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क्या तरक्की के मामले में भारत से आगे निकल जाएगा बांग्लादेश?

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 4, 2019, 10:56 PM IST

मौजूदा आंकड़े और योजनाबद्ध तरीके से बांग्लादेश जिस तरह इंडस्ट्री सेक्टर को आगे बढ़ा रहा है, उससे विशेषज्ञ भी कहने लगे हैं कि अगर उसकी ग्रोथ रेट ऐसी ही रही तो ये देश भारत से आगे निकल जाएगा

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  • Last Updated: October 4, 2019, 10:56 PM IST
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नईदिल्ली. बांग्लादेश (Bangladesh) की प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) इन दिनों भारत (India) के दौरे पर हैं. उनके इस दौरे में कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. जो कई क्षेत्रों में भारत के सहयोग से जुड़े हुए हैं लेकिन एक सवाल भी इन दिनों फिर चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या 1971 में बना बांग्लादेश आने वाले सालों में तरक्की के मामले में भारत से ज्यादा आगे निकल जाएगा. वैसे अगर हालिया आंकड़ों की बात करें तो लगता है कि ऐसा हो तो हैरानी नहीं होना चाहिए.

एशिया (Asia) के ज्यादातर देशों के आगे बढ़ने की कहानी करीब एक जैसी ही है. चाहे वो चीन (China) हो या साउथ कोरिया (South Korea), भारत या फिर अब बांग्लादेश. इन सभी कुछ दशकों पहले तक गरीब देशों में शुमार किये जाते थे. फिर उन्होंने गरीबी से औद्योगिकरण (Industrialization)  की ओर रुख किया.

शुरुआत हल्की फुल्की मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) से हुई. आमतौर पर टैक्सटाइल्स इंडस्ट्री (Textile Industry) के साथ. फिर कुछ बड़े और जटिल उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग शुरू हुई. फिर इसी क्रम में इन देशों ने विकास के रास्ते में अपनी पहचान बनानी शुरू की और फिर खुद की तकनीक विकसित कर छलांग लगाने लगे.

फिर जैसे-जैसे ये देश अमीर हुए. यहां प्रति व्यक्ति आय बढ़ी. जीवनशैली बेहतर हुई. तब धीरे-धीरे उनकी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ीं उन देशों की ओर जाने लगीं, जहां उनकी तुलना में बहुत सस्ता था. यही कहानी अब बांग्लादेश की लगती है.

काफी हद तक ये कहानी बदलते हुए बांग्लादेश पर भी लागू हो रही है. 80 और 90 के दशक की शुरुआत में बांग्लादेश का नाम आते ही ऐसे देश की तस्वीर उभरती थी, जो अकाल, बीमारियों, घोर गरीबी और बाढ़ से त्रस्त था.



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गारमेंट इंडस्ट्री ने बदली किस्मत
बांग्लादेश की किस्मत बदलनी शुरू हुई गारमेंट इंडस्ट्री के साथ. 80 के दशक में बांग्लादेश में अपने कुछ लोगों को दक्षिण कोरिया भेजा कि वो जाकर वहां पर उनकी गारमेंट इंडस्ट्री की बारीकियों को सीखें. 90 के दशक में बांग्लादेश में ये इंडस्ट्री खड़ी होनी शुरू हुई. फिर 2000 के आगे बढ़ने के साथ ये तेजी से आगे बढ़ने लगी.

अब बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी रेडिमेड कपड़ों की इंडस्ट्री में तब्दील हो चुकी है. दुनियाभर में सबसे ज्यादा रेडिमेड कपड़ों का निर्यात यहीं से होता है. सारे टॉप ब्रांड्स को दरअसल यहीं काफी सस्ते में मैन्युफैक्चर किया जाता है. किसी जमाने में भारत और चीन गारमेंट इंडस्ट्री की ताकत थे लेकिन अब उसकी जगह बांग्लादेश ने ले ली है.

बांग्लादेश की कुल इकोनॉमी इस समय करीब 180 अरब डालर की है और उसमें गारमेंट इंडस्ट्री का योगदान करीब 36 अरब डॉलर का है. ये इंडस्ट्री हर साल 15-17 फीसदी की दर से बढ़ रही है. इसमें 40-50 लाख लोग रोजगार पाते हैं. अब ये इंडस्ट्री डिजाइनिंग से लेकर गारमेंट के हर पहलू तक खुद पर निर्भर है और सुरक्षा के नॉर्म्स को बेहतर बनाती जा रही है.

बांग्लादेश की कुल इकोनॉमी इस समय करीब 180 अरब डालर की है और उसमें गारमेंट इंडस्ट्री का योगदान करीब 36 अरब डॉलर का है. ये इंडस्ट्री हर साल 15-17 फीसदी की दर से बढ़ रही है.


बांग्लादेश में बढ़ रहा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 
इस इंडस्ट्री के क्रमिक विकास और छलांग ने बांग्लादेश को ये आत्मविश्वास दिया कि अगर सुनियोजित तरीके से इंडस्ट्री को विकसित करें तो आगे बढा जा सकता है. ये भी कहना चाहिए कि इस समय बांग्लादेश दक्षिण एशिया का ऐसा देश भी है, जहां लेबर सबसे सस्ता है.

भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर घट रहा है तो बांग्लादेश में बढ़ रहा है. बेशक पिछले कुछ सालों में भारत आटो और स्मार्ट फोन उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष पांच-छह बड़े हब में शुमार हो चुका है लेकिन हकीकत ये भी है कि ओवरआल मैन्युफैक्चरिंग में घटी है.

भारत से बेहतर ग्रोथ रेट 
बांग्लादेश की मौजूदा विकास दर आठ फीसदी की है. इसी दौरान भारत में ग्रोथ रेट पांच रही तो पाकिस्तान में और कम. विशेषज्ञ मानते हैं कि बांग्लादेश की ग्रोथ रेट और बढ़ती हुई नजर आ सकती है. प्रति व्यक्ति आय के मामले में बांग्लादेश अब भारत के करीब पहुंच रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार बांग्लादेश में इस साल प्रति व्यक्ति आय 1,750 डॉलर हो गई. वहां गरीबी कम हो रही है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार बांग्लादेश में इस साल प्रति व्यक्ति आय 1,750 डॉलर हो गई. वहां गरीबी कम हो रही है. (बांग्लादेश का राष्ट्रीय़ ध्वज-प्रतीकात्मक तस्वीर)


प्रति व्यक्ति आय में आगे निकल जाएगा
आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में भारत में प्रति व्यक्ति आय 2199 डॉलर है. अगर यही हालत रही तो अगले एक से दो सालों में संभव है कि बांग्लादेश इस मामले में हमसे आगे निकल जाए.

बांग्लादेश में लोगों की औसत उम्र 72 साल है जबकि भारत में 68 साल और पाकिस्तान में 66 साल. कई मोर्चों पर ये देश ना केवल पाकिस्तान बल्कि भारत से आगे निकल चुका है. बाल मृत्यु दर और लैंगिक समानता में भी वो भारत को पीछे छोड़ चुका है. वर्ल्ड बैंक और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का कहना है कि 16 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश ने आबादी नियंत्रण के मामले में भी गजब का काम किया है.

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एक जमाना था जब बांग्लादेश से अकाल की खबरें आती थीं. लेकिन 70 के दशक में वहां भी कृषि क्षेत्र में क्रांति होनी शुरू हुई और तस्वीर बदली. अब वो लगातार कृषि उत्पादन में खासी वृद्धि कर रहा है. बेशक हम अब भी दुनिया के बड़े कृषि उत्पादक देशों में हैं लेकिन अब हमारी जीडीपी में कृषि का योगदान कम हो रहा है.

इंफार्मेशन टैक्नॉलॉजी में छलांग की तैयारी
हां, आप भले हैरान हों लेकिन भारत से ही सीखकर बांग्लादेश आईटी इंडस्ट्री में छलांग लगाने की तैयारी में हैं. वर्ष 2000 के शुरू में बांग्लादेश से कुछ लोग आईटी सिटी कहे जाने वाले बेंगलुरु पहुंचे. वहां उन्होंने इंफोसिस और दूसरी बड़ी साफ्टवेयर कंपनियों में जाकर उनका काम देखा.

वर्ष 2000 के शुरू में बांग्लादेश ने अपने कुछ लोगों को बेंगलुरु भेजा ताकि वो देखें कि भारत का आईटी कैसा है और क्यों तरक्की कर रहा है. यहां से लौटकर उन लोगों ने वहां आईटी सेक्टर की नींव रखी, जिसने दुनियाभर में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है


जब वो कुछ समय बाद भारत से अनुभव लेकर लौटे तो बांग्लादेश में आईटी इंडस्ट्री की नींव पड़ी. अब बांग्लादेश में 120 के आसपास ऐसी कंपनियां हैं, जो एक अरब डॉलर की हो चुकी हैं. ये 35 देशों के साफ्टवेयर एक्सपोर्ट का काम रही हैं. अगर बांग्लादेश के अखबारों में छपी रिपोर्ट को देखें तो वहां 2025 तक आईटी इंडस्ट्री में पांच गुना छलांग लगाने की योजना है. बांग्लादेश सरकार ने इसे विकसित करने पर ध्यान देना शुरू किया है. इसके स्पेशल जोन बनाए जा रहे हैं.

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वर्ष 2009 में डिजिटल बांग्लादेश की शुरुआत हुई थी. अब वो दुनिया का दूसरा ऐसा देश है, जहां सबसे ज्यादा लोग आनलाइन काम करते हैं. बैंकों से पैसे का लेन-देन बड़े पैमाने पर डिजिटल तरीकों से होता है. बांग्लादेश की करीब 30 फीसदी आबादी डिजिटल ट्रांजिक्शन का इस्तेमाल करती है.

जेनेरिक दवा सेक्टर में बड़ा काम
हालांकि अब भी भारत जेनेरिक दवाओं और अन्य तरह की दवाओं के क्षेत्र में नंबर वन है लेकिन बांग्लादेश जेनेरिक दवाओं के निर्माण में दूसरा बड़ा देश बन चुका है. कम से कम 60 देशों को वो अपने यहां बनी दवाएं निर्यात कर रहा है. इस सेक्टर में भी बड़ी छलांग लगाने के लिए बांग्लादेश में ब्लू प्रिंट तैयार किया हुआ है.

निवेश के लिए सबसे मुफीद जगह
चीन की कंपनियां बड़े पैमाने पर अपना कारोबार समेटकर बांग्लादेश में मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयां लगा रही हैं. केवल चीन ही बल्कि भारत, जापान और कई यूरोपीय देशों के लिए अब बांग्लादेश निवेश की सबसे बेहतरीन जगह बनकर उभर रहा है. ऐसे में समझा जा सकता है कि तस्वीर क्या कह रही है.

केवल चीन ही बल्कि भारत, जापान और कई यूरोपीय देशों के लिए अब बांग्लादेश निवेश की सबसे बेहतरीन जगह बनकर उभर रहा है.


चीनी वेबसाइट साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी बिजनेसमैन लियो झुआंग लिपेंग जब 22 साल पहले ढाका पहुंचे थे तो वहां एयरपोर्ट की हालत खस्ता थी, केवल दो लगेज कंवेयर बेल्ट्स काम कर रही थीं. बिजली भी सही तरीके से नहीं आती थी. उन्होंने उत्तरा एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन में जहां अपनी यूनिट लगाई वो जगह ढाका से आठ से दस घंटे के सड़क रास्ते की दूरी पर थी. अब बांग्लादेश का ढाका एयरपोर्ट तो लकदक हो ही गया है, साथ ही वहां के बहुत से शहर एयर ट्रांसपोर्ट से जुड़ चुके हैं, इसमें वो शहर भी है, जहां झुआंग ने अपनी यूनिट लगाई है.

बांग्लादेश की इकोनामी, पालिटिक्स और सिविल सोसायटी पर किताब लिख चुके प्रोफेसर डेविड लेविस का मानना है कि देश की इकोनॉमी मजबूत है और इसकी वजह उसकी मजबूत एक्सपोर्ट रणनीति है. इसी वजह से बांग्लादेश बहुत तेजी से उभर भी रहा है.

कई तरह की छूट भी
बांग्लादेश अपने यहां आ रही विदेशी कंपनियों को एक बड़ी छूट ये भी दे रहा है कि अगर उन्हें बाहर से कच्चा माल आयात करना हो तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. ये ऐसी पॉलिसी है, जिसने मैन्युफैक्चर्स की बांछें खिला दी हैं. एक अन्य चीनी उत्पादक कई फैक्ट्रियां हेन्नान प्रांत के शेनझेन, गुआंगझोऊ और कूमिंग में थीं. करीब दस साल पहले उन्होंने ज्यादातर फैक्ट्रियां बद कर दीं. अब उनका 93 फीसदी काम बांग्लादेश में हो रहा है.

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First published: October 4, 2019, 9:04 PM IST
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