जानिए कैसे अमेरिका ने दुश्मन देश से बदला लेने के लिए तैयार किया था चमगादड़ बम

जानिए कैसे अमेरिका ने दुश्मन देश से बदला लेने के लिए तैयार किया था चमगादड़ बम
अमेरिका की तरफ से चमगादड़ बम का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर करने की तैयारी थी.

कोविड-19 (Covid-19) के साथ संबंध की वजह से चमगादड़ों (Bats) को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. इस जीव से कई महामारियां (Epidemics) निकली हैं जो इंसानों के लिए खतरनाक हैं. लेकिन चमगादड़ों का इस्तेमाल बम के रूप में भी किया जा चुका है. इन चमगादड़ बमों (Bat Bomb) का इस्तेमाल किसी और ने नहीं बल्कि अमेरिका ने किया था. आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी...

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कोरोना वायरस की वजह से इस वक्त चमगादड़ दुनियाभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं. बीते दो-तीन महीनों के दौरान इन पर कई तरह की रिसर्च भी सामने आई हैं. चमगादड़ों पर काम करने वाले एक साइंटिस्ट का अनुमान है कि इनमें 15 हजार तक कोरोना वायरस हो सकते हैं. चमगादड़ों से फैलने वाली महामारियों के बारे में लोगों ने काफी पढ़-सुन रखा है लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है की चमगादड़ों का इस्तेमाल बम के रूप में भी किया जा चुका है. इन चमगादड़ बमों का इस्तेमाल किसी और ने नहीं बल्कि वैश्विक महाशक्ति अमेरिका ने किया था. हालांकि अमेरिका ये प्लान पूरा नहीं हो पाया था. कुछ तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से इसे कैंसिल करना पड़ा था. लेकिन जो प्लान बना था, वो इतना खतरनाक था कि अगर वो पूरा हो जाता तो हजारों लोगों बेदर्द मौत होती.

क्यों बनाया गया था चमगादड़ बम
7 दिसंबर 1941 को अमेरिका के डेंटिस्ट लिटिल एस. एडम्स छुट्टियां मनाने Carlsbad Caverns National Park गए हुए थे. ये जगह अमेरिका न्यू मेक्सिको में पड़ती है और चमगादड़ों की वजह से मशहूर है. डॉ. एडम्स की चमगादड़ों में दिलचस्पी थी. यहीं पर उन्होंने रेडियो पर खबर सुनी कि जापानियों ने अमेरिका की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक पर्ल हार्बर को तबाह कर दिया है. इस खबर ने एडम्स को गुस्से से भर दिया और फिर उन्होंने जापान पर एक बेहद असाधारण हमले की तैयारी करनी शुरू कर दी.

इस मिसाइलनुमा बॉक्स में चमगादड़ भरे गए थे. (तस्वीर-विकीपीडिया)
इस मिसाइलनुमा बॉक्स में चमगादड़ भरे गए थे. (तस्वीर-विकीपीडिया)




कैसे तैयार हुआ ये बम


एक महीने से भी कम समय में डॉ. एडम्स ने अपना काम पूरा किया. फिर इसकी जानकारी व्हाइट हाउस तक पहुंचाई. उन्होंने राष्ट्रपति भवन को आयडिया दिया कि हम जापानी शहरों को बर्बाद कर सकते हैं और इसके लिए मै़ंने एक ऐसा बम तैयार किया है जिसमें धमाका भी नहीं होगा.

उन्होंने समझाया था कि वो चमगादड़ों के साथ छोटे ज्वलनशील बम का इस्तेमाल करेंगे. इन चमगादड़ों को एक कंटेनर में ले जाकर पैराशूट के जरिए जापान में उतारा जाएगा. चमगादड़ जिस बॉक्स में बंद होंगे वो भी एक छोटे धमाके से खुलेगा. ये सारी प्रक्रिया शाम को निपटानी होगी जिससे चमगादड़ जापानी घरों के पास छत पर या किसी अन्य जगह रुकें. डॉ. एडम्स जानते थे कि चमगादड़ रात के वक्त किसी न किसी जगह को अपनी ठीहा बनाते हैं.

उन्होंने बताया कि चमगादड़ों में लगे बमों में टाइमर फिक्स होगा जो एक नियत समय पर फट जाएगा. इन बमों से आग निकलेगी जो ज्यादातर लकड़ी के बने जापानी घरों को अपनी गिरफ्त में ले लेगी और इससे पर्ल हार्बर का बदला लिया जा सकेगा. ये हजारों लोगों की मौत का प्लान था. और मौत भी जल कर होनी थी.

रूजवेल्ट की पत्नी के दोस्त थे डॉ. एडम्स
किस्मत की बात है डॉ. एडम्स उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति हरे फ्रैंकलिन डिलानो रूजवेल्ट की पत्नी को जानते थे. उन्होंने पहले पूरा प्लान उन्हीं को समझाया था. बाद में जब उन्होंने इसकी पूरी तैयारी कर ली तब इसका प्रदर्शन राष्ट्रपति और अन्य अधिकारियों के सामने किया गया. उन्होंने पूरा आयडिया सबके सामने रखा और फिर इसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी होने लगी.

चमगादड़ों का इस्तेमाल कर उस टेस्ट के रूप में कई धमाके किए गए थे. ये टेस्टिंग अमेरिका के न्यू मेक्सिकों में हुई थी.
चमगादड़ों का इस्तेमाल कर उस टेस्ट के रूप में कई धमाके किए गए थे. ये टेस्टिंग अमेरिका के न्यू मेक्सिकों में हुई थी.


अमेरिका में हुई थी कई हमलों की सफल टेस्टिंग
व्हाइट हाउस की तरफ से इसकी जिम्मेदारी National Defense Research Committee को सौंपी. उसी की देखरेख में सब किया जाना था. कई टेस्ट सफलतापूर्वक किए गए और लग रहा था कि अब अमेरिका इसका इस्तेमाल करेगा लेकिन एक दिन अनहोनी घटना घट गई.

एक गलती से पूरा प्लान हुआ था चौपट
गलती से बम लगे कुछ चमगादड़ सेना की गिरफ्त से छूट गए. ये बैट्स हथियारों और फ्यूअल टैंक के पास पहुंच गए. मिलिट्री को ये महसूस हुआ कि जानवरों की मदद से इस ऑपरेशन को अंजाम देने की सोची जा रही है लेकिन ये बहुत महंगा पड़ सकता है. 1944 में इस प्रोग्राम को सरकारी ऑर्डर के साथ बंद कर दिया गया था.

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First published: June 3, 2020, 9:13 AM IST
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