दिल्ली में बैन बेअसर तो कोलकाता में मिसाल, कहां पटाखों को लेकर क्या हैं नियम?

दिल्ली में आतिशबाज़ी प्रतिबंधों की धज्जियां उड़ने की खबरें रहीं.

कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी के चलते और पर्यावरण प्रदूषण (Pollution) को मद्देनज़र रखते हुए देश के कुछ राज्यों ने पटाखे चलाने पर पूरी तरह बैन लगाया, तो ​कहीं इस फैसले से यू टर्न भी ले लिया गया. कहीं अजीब से बैन भी रहे.

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    दीवाली (Happy Diwali) के मद्देनज़र दिल्ली में पूरी तरह से पटाखों और आतिशबाज़ी पर प्रतिबंध लगाकर कहा गया था कि प्रतिबंध के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और जेल भी हो सकेगी. लेकिन, यह कड़ा प्रतिबंध भी कारगर न साबित होने की खबरें रहीं और दिल्ली में खूब पटाखे चलने से प्रदूषण (Pollution in Delhi) अच्छा खासा बढ़ा, हवा और ज़हरीली हो गई. दूसरी तरफ, कोलकाता (Diwali in Kolkata) ने मिसाल कायम करते हुए आतिशबाज़ी न के बराबर की और पर्यावरण को राहत दी. चूंकि भारत में दीवाली का त्योहार कम से कम एक हफ्ते तक चलता है इसलिए अब भी आप जान सकते हैं कि किस राज्य में पटाखे चलाने को लेकर किस तरह के नियम कायदे हैं.

    जैसा कि चर्चा में आ चुका है कि दिल्ली में पूरी तरह बैन लगाया गया, लेकिन दीवाली की रात इस बैन की धज्जियां उड़ गईं. दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 9 नवंबर से 30 नवंबर तक के लिए पूरी तरह पटाखों पर बैन घोषित किया था. और भी कई राज्य इस श्रेणी में थे जिन्होंने पूर्ण बैन घोषित किया था, तो कुछ राज्य ऐसे भी थे, जहां आंशिक बैन और कहीं कोई बैन न होने की स्थिति रही. जानिए आपके राज्य में इसे लेकर क्या नियम रहे और हैं.

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    यहां है पूरी तरह बैन
    राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने 2 नवंबर को पटाखे चलाने पर पूरी तरह बैन घोषित किया था. केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ में बिक्री और आतिशबाज़ी पर बैन लगाया गया. वायु प्रदूषण और कोरोना पर नियंत्रण के मकसद से कलकत्ता हाईकोर्ट ने दीवाली, छठ, काली पूजा और कार्तिक पूजा के दौरान बिक्री और पटाखे चलाने पर बैन लगाया. कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर 6 महीने जेल तक की सज़ा का भी नियम बना.

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    कुछ राज्यों में पटाखों पर प्रतिबंध रहा तो कुछ राज्यों में शर्तों के साथ छूट.


    इनके अलावा, सिक्किम में पूरे त्योहारी मौसम में आतिशबाज़ी पर बैन है. अगले साल 31 जनवरी तक नागालैंड में प्रतिबंध है. 30 नवंबर तक ओडिशा में पूरी तरह बैन लगाया गया. जबकि महाराष्ट्र में प्रतिबंध ज़रा उलझा हुआ सा रहा यानी थोड़ी मनाही थोड़ी इजाज़त.

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    थोड़ा बैन, थोड़ी छूट
    महाराष्ट्र में कोई बैन नहीं लगाया गया लेकिन लोगों से खुद संयमित रहने की अपील की गई. दूसरी तरफ, मुंबई में बीएमसी ने पटाखों पर बैन लगाया और ​बाद में लक्ष्मी पूजन के समय पटाखों की इजाज़त दे दी. फिर ये भी हुआ कि सिर्फ फुलझड़ी और अनार जैसी आतिशबाज़ी की ही इजाज़त दी गई और वो भी निजी परिसरों में. इसी तरह, मध्य प्रदेश में चीनी पटाखों और ऐसी आतिशबाज़ी की इजाज़त नहीं दी गई, जिन पर हिंदू देवी देवताओं के चित्र बने हों.

    शर्तों के साथ पटाखों की छूट
    कोरोना और प्रदूषण के हालात के मद्देनज़र हरियाणा में पटाखे चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया. 6 नवंबर को इस फैसले के बाद सीएम मनोहरलाल खट्टर ने यू टर्न लेकर कहा कि दीवाली की रात दो घंटे के लिए पटाखे चलाने की राहत मिलेगी. छत्तीसगढ़ में ग्रीन पटाखों की इजाज़त दी गई और हर त्योहार के लिए पटाखे चलाने का टाइमटेबल दिया गया. दीवाली के लिए रात 8 से 10, छठ के लिए सुबह 6 से 8, गुरुपूरब के लिए रात 8 से 10 और न्यू ईयर व क्रिसमस के लिए रात 11.55 से 12.30 के बीच आतिशबाज़ी की इजाज़त है.

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    इसी तरह, झारखंड में रात 8 से 10 का समय दीवाली पर ग्रीन पटाखे चलाने के लिए फिक्स हुआ. पहले बैन लगाने की बात हुई, लेकिन फिर कर्नाटक सरकार ने ग्रीन पटाखों को मंज़ूरी दे दी. ईको फ्रेंडली दीवाली मनाने की अपील के साथ. तमिलनाडु में भी समय फिक्स किया गया और पब्लिक प्लेस पर आतिशबाज़ी के लिए पहले से परमिशन लेने का नियम भी बनाया गया. इसी तरह, आंध्र प्रदेश में भी दो घंटे के लिए पटाखे चलाने की छूट रही.

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