साइबेरिया की धरती में वो कौन सा छेद है जो होता जा रहा है बड़ा

साइबेरिया की धरती में वो कौन सा छेद है जो होता जा रहा है बड़ा
साइबेरिया का बाटागाइक क्रेटर दुनिया के सबसे पुराने क्रेटरों में से एक है, लेकिन इस सदी में इसमें तेजी से बदलाव हो रहे हैं. (तस्वीर नासा)

साइबेरिया (Siberia) के बाटागाइक क्रेटर (Batagaika Crater) हाल के कुछ सालों में तेजी से बड़ा हो रहा है. इसको लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है.

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साइबेरिया (Saiberia) के जंगलों में एक बहुत बड़ा छेद (Hole) पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं. एक मीटर लंबा और 50 मीटर गहरा यह छेद साइबेरिया के जंगलों के बीच जब दिखाई देता है तो एक अजीब सा अहसास जगाता है. शायद ही कोई हो जिसे यह हरे भरे ( गर्मी के मौसम में) जंगल के बीच यह न खटके. लेकिन इस छेद को लेकर कहानियां और किस्सों की भी कमी नहीं हैं. किसी को यह नरक की द्वार लगता है तो वहीं वैज्ञानिक हैरान हैं कि यह बड़ा क्यों होता जा रहा है.

क्या है यह बड़ा छेद
बाटागाइका क्रेटर के नाम का यह इस इलाके सबसे बड़े क्रेटरों में से एक है. स्थानीय याकुटियन लोग इस नर्क का रास्ता बताते हैं. आधिकारिक तौर परइस मैगास्लम्प (Megaslump) या थर्मोकार्स्ट (Thermokarst) कहा जाता है. यह हमेशा ही जमे रहने वाला इलाका है जिसे पर्माफ्रॉस्ट कहते  हैं. यह क्रेटर करीब 650,000 साल पुराना है जो यूरेशिया में सबसे पुराना क्रेटर है. यह दुनिया का दूसरा सबसे पुराना क्रेटर है.

क्या समस्या है इसके साथ
साइबेरिया में यूं तो पिछले कुछ सालों में इस तरह के मैगास्लम्प बहुत सारे दिखाई दिए हैं, लेकिन शोधकर्ताओं को लगता है कि यहां के याकुत्स्क इलाके का यह बाटागाइका इस इलाके में की एक बड़ी समस्या को दर्शाता है. यह एक किमी लंबा और 86 मीटर गहरा गड्ढा है लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है.



कैसे बढ़ रहा है ये
याकुत्स्क शहर के 660 किमी उत्तरी पूर्व में याना नदी के बेसिन पर यह मेगास्लम्प या बाटागाइका क्रेटर चौड़ा और  गहरा होता जा रहा है. जिससे आसपास के इलाकों से खतरनाक भूस्खलन का खतरा मंडराने लगा है. सैटेलाइट सेंसिंग से पता चला है कि यह क्रेटर हर साल करीब 20 से 30 मीटर कर चौड़ा होकर खिसक रहा है. ऐसा यहां बर्फ के पिघलने के बाद पानी के बह जाने के बाद होता है.



क्या कारण है इसका
माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कराण यह प्रक्रिया और तेज हो रही है. यहां हजारों सालों से बर्फ के नीचे जमे गैस और खनिज के उत्खनन का नतीजा है कि अब और ज्यादा गैस वायुमंडल में निकल रही है.

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कैसे धंसता जा रहा है ये
जर्मनी के साइंटिफिक मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट की क्सेनिया एशास्टीना ने बीबीसी को ने बताया कि यहां की बर्फ पानी में बदलकर, वाष्पीकृत हो जाती है यह बह जाती है. इसकी वजह से बचे हुए अवसाद बर्फ के साथ नहीं रह पाते और नीचे धंस जाते हैं. इसकी वजह से असमान भूभाग बन जाता है. इसी वजह से यहां ते दक्षिण पश्चिम इसाके में करीब 70 मीटर गहरी खड़ी दीवार बन गई है.

Arctic
बाटागाइक क्रेटर की समस्या का मूल कारण भी जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कब से शुरू हुए बड़े बदलाव होना
ससेक्स यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी के प्रोफेसर जूलियान मुर्टोन ने का मानना है कि यह समस्या 1950 और 60 के दशक में शुरू हुई थी. इस पर्माफ्रॉस्ट में मानवीय गतिविधियों का पिछले 60 सालों में इस इलाके पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ा है.

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वैज्ञानिक मानते हैं  बाटागाइका क्रेटर का अध्ययन इंसान को उसका जानवरों, पेड़ पौधों और पर्यावरण से अन्य गहरे संबंधों के बारे में अहम जानकारी दे सकता है. इससे हमें इतिहास के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है जिससे हमें यह पता चल सकता है कि भविष्य में हमें क्या करना चाहिए.
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