किसानों को जमीन का मालिकाना हक क्यों नहीं देता है चीन?

किसानों को जमीन का मालिकाना हक क्यों नहीं देता है चीन?
चीन में जमीन के हर टुकड़े पर सरकार का अधिकार है.

चीन (China) में जमीन पर किसानों (Farmers) का मालिकाना हक नहीं है. किसान सिर्फ खेत जोत सकते हैं लेकिन फसल कहां और कैसे बिकेगी, ये भी सरकार तय करती है.

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चीन में एक संदेश किसानों के लिए हर साल बिल्कुल समान रहता है और वो ये कि सरकार प्रगति की राह में पीछे छूट गए ग्रामीण इलाकों में बड़े सुधार करेगी. इस साल भी कुछ ऐसा ही हुआ. किसानों से वादे किए गए कि उनके बच्चों को शिक्षित किया जाएगा, शहरों की तरह सुविधाएं दी जाएंगी और जमीन की गुणवत्ता सुधारने में बड़ा इन्वेस्टमेंट किया जाएगा. लेकिन बीते दशकों में चीन में शहर और गांव के बीच का अंतर बढ़ता ही चला गया है. एक्सपर्ट्स इसका दोष उस सरकारी नीति को देते हैं जिसके मुताबिक जमीन पर किसानों का मालिकाना हक नहीं है. किसान सिर्फ खेत जोत सकते हैं लेकिन फसल कहां और कैसे बिकेगी, ये सरकार तय करती है. जमीन पर किसानों को मालिकाना हक न दिए जाने का फैसला चीन में कम्यूनिस्ट क्रांति के बाद ही ले लिया गया था.

चीन के पूर्वी इलाके Xiaoxihe में धान की खेती होती है. यहां बड़े स्तर पर मछली पालन किया जाता है. लेकिन किसान जमीन सरकार से लीज पर ले सकता है. मालिकाना हक तो वो सपने में भी नहीं सोच सकता. Dai Jialiang नाम के एक 69 वर्षीय किसान एक छोटे जमीन के टुकड़े पर चावल और सब्जियां उगाते हैं. ये जमीन उन्होंने सरकार से लीज पर ली है. यानी वो कड़ी मेहनत करके फसल तो उगाते हैं लेकिन जमीन का मालिकाना हक कभी हासिल नहीं कर पाएंगे. वो बेहद सामान्य जिंदगी जीते हैं. हर साल नियमित रूप से आने वाले सरकारी वादे बस सुनते रहते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (विकीपीडिया से साभार)




Dai कहते हैं-चीन में मालिकाना हक संभव नहीं है. सोशलिजम इसकी छूट नहीं देता. जब 70 साल पहले पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना हुई थी तब नेताओं ने जिंदगियां बदलने का वादा किया था. और शुरुआत में ऐसा किया भी गया. विशेष तौर से अमीरों से जमीन लेकर गरीबों को दी गई. लेकिन कुछ सालों के भीतर जमीन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर दिया गया. इसके बाद से जमीन का हर टुकड़ा सरकार के हाथों में हैं.



ग्रामीण इलाकों में लोगों को सरकार की नीतियों से सबसे ज्याद मुश्किलें उठानी पड़ती हैं. ग्रामीण इलाकों में चीन की आधी से ज्यादा जनसंख्या रहती है. बीते साल चीन की ग्रोथ रेट 28 सालों में सबसे कम रही है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ग्रामीण इलाकों की समस्याएं ठीक करने की बात लगातार कहते रहे हैं. वो कहते रहे हैं कि देश की अर्थव्यवस्था को फिर तेज करने में ग्रामीण इलाकों का बड़ा योगदान होगा.

माओ जेदॉन्ग


माओ के समय में किए गए आर्थिक सुधारों की वजह से किसानों की जिंदगी में सुधार आया था. Xiaogang गांव के एक म्यूजियम में दिखाया गया है कि कैसे कल्चरल रिवोल्यूशन के दौरान अमीर किसानों पर अत्याचार हुए थे. बाद में सरकार की कलेक्टिंग फार्मिंग की नीति बिल्कुल फेल हो गई थी. इसके बाद किसानों ने फैसला किया वो अपनी जमीनों पर अपने तरीके से खेती करेंगे. इसके जबरदस्त परिणाम आए. चीन ने दुनिया में सबसे तेज गति से प्रगति की. लेकिन इसके बावजूद भी जमीनों पर सरकारी कब्जा बना रहा. अच्छे नतीजे देने के बावजूद भी किसानों को उनकी जमीन का हक नहीं दिया गया.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (विकीपीडिया से साभार)


वक्त के साथ किसानों पर इसका बेहद बुरा प्रभाव पड़ा. मालिकाना हक न मिलने का मतलब साफ है कि किसान जमीन बेच, खरीद नहीं सकता है. साथ ही वो जमीन के आधार पर कोई लोन भी नहीं ले सकता है. अगर वो जमीन छोड़कर शहर में रहने की सोचे तब भी सरकार की तरफ से लीज को लेकर दस सवाल पूछे जाते हैं.

बीते चालीस सालों से हर जनवरी महीने में सरकार एक डॉक्यूमेंट बनाती हैं कि वो गांवों के लिए नई नीति लेकर आएगी. लेकिन शायद चीन में ये कभी संभव नहीं हो पाएगा. माओवाद की शुरुआती नीतियों में ये शामिल था कि जमीनों का हक लैंडलॉर्ड्स के पास नहीं होना चाहिए. इसी वजह से जमीनों पर सरकारी नियंत्रण किया गया. लेकिन अब परेशानियां दूसरे तरह की हैं. इसके बावजूद भी ये बेहद मुश्किल लगता है कि चीन की सरकार जमीन का मालिकाना हक किसानों को दे.

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