल हैं. जानिए, क्या है इसकी वजह.

बैन हुए ऐप्स में से एक WeChat भी है. दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप का अब तक हर महीने 1.17 बिलियन लोग उपयोग करते रहे. यही ऐप तिब्बत में बातचीत के लिए सबसे सबसे सुलभ जरिया रहा. इसके माध्यम से भारत में बसे तिब्बती शरणार्थी और तिब्बत के लोगों में आपस में बात हो पाती थी. बता दें कि चीन में विदेशी सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर बैन है. जैसे फेसबुक, वॉट्सऐप और ट्विटर. अब चीन चूंकि तिब्बत को भी अपना हिस्सा मानता है, लिहाजा वहां भी इन सारे माध्यमों पर बैन लगा हुआ है. ऐसे में WeChat ही एक-दूसरे से बात का अकेला जरिया बचता है.

वी-चैट पर निजी बातों के अलावा तिब्बती शरणार्थी सेहत, राजनीति और धर्म की बातें भी किया करते थे- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)




भारत में बसे तिब्बत के लोग तिब्बत में रह रहे अपने परिवारवालों से इसी माध्यम से जुड़े हुए हैं. द क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक इसी वजह से भारत में रह रहे लगभग 71 प्रतिशत तिब्बतियों के पास WeChat रहा. वैसे ऐसा नहीं है कि तिब्बत के लोगों को WeChat के खतरे का अंदाजा नहीं था. वे जानते थे कि इसपर हुई बातचीत सीक्रेट नहीं, डाटा चोरी का डर भी उन्हें था.
कई बार चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने दलाई लामा की तस्वीर शेयर करने या बुद्ध धर्म से जुड़े आइडिया शेयर करने के अपराध में भी तिब्बती लोगों को सजा दी. यहां तक कि मार्च में ल्हासा के 10 लोगों को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वे कोरोना वायरस पर बात कर रहे थे. यानी तिब्बत के लोग अच्छी तरह से जानते थे कि वी-चैट के कारण वे चौबीसों घंटे निगरानी में हैं. इसके बाद भी वे बेहिचक इसका इस्तेमाल करते रहे ताकि भारत के तिब्बती परिवारों से जुड़ा रह सकें.

भारत में रह रहे तिब्बती शरणार्थी अब वी-चैट का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे और इस तरह से वे आपस में तिब्बत में रह रहे अपने लोगों की खोज-खबर नहीं ले सकेंगे. वैसे वी-चैट पर निजी बातों के अलावा तिब्बती शरणार्थी सेहत, राजनीति और धर्म की बातें भी किया करते थे.

वैसे तिब्बत के लोग अच्छी तरह से जानते थे कि वी-चैट के कारण वे चौबीसों घंटे निगरानी में हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


आईआईटी मद्रास में चाइनीज स्टडीज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सोनिका गुप्ता के मुताबिक वी-चैट को बैन करने पर चीनी ऐप से भारतीय सुरक्षा का खतरा तो कम हो रहा है लेकिन इसका बड़ा असर तिब्बती शरणार्थियों और तिब्बत में रहते लोगों पर पड़ा है. नब्बे के दशक में काफी सारे तिब्बती स्टूडेंट भारत के तिब्बतन स्कूलों में पढ़ने के लिए आए थे. तब से वे यहीं है और उनके परिवार तिब्बत में. ऐसे में वी-चैट बंद होने के साथ फिलहाल संपर्क का उनका बड़ा माध्यम खत्म हो गया है.

बैन हुए 59 ऐप में कुछ बहुत ही लोकप्रिय ऐप भी शामिल हैं जिनमें टिकटॉक, कैमस्कैनर और यूसी ब्राइजर शामिल हैं. जबकि टिकटॉक, यूसी ब्राउजर और शेयरइट की उपस्थिति तो देश की कई आर्थिक गतिविधियों में है जिसके कई कर्मचारियों के पेरोल (Payroll) भी शामिल हैं. इन 59 ऐप पर बैन यूं ही नहीं लग गया. गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर की रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है. बताया जा रहा है इन ऐप्स को लेकर इससे पहले भी कई बार इस तरह की चेतावनी दी गई है. कहा जा रहा है कि ये ऐप फोन से संवेदनशील जानकारी अपने सर्वर तक पहुंचा देते हैं जिसका अनुचित उपयोग हो सकता है. कई बार सरकार को इस तरह की शिकायतें भी मिली हैं जिसे इन ऐप के इस्तेमाल के साथ डेटा की चोरी का जिक्र है. यही वजह है कि इनपर बैन लगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading