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माल्या को दिवालिया घोषित करने का मतलब क्या है, क्या इससे उसको फायदा होगा

विजय माल्या (Vijay Mallya) ने इस आदेश पर आपत्ति जताई थी. (फाइल फोटो)

विजय माल्या (Vijay Mallya) ने इस आदेश पर आपत्ति जताई थी. (फाइल फोटो)

विजय माल्या (Vijay Mallya) पिछले चार साल से लंदन में प्रत्यर्पण (Extradition) के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे. अब उन्हें को लंदन हाई कोर्ट (London High Court) ने दिवालिया घोषित कर दिया है.

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    विजय माल्या (Vijay Mallya) को ब्रिटेन के लंदन की अदालत ने दिवालिया (Bankrupt) घोषित करने के आदेश को मंजूरी दे दी है. साल 2016 में देश छोड़ कर भागने वाले विजय माल्या पिछले चार साल से अपने खिलाफ प्रत्यर्पण (Extradition) के मामले में कानूनी लड़ाई रहे हैं. माल्या पर भारत में धोखाधड़ी और मंनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं. इस मालमे में माल्या ने भारतीय स्टेट बैंक पर भी आरोप लगाए हैं कि दिवालिया घोषित करने में बैंक का स्वार्थ है. इस फैसला का विजय माल्या पर क्या असर होगा और इससे वह पैसा भारत लाने में क्या मदद मिलेगी जो माल्या भारत से लेकर चंपत हुए हैं या किंगफिशर के मालिक को ही फायदा मिलेगा.

    अब माल्या को अपने भी डेबिट और क्रेडिट कार्ड के साथ बची हुई सम्पत्ति दिवालिया ट्रस्टी को देनी होगी. यह ट्रस्टी इस बात की पड़ताल करेगा कि उनकी देनदारी और सम्पत्ति अब कितनी बची है. इस आंकलन का उपयोग उनके कर्जों को चुकाने में किया जाएगा जो उसने नहीं चुकाए हैं. इसमें कई भारतीय बैंकों को बकाया चुकाया जाना बाकी है.

    कब से चल रहा है मामला
    साल 2013 के बाद से माल्या प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, गंभीर धोखाधड़ी अन्वेषण कार्यालय (SIFO) और सेबी की जांच के दायरे में आया था, जब उसकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइन्स लिमिटेड भारतीय बैंकों से लिया गया दस हजार करोड़ का कर्ज चुकाने में नाकाम रही थी.

    किन बैंकों से लिया था कर्ज
    इस बैंक समूह में बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉर्पोरेशनबैंक, फेडरल बैंक लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट  बैंक ऑफ मैसूर, यूसीओ बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, जेएम फाइनेशियल ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.

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    विजय माल्या (Vijay Mallya) ने बैंकों पर ईडी को पैसा देने के लिए दिवालिया घोषित करने की मांग करने का आरोप लगाया था. (फाइल फोटो)


    कैसे घाटे से कर्ज बढ़ता गया माल्या का
    65 वर्षीय माल्या बैंगलुरू स्थित यूनाइटिड ब्रिवरीज होल्डिंग लिमिटेड का चेयरमैन होने के साथ साल 2003 में शुरू हुई किंगफिशर एयरलाइंस कंपनी के मालिक भी हैं. 2007 में इन्होंने एयर डेक्कन नाम की सस्ती एयरलाइन के 46 प्रतिशत हिस्सेदारी को 550 करोड़ रुपयों में खरीदा जो खुद उस समय कर्ज में थे. इसके बाद से साल 2008 में माल्या की एयरलाइंन घाटे में चलने लगी. यहां से कर्ज बढ़ने लगा.

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    गारेंटर हुआ दिवालिया
    साल 2012 तक एयरलाइन ने काम करना बंद कर दिया क्यों वह अपने खर्चे तक वहन नहीं कर सकती थी. इसके बाद 2013 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुआई में बैंकों के समूह ने माल्या के गारेंटर यूबीएचएल से कर्ज अदायगी करने को कहा जो छह हजार करोड़ तक पहुंच गया था. 2014 के अंत में यूपीएचएल ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था.

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    विजय माल्या (Vijay Mallya) लंदन में साल 2017 से केस चल रहा है. (फाइल फोटो)


    माल्या का आरोप
    मार्य 2016 में ही माल्या भारत से भाग कर यूके पहुंच गया और फरवरी 2017 में भारत ने ब्रिटेन को प्रत्यर्पण निवेदन भेजा. तभी से प्रत्यर्पण का यह मामला यूके की अदलात में चल रहा है. तब माल्या ने कहा था कि वह कर्ज चुकाने को तैयार है. अब दिवालिया घोषित करने के आदेश के बाद माल्या ने ट्वीट कर कहा कि ईडी ने उसके 14 हजार करोड़ की सम्पत्ति को अटैच किया है, जबकि उसका कर्ज केवल 6200 करोड़ है. माल्या का आरोप है कि बैंकों को ईडी को पैसा देना है इसलिए वे दिवालिया घोषित करवाना चाहते हैं.

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    माल्या के दिवालिया घोषित होने से उसका केस कमजोर तो पड़ा है, क्योंकि दिवालिया घोषित करवाने का प्रयास भारतीय बैंक समूह ही कर रहा था. बैंकों का कहना है कि माल्या के कर्ज चुकाने की पेशकश का मतलब नहीं रह गया है. वहीं दौरान जस्टिस माइकल ब्रिग्स ने भारतीय बैंकों के समूह की इस दलील को भी माना का माल्या भारत वापस जाकर कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करेंगे.

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