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पाकिस्तान, बांग्लादेश के क्रिकेटरों की तुलना में कैसे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं भारतीय क्रिकेटर्स

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: January 3, 2020, 2:04 PM IST
पाकिस्तान, बांग्लादेश के क्रिकेटरों की तुलना में कैसे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं भारतीय क्रिकेटर्स
भारतीय क्रिकेट टीम को दुनिया में बेहतर अंग्रेजी बोलने वाली टीमों में शुमार किया जाता है

बांग्लादेश प्रीमियर लीग के दौरान सिलहट टीम के कोच हर्शले गिब्स ने भन्नाकर कहा कि बांग्लादेशी क्रिकेटरों की अंग्रेजी इतनी खराब है कि समझ में नहीं आता कि उनसे कैसे बात करूं ये समझ में ही नहीं आ रहा है. बांग्लादेश क्रिकेट टीम की लचर अंग्रेजी पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. कुछ ऐसा ही हाल पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान की क्रिकेट टीमों का भी है लेकिन वहीं टीम इंडिया के क्रिकेटर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं, आखिर ऐसा कैसे हो जाता है

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  • Last Updated: January 3, 2020, 2:04 PM IST
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बांग्लादेश प्रीमियर लीग खेली जा रही है. साउथ अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर हर्शले गिब्स बीपीएल की टीम सिलहट थंडर के कोच हैं. एक दिन पहले उन्होंने भन्नाकर कहा, बांग्लादेशी क्रिकेटरों की अंग्रेजी बहुत खराब है. समझ में ही नहीं आता कि उनसे कैसे बातचीत की जाए. दरअसल बांग्लादेशी क्रिकेटरों की अंग्रेजी की समझ बहुत खराब है. ऐसे ही आरोप अक्सर पाकिस्तान और श्रीलंका के क्रिकेटरों पर भी लगते रहे हैं.

अंग्रेजी की समस्या नई नवेली अफगानिस्तान टीम के साथ भी है. असल में एशिया के तमाम उन मुल्कों में जहां क्रिकेट खेली जाती है, वहां अब नेशनल टीम में क्रिकेटर्स उस बैकग्राउंड से आ रहे हैं, जो बहुत साधारण है. साथ ही टीम में आने वाले क्रिकेटर ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं होते. लिहाजा जब वो इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर खेलते हैं तो उन्हें ना केवल इस अंतरराष्ट्रीय भाषा को बोलने बल्कि समझने में भी समस्याएं आती हैं.

पाकिस्तान क्रिकेटर्स की खराब अंग्रेजी पर तो तमाम जोक्स भी बने हुए हैं. किसी भी इंटरनेशनल खेल में भाषा एक बड़ी भूमिका निभाती है, खासकर तब जब आप लगातार विदेशी टीमों या विदेशी कोचों के साथ खेल रहे हों.

ऐसा आखिर भारतीय क्रिकेटरों के साथ क्यों नहीं है. क्यों इंटरनेशनल क्रिकेट में कहा जाता है कि भारतीय क्रिकेटरों की अंग्रेजी में बात करने की क्षमता इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के बाद तीसरे नंबर पर है. ये बात तब हैरानी वाली जरूर लगती है, क्योंकि अब टीम इंडिया में भी क्रिकेटर छोटे शहरों और कस्बों से आ रहे हैं. आमतौर पर उनकी बैकग्राउंड और पढाई ऐसी नहीं होती कि वो अंग्रेजी में बहुत सहज महसूस करें, तब आखिर वो नेशनल टीम में आते ही कैसे फर्राटे वाली अंग्रेजी बोलने लगते हैं.

जब समी को लोगों ने फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते सुना तो..
कुछ समय पहले जब लोगों ने भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हुए सुना तो उनके लिए ये हैरानी भरा था. क्योंकि शमी ऐसे भारतीय क्रिकेटर माने जाते रहे हैं, जिन्हें अंग्रेजी बोलने में बहुत दिक्कत होती थी.

मोहम्मद शमी जब टीम में आए तो वो अंग्रेजी भाषा में तंग थे लेकिन जल्दी ही उन्होंने आत्मविश्वास से अंग्रेजी में बोलना शुरू कर दिया
भारतीय क्रिकेट टीम में आधे से ज्यादा खिलाड़ी छोटे कस्बों या शहरों और मामूली बैकग्राउंड से आते हैं. वो आमतौर पर ऐसे घरों के होते हैं जिसमें अंग्रेजी बोलने का सवाल ही नहीं उठता. अंग्रेजी बोलना उनकी सबसे बड़ी कमजोरी होती है लेकिन भारतीय टीम में आते ही वो फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने लगते हैं. आखिर ऐसा कैसे हो जाता है.

मौजूदा टीम इंडिया में चाहे विराट कोहली हों या फिर चेतेश्वर पुजारा, या फिर मोहम्मद शमी या पृथ्वी शॉ...या दूसरे खिलाड़ी, ये सभी जब इंटरनेशनल क्रिकेट में आने के बाद मीडिया से रू-ब-रू होते हैं तो अंग्रेजी भाषा में उनका आत्मविश्वास से बोलना देखते बनता है.

मैचों के दौरान जब कमेंटेटर्स उनके रिएक्शंस लेते हैं तो बगैर झिझक इस तरह अंग्रेजी में धाराप्रवाह बोलते हैं कि किसी को अंदाज भी नहीं होता कि करियर के शुरुआत में वो इस भाषा में बहुत तंग थे. अंग्रेजी बोलने में उन्हें झिझक होती थी.

जब कपिलदेव टीम में आए थे
कपिल देव जब भारतीय क्रिकेट टीम में आए थे तो उन्हें लंबे समय तक इंटरनेशनल दौरों में मीडिया से बात करने के दौरान अंग्रेजी की झिझक का सामना करना पड़ा. फिर उन्होंने इसके लिए बकायदा एक प्राइवेट ट्यूटर लगाया था.

ढाई तीन दशक पहले तक छोटे शहरों या मामूली बैकग्राउंड से नेशनल टीम में आने क्रिकेटरों के लिए अंग्रेजी भाषा बड़ा हौवा थी. उन्हें सबसे बड़ा डर यही लगता था कि वो प्रेस कांफ्रेंस का सामना कैसे करेंगे. लेकिन अब ऐसा नहीं होता.

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प्रतीकात्मक तस्वीर


उमेश यादव और हार्दिक पांड्या नहीं बोल पाते थे इंग्लिश 
उमेश यादव और हार्दिक पांड्या जैसे क्रिकेटर जब टीम इंडिया में सेलेक्ट किए गए, तो उन्हें इंग्लिश से इस कदर डर लगता था कि वो प्रेस कॉन्फ्रेंस और रिपोर्टरों से बात करने से कन्नी काटते थे कि कहीं उनसे अंग्रेजी में सवाल ना पूछ लिया जाए.

ये दोनों क्रिकेटर दसवीं भी पास नहीं हैं लेकिन अब वही जब वे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं तो हैरानी होती है कि एेसा कैसे हो गया. इसके पीछे आखिर क्या चमत्कार है.

केवल यही नहीं आमतौर पर टीम इंडिया में कम ही क्रिकेटर होंगे, जो ग्रेजुएट भी हों. ज्यादातर अपनी पढ़ाई हाईस्कूल या इंटर करते हुए बीच में ही छोड़ देते हैं.

बीसीसीआई सिखाता है इंग्लिश लेंग्वेज
दरअसल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पिछले कुछ सालों से इस पहलू पर खास ध्यान देता रहा है. वो ऐसे सभी क्रिकेटरों के पर्सनालिटी डेवलपमेंट और इंग्लिश स्पिकिंग के सेशन आयोजित करता है. उन्हें इसके लिए दौरों में भी कोच उपलब्ध कराए जाते हैं. साथ ही फोन के जरिए भी इंग्लिश स्पीकिंग सुधारने में मदद की जाती है.

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बीसीसीआई इस बात पर खास ध्यान देता है कि टीम इंडिया में सेलेक्ट होने वाले क्रिकेटर अच्छी अंग्रेजी बोल सकें


बीसीसीआई का खास ध्यान
बीसीसीआई खास ध्यान देता है कि टीम इंडिया में जिन क्रिकेटरों का चयन किया जा रहा है वो न केवल तरीके से अंग्रेजी बोल सकें बल्कि उनका पर्सनालिटी डेवलपमेंट भी हो.

बीसीसीआई मानता है कि भारतीय क्रिकेटरों को मीडिया ब्रीफिंग के अलावा विदेशी दौरों में लोगों से मिलना जुलना होता है, कई तरह के समारोहों में हिस्सा लेना होता है, लिहाजा अंग्रेजी भाषा की प्रवीणता उसकी पर्सनालिटी और आत्मविश्वास को और बेहतर करेगी.

एमएस धोनी को इस सीज़न की सबसे इनोवेटिव थिंकिंग के लिए पुरस्कार से नवाज़ा गया. (BCCI)

एमएस धोनी जब शुरू में टीम में आए तो उन्हें भी अंग्रेजी बोलने में समस्या होती थी लेकिन जल्दी ही उन्होंने इसे दूर कर लियाधोनी भी नहीं बोल पाते थे अंग्रेजी
महेंद्र सिंह धोनी जब शुरुआत में टीम में आए तो उनके साथ भी यही समस्या थी लेकिन फिर उन्होंने साथी खिलाड़ियों के जरिए अपनी इंग्लिश को सुधारा.

वीरेंद्र सहवाग और प्रवीण कुमार जैसे क्रिकेटर तो लंबे समय तक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही जाने से बचते थे और अगर जवाब देते भी थे तो हिन्दी में देते थे और बीसीसीआई का इंटरप्रेटर या मैनेजर उन्हें बताता था कि सवाल में क्या पूछा गया है. प्रवीण कुमार तो अक्सर राहुल द्रविड़ को खुद के बदले आगे कर देते थे.

अंपायरों को भी अंग्रेजी सिखाता है बीसीसीआई
बीसीसीआई केवल क्रिकेटरों ही नहीं बल्कि भारतीय अंपायरों के लिए भी पिछले कुछ सालों से इंग्लिश लेंग्वेज प्रोग्राम शुरू किया है ताकि अंग्रेजी भाषा में उनकी बातचीत का स्तर सुधर सके, वो इंटरनेशनल प्लेयर्स से इंटरेक्ट कर सकें. पहली बार अंपायरों के लिए बीसीसीआई ने वर्ष 2015 में ऐसा कोर्स शुरू किया था.

क्या है उस कोर्स में
अंपायरों को इंग्लिश सिखाने के लिए बीसीसीआई ने जो कोर्स शुरू किया था, वो पांच दिन का था, इसमें अंपायरों को कई बैचों में बांटा गया था. इस कोर्स को बीसीसीआई ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के साथ ब्रिटिश काउंसिल की मदद से तैयार किया था.

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First published: January 3, 2020, 2:04 PM IST
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